इंदौर निगमायुक्त दिलीप यादव को भी हटाने पर विचार, उच्च स्तर पर चर्चा, मुख्यमंत्री जल्द लेंगे फैसला

भागीरथपुरा कांड पर सीएम मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया हैं। रोहित सिसोनिया को हटा दिया गया है। अब  निगमायुक्त दिलीप यादव को भी हटाया जा सकता है।

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Sanjay Gupta
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dilip yadav
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Indore. स्वच्छता में सिरमौर इंदौर में गंदे पानी से फैले हैजा के चलते हुई 15 मौतों ने पूरे देश को हिला दिया है। घटना सामने आने के चार दिन बाद इसमें सीएम मोहन यादव ने कड़ा फैसल लिया। निगमायुक्त दिलीप यादव और आईएएस रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस दिया। फिर सिसोनिया को हटा दिया, लेकिन बात यही नहीं थमी है। बात अब निगमायुक्त और 2014 बैच के आईएएस दिलीप यादव की ओर आ रही है। 

उच्च स्तर पर चर्चा दिलीप यादव को हटाया जाए

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निगमायुक्त पद से दिलीप यादव को हटाने पर चर्चा हो रही है। देर रात इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव फैसला ले सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि देश से हैजा गायब हो चुका है। आखिरी बार 2023 में उड़ीसा में इसके फैलने की घटना सामने आई थी। 

वहीं अब देश के सबसे साफ शहर इंदौर में यह घटना सामने आई है। इसने सरकार को सकते में तो डाला ही है वहीं देश भर पर भद पिटी है। इसी छवि को ठीक करने के लिए और डैमेज कंट्रोल के लिए दिलीप यादव को भी हटाया जा सकता है। इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है।

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क्यों यादव को नोटिस, सिसोनिया को हटाया

इस मामले में एससीएस संजय दुबे की रिपोर्ट अहम रही। सीएम ने उन्हें इंदौर में एक दिन निरीक्षण के लिए भेजा था। इस रिपोर्ट के बाद ही सीएम ने यादव और रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस देने के आदेश दिए। साथ ही सिसोनिया को हटाया भी गया। कारण है कि इस भागीरथपुरा से गंदे पानी की शिकायत नई नहीं थी।

यह शिकायतें दो महीने से आ रही थी लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया और शिकायतों को फोर्स क्लोजर करते रहे। जब पानी ज्यादा दूषित हुआ तो फिर 15 दिन पहले लोग बीमार होने लगे। उल्टी-दस्त की शिकायतें बढ़ गई लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद अचानक सोमवार 29 दिसंबर को मामला बिगड़ गया। 34 लोग अस्पतालों में भर्ती हुए जो तीन दिन में ही 294 पर पहुंच गई। 

इस घटना में 1400 से ज्यादा प्रभवित हुए। लापरवाही के चलते पूरे एरिया में हैजा फैल गया। वहीं यहां की लाइन बदलने के लिए जो टेंडर 2.40 करोड़ का हो गया था, उसकी फाइल दबाकर रखी गई। अगस्त से टेंडर ओपन नहीं किए गए। जब मामला खुला तो ताबड़तोड़ फिर सोमवार 29 दिसंबर को ही फाइल की याद आई और टेंडर ओपन हुए। 

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राहुल गांधी, उमा, महापौर के बयान ने बढ़ाया दबाव

इस पूरे मामले में पहले इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का बयान सामने आया कि- इस तरह से मैं काम नहीं कर सकता हूं, अधिकारी सुनते नहीं है। मेरे महापौर होने का फिर क्या मतलब है। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता हूं, आप (एसीएस संजय दुबे) मुख्यमंत्री तक यह संदेश पहुंचा दीजिए। 

  • इसके बाद पूर्व सीएम उमा भारती का तीखा बयान सामने आया और उन्होंने कहा कि- इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?  ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!
  • उमा भारती यहीं नहीं थमी, उन्होंने यह भी कहा कि- सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं मप्र के शासन, प्रशासन इस महापाप के सभी जिम्मेदार लोग जनता के प्रति अपराध के कठघरे में खड़े हैं। 

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फिर राहुल गांधी ने किया तीखा हमला

इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना को लेकर बीजेपी की डबल इंजन की सरकार को आडे़ हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं। ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी। 

सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की - फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं - ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। 

इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है। कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।

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हैजा (Cholera) के मुख्य लक्षण 

एक गंभीर जलजनित संक्रमण रोग है, जो दूषित पानी/खाद्य सामग्री से फैलता है।
मुख्य लक्षण: तेज़ दस्त, उल्टी, निर्जलीकरण।
बिना इलाज के मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

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