न्याय दो या मार दो नारों के साथ फिर भड़का केन-बेतवा आंदोलन
समझें क्या है पूरा मामला
- केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों का चिता आंदोलन फिर शुरू हुआ।
- आदिवासी महिलाएं इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं।
- छतरपुर के कुपी गांव के पास बराना नदी पर प्रदर्शन जारी है।
- प्रशासन पर वादे न निभाने का आरोप लगा है।
- प्रभावितों ने न्याय न मिलने पर बड़ी चेतावनी दी है।
छतरपुर और पन्ना जिलों में कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय माध्यम, रूंझ और नैगुवा सिंचाई परियोजना शामिल हैं। इसके साथ एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) की परियोजना भी इसमें शामिल है। इन परियोजनाओं से प्रभावित लोगों का आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। लोगों का आरोप है कि उनके साथ अन्याय हुआ है। साथ ही प्रशासन ने उनसे झूठे वादे किए।
आंदोलन कहां और कैसे शुरू हुआ
यह आंदोलन शुक्रवार से फिर शुरू हुआ है। इसे चिता आंदोलन नाम दिया गया है। यह केन-बेतवा प्रभावित कुपी गांव के पास चल रहा है। प्रदर्शन केन नदी की सहायक नदी बराना पर हो रहा है। आंदोलन का नारा है, न्याय दो या मार दो। इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसका नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं। पहले भी अप्रैल में यह आंदोलन चला था। तब भी प्रशासन ने कई मांगें मानने का वादा किया था।
प्रशासन पर गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर इस आंदोलन के प्रमुख नेता हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन का रवैया भ्रष्ट और तानाशाही जैसा है। इस वजह से करीब 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं। इन लोगों से उनका जल, जंगल और जमीन छीन लिया गया। साथ ही उनकी आजीविका और संस्कृति भी प्रभावित हुई है। अमित भटनागर ने कहा कि यह सिर्फ विस्थापन नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी उजड़ने जैसा है।
पर्यावरण को भी बड़ा नुकसान
अमित भटनागर ने पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से करीब 46 लाख पेड़ प्रभावित होंगे। इसके अलावा पन्ना टाइगर रिजर्व को भी नुकसान पहुंचेगा। केन नदी के अस्तित्व पर भी खतरा बताया गया है। उनके मुताबिक यह नुकसान भरा नहीं जा सकता। यह सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए बड़ा पर्यावरणीय संकट है।
वादे पूरे न होने का आरोप
आंदोलन के अन्य नेताओं में दिव्य अहिरवार, चिता और लक्ष्मी आदिवासी शामिल हैं। इनका कहना है कि अप्रैल के आंदोलन के बाद कई वादे किए गए थे। लेकिन एक भी वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके उलट प्रभावितों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। कई लोगों को अवैध तरीके से बेदखल किया गया है। उनके घरों की बिजली भी काट दी गई। कुछ जगहों पर स्कूल तक तोड़े जाने की बात सामने आई है। नेताओं का कहना है कि इससे लोगों में डर का माहौल बनाया जा रहा है।
आदिवासी महिलाओं की दो टूक
इस आंदोलन (Ken-Betwa Link Project) में शामिल आदिवासी महिलाओं में बड़ी बहू आदिवासी भी हैं। इन महिलाओं का कहना है कि वे अब झूठे आश्वासनों में नहीं आएंगी। उनका (mp tribal community) कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। महिलाओं ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे बड़ा कदम उठाने को तैयार हैं। यह बयान दिखाता है कि प्रभावितों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी और अविश्वास है।
आगे क्या हो सकता है
यह आंदोलन (केन-बेतवा प्रोजेक्ट) एक बार फिर प्रशासन के लिए चुनौती बनकर सामने आया है। स्थानीय प्रशासन को अब प्रभावितों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना होगा। अगर मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। इस मामले में जिला प्रशासन (छतरपुर की खबरें) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह देखना जरूरी होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
FAQ
- सवाल: केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों का चिता आंदोलन क्या है और कहां चल रहा है?
जवाब: यह केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों का आंदोलन है। यह छतरपुर के कुपी गांव के पास बराना नदी पर चल रहा है। - सवाल: केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों के चिता आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जवाब: इस आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं, जिनमें बड़ी बहू आदिवासी भी शामिल हैं। - सवाल: केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों का प्रशासन पर क्या आरोप है?
जवाब: केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों का आरोप है कि प्रशासन ने पिछले वादे नहीं निभाए और उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज किए।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें...
केन-बेतवा लिंक परियोजना की मंजूरी पर सवाल, अधूरा पुनर्वास बना बड़ी वजह
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों को चार गुना मिलेगा मुआवजा
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट : प्रशासन के आश्वासन पर किसानों का उग्र आंदोलन 10 दिन के लिए टला
केन-बेतवा लिंक परियोजना: बुंदेलखंड के सैकड़ों गांवों की बुझेगी प्यास, सुधरेगा भूजल स्तर
केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफसरों के बंगले बचाने को बदल गया प्रोजेक्ट, 12 हजार करोड़ बढ़ी लागत