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INDORE. इंदौर भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुए कांड के चलते 13 लोगों की मौत की खबर आ चुकी है। अस्पतालों में अभी 192 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 26 आईसीयू में हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव के इंदौर आने से पहले ही दो अधिकारियों को सस्पेंड करने और एक की सेवाएं खत्म करने का आदेश हो चुका था।
साथ ही आईएएस की अध्यक्षता में जांच कमेटी भी बन गई थी। हालांकि, अब पूरे कांड को ठंडा करने की ओर तेजी से काम हो रहा है। बड़ों को बचाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो एक-दो छोटों पर और कार्रवाई की जाएगी।
यह जांच कमेटी और एसीएस संजय दुबे की रिपोर्ट के बाद तय होगा। बाकी इंदौर को दो-तीन अधिकारी और दिए जा सकते हैं, जिसके आदेश अब किसी भी समय हो सकते हैं। कुल मिलाकर जुदाई फिल्म में जो डायलॉग था जिसमें हर बात का जवाब एक ही था…. अब्बा, डब्बा, जब्बा। इसमें बड़ों पर कार्रवाई के नाम पर यही होने जा रहा है।
बैठक में महापौर को नहीं मिला कोई साथ
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सीएम मोहन यादव ने सभी अस्पतालों का दौरा करने के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज में ही बैठक की। बंद कमरे की बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, आईएएस नीरज मंडलोई और संजय दुबे, संभागायुक्त सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव मुख्य तौर पर मौजूद थे।
बैठक में कलेक्टर वर्मा और निगमायुक्त यादव ने घटना को लेकर सीएम को सबसे पहले विस्तार से जानकारी दी। इसमें बताया कि कैसे लीकेज हुए और क्या घटना हुई और उनके जरिए क्या कदम उठाए गए।
इस पर महापौर ने बात रखी और कहा कि अधिकारी सुनते नहीं हैं, गंदे पानी को लेकर लंबे समय से बात हो रही है। एरिया के टेंडर लंबे समय से रखे रहे हैं। इन्हें खोलकर वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुए। ऐसा हो जाता तो यह स्थिति नहीं होती।
फिर महापौर ने बिना नाम लिए कहा कि एक ही अधिकारी के पास सबसे ज्यादा काम है। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह समय आपस में उलझने का नहीं है। हमें अभी लोगों के स्वास्थ्य और हालत को देखना है।
सीएम ने फिर दखल दिया और कहा कि इतना बड़ा निगम है और जरूरत हो तो दो-तीन अधिकारी और हम जल्द दे देते हैं। यहां हम एसीएस संजय दुबे को छोड़कर जा रहे हैं। वह पूरी स्थिति देखकर रिपोर्ट देंगे। फिर आगे जो जरूरत होगी, वह कदम उठाए जाएंगे।
इसके अलावा बैठक में और कोई बात नहीं हुई और ना ही किसी अन्य नेता, अधिकारी ने कुछ कहा और बैठक खत्म हो गई।
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सबसे नजरें दो अधिकारियों पर
इस मामले में सीएम के आदेश पर जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले, सहायक यंत्री योगेश जोशी को सस्पेंड किया जा चुका है। साथ ही प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव की सेवाएं खत्म की गई हैं।
वहीं, इसमें बड़े अधिकारियों और जिम्मेदारों पर कोई आंच नहीं आई है। इसमें सबसे ज्यादा नजरें अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पर और कार्यपालन यंत्री जल प्रदाय संजीव श्रीवास्तव पर हैं। सिसोनिया पर आरोप है कि टेंडर होने के बाद भी उन्हें नहीं खोला है। इससे 2.4 करोड़ की लागत से डलने वाली लाइन का काम रुका रहा।
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इंदौर के अंगद अधिकारी संजीव श्रीवास्तव
वहीं इंदौर नगर निगम के अंगद अधिकारी कहे जाने वाले कार्यपालन यंत्री जल प्रदाय संजीव श्रीवास्तव पर भी उंगलियां उठ रही हैं। वह साल 2007-08 से ही पीएचई से यहां नगर निगम में पदस्थ हैं। उन्हें निगम में 17 साल करीब हो चुके हैं। कितने ही निगमायुक्त आए, वह वहीं के वहीं हैं।
बीच में तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह के समय ही तीन-चार माह उन्हें यहां से हटाया गया और ट्रेचिंग ग्राउंड किया था। वहीं, इसके बाद फिर उनकी वापसी इसी विभाग में हो गई और लगातार जारी है। इतने सालों में उन्हें इंदौर शहर की हर जल प्रदाय लाइन के बारे में जानकारी है। अब तो निगम में कहा जाता है कि निगमायुक्त कोई भी हो, लेकिन इस विभाग में तो संजीव श्रीवास्तव ही जरूरी हैं।
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एसीएस ने किया दौरा, ली बैठक
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उधर संजय दुबे एसीएस ने सीएम के आदेश के बाद गुरुवार, एक जनवरी को शहर में मोर्चा संभाला और सुबह से ही प्रभावित एरिया भागीरथपुरा का पूरा दौरा किया। इस दौरान उनके साथ निगमायुक्त व पार्षद कमल वाघेला भी थे।
खुद दुबे ने एक जगह पानी पीकर देखा, यह भी जांचा कि पानी से बदबू तो नहीं आ रही है। पूरे एरिया का उन्होंने सघन दौरा करने के साथ ही संजीवनी क्लिनिक में भी जाकर दौरा किया। यह जाना कि यहां कब से मरीज आ रहे थे और कितने मरीज आ रहे थे। निगमायुक्त और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी से जानकारी ली। फिर रेसीडेंसी में वह जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इन सभी की वह विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सीएम को देंगे।
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