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5 पॉइंट में पूरा मामला समझें...
- इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से फैले डायरिया के चलते अभी तक 15 की मौत हो चुकी है।
- स्थानीय खबरों में 15 मौतें बताई जा रही हैं। शासन ने आधिकारिक तौर पर केवल 4 मौतों की ही पुष्टि की है।
- अस्पताल में अभी भी 201 लोग भर्ती हैं, जिनमें से 32 मरीजों का इलाज ICU में चल रहा है।
- शासन ने जवाब दिया है कि स्थिति अब पूरी तरह अंडर कंट्रोल है।
- सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को रोकने के लिए मीडिया कंट्रोल की मांग की गई है।
INDORE- इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से फैले डायरिया के चलते अभी तक 15 की मौत हो चुकी है। 201 अभी भी अस्पताल में है जिसमें 32 आईसीयू में हैं। इन हालात के बीच शासन ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में शासन ने जवाब दिया है कि स्थिति अब पूरी तरह अंडर कंट्रोल है।
नए मरीज आने में कमी हो गई है और सभी सिस्टम तालमेल से काम कर रहे हैं। वहीं एक इंटरविनर याचिका में मीडिया कंट्रोल की मांग की गई है। अब सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
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चार की मौत को ही माना
वहीं हाईकोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में शासन ने चार ही मौत को माना है। इसमें उर्मिला, तारा, नंदलाल और हीरालाल की मौत को ही डायरिया के कारण मान्य किया गया है। बाकी मौतों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। वहीं बताया गया कि अभी तक 294 लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे इसमें से 93 ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं और 201 अभी भर्ती है। इसमें 32 आईसीयू में एडमिट है।
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मीडिया कंट्रोल के लिए लगी याचिका
वहीं परदेशीपुरा के व्यक्ति भगवान भराणे ने इंटरविनर बनकर याचिका दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल पेश हुए। उन्होंने मांग की है कि इस मामले को लेकर फेक न्यूज भी काफी आ रही है। इसमें अस्पतालों में दो हजार मरीज भर्ती होना बताया जा रहा है। रोज 10-15 मौत की बात की जा रही जो फर्जी है। सोशल मीडिया से भी फेक न्यूज प्रसारित हो रही है।
इन न्यूज पर कंट्रोल की जाए और सही अथेंटिक न्यूज ही प्रसारित हो इसके लिए निर्देश जारी किए जाएं। भराणे ने बताया कि उनके पिता भी इस घटना से प्रभावित होकर अस्पताल में भर्ती है। इन फेक न्यूज से हमारे परिवार और रहवासियों में डर है कि उनके साथ भी कुछ गलत हो सकता है। मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में इन्हें कंट्रोल किया जाए।
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शासन ने यह भी बातें स्टेटस रिपोर्ट में कहा-
वहीं शासन द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में अपनी पीठ जमकर थपथपाई है। इसमें कहा है कि डायरिया के केस आते ही तत्काल 29 दिसंबर से टीम सक्रिय हो गई थी। प्रशासन ने 30 दिसंबर को ही आदेश जारी कर दिए थे अस्पताल में कोई शुल्क नहीं लिया जाए।
सभी एरिया में 30 से ज्यादा टीम लगा दी थी जिसमें 100 से ज्यादा कर्मचारी थे। पानी के टैंकर से रोज वाटर सप्लाय की जा रही है। निगमायुक्त, अपर आयुक्त के साथ ही सभी अधिकारी खुद एसीएस ने भी मौके का दौरा किया। लगातार मॉनीटरिंग हो रही है और अधिकारी सतत दौरा कर रहे हैं। सभी को उपचार दिया जा रहा है। लीकेजा का कारण भी पुलिस चौकी के टवायलेट का पता लगाकर इसे ठीक किया गया है, बाकी लगातार जांच और मॉनीटरिंग हो रही है।
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इन्होंने लगाई है याचिकाएं
भागीरथ पूरा पानी कांड मामले में मामले में दो जनहित याचिका लगी है, एक इंटरविनर याचिका अधिवक्ता अभिनव धनोतकर द्वारा लगी है। एक हाई कोर्ट बार अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने दायर की है। वहीं दूसरी याचिका अधिवक्ता मनीष यादव, करण बैरागी के माध्यम से याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी के द्वारा दायर की गई है। इसमें दोषियों पर आपराधिक मुकदमाृ करने, पीड़ितों का निःशुल्क इलाज कराए जाने सहित विभिन्न मांगे की गई है।
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