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Photograph: (THESOOTR)
INDORE. स्वच्छता में सिरमौर इंदौर में गंदे पानी से फैले हैजा के चलते हुई 15 मौतों के बाद उठे राजनीतिक तूफान के बीच सीएम डॉ. मोहन यादव ने आखिरकार गुरुवार दो जनवरी को कड़े फैसले लिए। द सूत्र ने जैसा पहले ही खुलासा कर दिया था कि निगमायुक्त दिलीप यादव को भी हटाया जा रहा है और इसके लिए उच्च स्तर पर चर्चा हो रही है। अब सीएम डॉ. मोहन यादव ने ही इसे लेकर टि्वट कर सूत्र की खबर पर मुहर लगा दी है।
सीएम ने यह किया ट्विट
सीएम ने रात 9.21 बजे टिव्ट किया। उन्होंने कहा कि- भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिये जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 2, 2026
नए अधिकारी पर नजर
अब यादव के हटने की बात की पुष्टि होने के बाद नए नामों को लेकर सुगबुगाहट चल पड़ी है। द सूत्र को मिली जानकारी के अनुसार तीन अधिकारियों के नामों का पैनल बन चुका है। इसी पर सीएम और सीएस आपस में चर्चा करेंगे और संभवतः रात में ही मुहर लग जाएगी और आदेश कर दिए जाएंगे। अभी तक परंपरा रही है कि अब एक कलेक्टरी करे हुए आईएएस हो इंदौर निगमायुक्त बनाया जाता है। इसी कड़ी में नाम चल रहे हैं।
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क्यों यादव के लिए आई मुश्किल
यादव कटनी कलेक्टर के बाद सितंबर माह में ही इंदौर पदस्थ हुए थे। भोपाल में उच्च संपर्कों के कारण उन्हें काफी पावरफुल माना गया। लेकिन इसी पावरफुल के चलते नेताओं, जनप्रतिनिधियों से उनकी दूरी बढ़ती गई। इसके चलते निगम में लड़़ाई तेज हो गई। आखिर में जब विवाद हुआ तो यही दूरियां उन पर भारी पड़ गई।
एक समय इंदौर कलेक्टर के रूप में देख रहे थे
उनके आने के बाद उनकी वर्किंग और तेजतर्रार रूप को देखते हुए आगे उन्हें भविष्य में इंदौर कलेक्टर के रूप में भी देखा जा रहा था। लेकिन अब यह राह उनकी कठिन हो गई है। अभी देखना बाकी है कि कहीं ठीक पोस्टिंग भी मिलती या फिर मंत्रालय में लूपलाइन में डाला जाता है।
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श्रीवास्तव को भी किया सस्पेंड
इसके पहले सीएम ने सुबह टिव्ट कर जानकारी दी थी निगमायुक्त यादव, अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। साथ ही सिसोनिया को हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यपालन यंत्री से भी काम वापस लिया जाएगा। इसके बाद सिसोनिया के ट्रांसर आदेश हो गए। वहीं श्रीवास्तव के सस्पेंड करने की फाइल चल पड़ी और संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने उन्हें निलंबित कर दिया।
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राहुल गांधी, उमा, महापौर के बयान ने बढ़ाया दबाव
इस पूरे मामले में पहले इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का बयान सामने आया कि- इस तरह से मैं काम नहीं कर सकता हूं, अधिकारी सुनते नहीं है। मेरे महापौर होने का फिर क्या मतलब है। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता हूं, आप (एसीएस संजय दुबे) मुख्यमंत्री तक यह संदेश पहुंचा दीजिए।
- इसके बाद पूर्व सीएम उमा भारती का तीखा बयान सामने आया और उन्होंने कहा कि- इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!
- उमा भारती यहीं नहीं थमी, उन्होंने यह भी कहा कि- सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं मप्र के शासन, प्रशासन इस महापाप के सभी जिम्मेदार लोग जनता के प्रति अपराध के कठघरे में खड़े हैं।
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फिर राहुल गांधी ने किया तीखा हमला
इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना को लेकर बीजेपी की डबल इंजन की सरकार को आडे़ हाथों लिया। उन्होंने कहा कि- पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं - और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की
फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं - ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है - कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।
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