भागीरथपुरा कांड: दूषित पानी से 16 मौतें, हाईकोर्ट में 4 का दावा

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 16 मौतों में से केवल 4 को ही सरकारी रिकॉर्ड में स्वीकार किया गया है। कांग्रेस ने सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया।

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Rahul Dave
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Photograph: (thesootr)

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INDORE. भागीरथपुरा कांड: दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने अब गंभीर संवैधानिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर इंदौर प्रशासन और राज्य शासन ने हाईकोर्ट में दायर जवाब में सिर्फ चार मौतों को ही दूषित पानी से जोड़कर स्वीकार किया है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।

क्षेत्र में अब तक 16 मौतें सामने आ चुकी हैं। यह दावा सिर्फ परिजनों का ही नहीं, बल्कि स्थानीय पार्षद द्वारा भी किया गया है । अगर चार मौतें सरकारी रिकॉर्ड में हैं, तो बाकी 12 मौतें किसकी जिम्मेदारी हैं?

हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी का कहना है कि यह “हत्यारी सरकार” मौतों के आंकड़ों पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद हाईकोर्ट में केवल चार मौतों का उल्लेख किया गया।

झूठे और अधूरे आंकड़े पेश कर अदालत को भी गुमराह किया गया । पटवारी का दावा है कि वे स्वयं पीड़ितों और मृतकों के परिजनों से मिल चुके हैं और सभी मृतकों में एक जैसे लक्षण सामने आए हैं।

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लापरवाही छिपाने की कोशिश?

मौतों के आंकड़ों को लेकर शुरुआत से ही विरोधाभास बना हुआ है। जब मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंचा, तब शासन की ओर से कहा गया कि केवल चार लोगों की मौत दूषित पानी से हुई है।

स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों का सवाल है अगर चार मौतें दूषित पानी से हुईं,तो बाकी 12 मौतें किस श्रेणी में गिनी जा रही हैं? क्या वे प्राकृतिक मौतें थीं, या फिर प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?

सभी पीड़ितों में एक जैसे लक्षण

द सूत्र ने जिन 16 मृतकों के परिजनों से बात की, उन्होंने बताया कि सभी को दस्त,उल्टियां, तेज पेट दर्द जैसे डायरिया के स्पष्ट लक्षण थे। इसके बावजूद कई मामलों में कारण बदले गए कहीं हार्ट अटैक, तो कहीं अन्य बीमारियों का हवाला दिया गया।परिजनों का सवाल है जब लक्षण एक जैसे थे, तो मौत के कारण अलग-अलग क्यों लिखे गए?

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अब तक जिनकी मौत सामने आई

अरविंद रावत, गोमती लिखार, जीवनलाल, मंजूला दिगंबर वाडे, नंदलाल पाल, संतोष बिगोलिया, सीमा प्रजापत, सुमित्रा देवी, उमा कोरी, उमिला यादव, ताराबाई, अशोकलाल पंवार, अव्यान साहू, शंकर भाया, गीता (पति रामकुंवर) और एक अन्य व्यक्ति।

मामले को ‘नियंत्रित’ दिखाने की कोशिश

एक के बाद एक मौतों और मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से लगातार यह संदेश दिया गया कि स्थिति नियंत्रण में है। पानी की सप्लाई रोकने, टैंकरों से व्यवस्था और निगरानी की बात कही गई, लेकिन ज़मीनी हालात इन दावों पर सवाल खड़े करते रहे।

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सरकार ने जिन मौतों को माना

शासन ने उर्मिला, तारा, नंदलाल और हीरालाल, इन चार मौतों को ही डायरिया से जोड़कर स्वीकार किया है।बाकी मौतों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानि के अनुसार..

  • 294 लोग अस्पताल में भर्ती हुए
  • 93 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज
  • 201 अब भी भर्ती
  • 20 मरीज आईसीयू में
  • एक गम्भीर है

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हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं

भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।एक याचिका हाईकोर्ट बार अध्यक्ष रितेश इनाणी द्वारा, जबकि दूसरी याचिका मनीष यादव  पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी की ओर से दायर की गई है। दोनों याचिकाओं में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। तीसरी याचिका भी लगाने की तैयारी की का रही है ।

आंकड़ों की लड़ाई में सच दबाया जा रहा?

भागीरथपुरा में सवाल सिर्फ मौतों की संख्या का नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन सच स्वीकारने से बच रहा है अगर मौतें दूषित पानी से नहीं हुईं, तो फिर वे हुईं कैसे? और अगर हुईं, तो जिम्मेदार कौन है? यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा बन चुका है।

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