कैसे पहचानें घर का पानी सुरक्षित है या खतरनाक?

Anjali Dwivedi | Jan 03, 2026, 19:12 IST
check home water safety or danger
घर का पानी पीने के लिए सुरक्षित है या खतरनाक, इसे पहचानने के लिए पानी की शुद्धता की जांच के सरल तरीके से की जा सकती है। इस खबर में हम जानेंगे कि यह काम कैसे आसान तरीके से हो सकता है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में जीवन देने वाला पानी ही लोगों के लिए काल बन गया। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 16 लोगों की मौत हो गई और कई लोगों की हालत गंभीर है। कॉलोनी में काफी समय से गंदा पानी आ रहा था और लोग अंजाने में उसी पानी का इस्तेमाल करने से बीमारी की चपेट में आ गए। ऐसे में सवाल यह है कि साफ पानी की पहचान भला कैसे की जा सकती है?



पानी की स्वच्छता की जांच करने के लिए टेस्टिंग किट की मदद ली जा सकती है। इससे न सिर्फ पानी की गुणवत्ता का पता चल सकेगा, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकेगा। हालांकि, पानी टेस्टिंग किट का इस्तेमाल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।



कौन सी पानी टेस्टिंग किट होगी बेहतर?

  • कोलीफॉर्म, ई-कोलाई टेस्ट किट - इस टेस्टिंग किट के नतीजे 90 प्रतिशत तक सही होते हैं। यह टेस्टिंग किट पानी में सीवर से आने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाती है। पानी की टेस्टिंग करने के 18-24 घंटे बाद इसके नतीजे सामने आ जाते हैं।
  • क्लोरीन टेस्टिंग किट - पानी में कीटाणुओं को मारने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। खासकर नगर निगम की सप्लाई वाले पानी में क्लोरीन आम बात है। क्लोरीन किट पानी में क्लोरीन की मात्रा बताती है। ऐसे में अगर पानी में क्लोरीन है तो पानी पीने के लिए सुरक्षित माना जाता है।
  • टर्बिडिटी टेस्ट ट्यूब - कई बार बरसात या पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी गंदा आने लगता है। ऐसे में पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए टर्बिडिटी टेस्ट ट्यूब का इस्तेमाल किया जा सकता है।

घर पर किट कैसे इस्तेमाल करें?

  • पानी की टेस्टिंग करने के लिए सबसे पहले साफ बर्तन में पानी भरें।
  • कोलीफॉर्म किट डालकर छोड़ दें और 18-24 घंटे बाद इसका रंग देखें।
  • क्लोरीन किट पर पानी की कुछ बूंदें डालें और रंग न आने पर समझ जाएं कि पानी असुरक्षित है।
  • टर्बिडिटी ट्यूब के नीचे धुंधला निशान दिखने पर समझ जाएं कि पानी दूषित है।

भागीरथपुरा कांड से जुड़ी खबर पढ़िए...

भागीरथपुरा कांड: दूषित पानी से 16 मौतें, हाईकोर्ट में 4 का दावा



TDS मीटर क्या है?

मिनरल वॉटर यानी पानी में खनिज पदार्थों का पता लगाने के लिए TDS मीटर का उपयोग किया जाता है। साथ ही यह पानी में नमक की मात्रा भी बताता है। TDS मीटर पर 300 मिलीग्राम नमक या मिनरल्स वाला पानी शुद्ध माना जाता है।



वहीं 300-600 मिलीग्राम तक भी पानी पीने लायक होता है। हालांकि, 600 मिलीग्राम से अधिक नमक या मिनरल्स वाला पानी पीना नुकसानदायक साबित हो सकता है।



किट के आंकड़े कितने सटीक?

इन किट्स के आंकड़े काफी हद तक सटीक होते हैं। मगर पानी की शुद्धता के लिए इनपर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है। कई बार ये किट्स पानी में मौजूद बैक्टीरिया को नहीं पकड़ पाती हैं। ऐसे में पानी को लैब टेस्टिंग के लिए भेजना बेहतर होता है।



कितना सुरक्षित है उबला पानी?

कई बार लोग साफ पानी देखकर उसे पीने के लिहाज से सुरक्षित मान लेते हैं। वहीं, नुकसान से बचने के लिए पानी को उबाल कर पीने का तरीका भी इस्तेमाल होता आया है। मगर, ध्यान रहे कि पानी उबालने से उसके बैक्टीरिया खत्म होते हैं। वहीं, पानी में मौजूद कैमिकल्स और मिनरल्स उबलने के बाद भी मौजूद रहते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।



Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • दूषित पानी
  • भागीरथपुरा कांड
  • भागीरथपुरा
  • पानी टेस्टिंग किट
  • मिनरल वॉटर