जस्टिस धूलिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी पड़ी भारी! HC बार अध्यक्ष पर भड़के CJI
News in Short
- जस्टिस धूलिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से CJI हुए नाराज।
- सुप्रीम कोर्ट में CJI ने पूछा-“क्यों ना धन्य कुमार जैन को भेज दें जेल?”।
- परितोष त्रिवेदी, ज्योति राय सहित वकीलों की याचिका खारिज।
- धन्य कुमार जैन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को की CJI और BCI अध्यक्ष की शिकायत।
- बार के अंदर ही अध्यक्ष धन्य कुमार जैन के खिलाफ विरोध तेज।
News in detail
एमपी स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद में जस्टिस धूलिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने आग में घी का काम किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने हाईकोर्ट बार अध्यक्ष जैन को जेल भेजने की चेतावनी के साथ याचिका खारिज कर दी। जिससे कई हाईकोर्ट के पदाधिकारी वकीलों का चुनाव लड़ने का सपना टूट गया।
जस्टिस धूलिया पर टिप्पणी से भड़का विवाद
एमपी स्टेट बार काउंसिल चुनाव को लेकर चल रहा विवाद और गंभीर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष जस्टिस धूलिया के खिलाफ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।
इस घटनाक्रम ने न सिर्फ मामले को संवेदनशील बना दिया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी इसका असर और चीफ जस्टिस सूर्यकांत की नाराजगी साफ दिखाई दी।
चीफ जस्टिस ने अधिवक्ताओं से कहा कि धन्य कुमार जैन की फेसबुक प्रोफाइल का लिंक दीजिए। क्योंकि धन्य कुमार जैन की फेसबुक प्रोफाइल पर ही वह प्रेस वार्ता लाइव की गई थी जिसमें कथित तौर पर धूलिया कमेटी पर आपत्तिजनक शब्द कहे गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में सख्ती, CJI के तीखे सवाल
हाईकोर्ट बार काउंसिल के पदाधिकारीयों को चुनाव लड़ने ना देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई की शुरुआत से ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सीधे सवाल किया कि “ये धन्य कुमार जैन कौन हैं?” और यह भी संकेत दिया कि इस तरह की याचिकाओं को भारी जुर्माने के साथ खारिज किया जा सकता है।
CJI ने सख्त मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित की गई कमेटी और अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस धूलिया के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। क्यों ना धन्य कुमार जैन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज तत्काल जेल भेज दिया जाए। पूरे मामले की सुनवाई के दौरान CJI की नाराजगी साफ नजर आई।
हाईकोर्ट बार अध्यक्ष ने लगाए थे आरोप
हाईकोर्ट बार के कई पदाधिकारी को चुनाव लड़ने से आयोग की घोषित करने के बाद बार के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने पत्रकार वार्ता आयोजित कीजिए। इसमें पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने धूलिया कमेटी पर बेईमान फर्जी और बिकाऊ होने के आरोप लगाए थे। एक्सप्रेस वार्ता का वीडियो उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल में भी डाला था। जिस पर CJI ने नाराजगी जताई है।
‘काले कोट का दुरुपयोग’- कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सख्त शब्दों में कहा कि वह उन लोगों के लिए दरवाजे नहीं खोल सकता जो अपने “काले कोट का दुरुपयोग” करते हैं और व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश करते हैं। बार-बार दलील देने के प्रयासों के बावजूद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और चुनाव याचिका के जरिए ही राहत लेने का रास्ता बताया।
नियमों की व्याख्या बना विवाद की जड़
दरअसल, यह पूरा विवाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नए नियमों से शुरू हुआ, जिसमें हाईकोर्ट बार और स्टेट बार में एक साथ पद पर रहने पर रोक लगाई गई। याचिकाकर्ताओं परितोष त्रिवेदी, ज्योति राय और अन्य का कहना था कि कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था या हलफनामा दिया था कि वे चुनाव जीतने के बाद पद छोड़ देंगे। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कई वकीलों का टूटा चुनावी सपना
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब कई हाईकोर्ट बार पदाधिकारियों का स्टेट बार चुनाव लड़ने का सपना टूट गया है। सूत्रों के अनुसार एक अधिवक्ता ने अपने साथियों के ग्रुप में भेजे एक भावनात्मक व्हाट्सएप मैसेज में कहा कि धन्य कुमार जैन की टिप्पणियों के कारण उनकी याचिका खारिज हो गई और अब वे चुनावी दौड़ से बाहर हो चुके हैं।
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को शिकायत, CJI पर लगाए गंभीर आरोप
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में उन्होंने बताया है कि बार के अन्य पदाधिकारी के द्वारा दायर की गई याचिका के बंच में उनका मामला था ही नहीं। उसके बाद भी CJI ने उनका नाम लेते हुए कोर्ट में टिप्पणियां की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हुई और नियमों का दुरुपयोग किया गया।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्हें आपराधिक अवमानना और जुर्माने की धमकी दी गई, जिसे उन्होंने न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
बार के अंदर ही विरोध, उठे लेटरहेड के इस्तेमाल पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के भीतर ही धन्य कुमार जैन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। हाईकोर्ट बार के ही सूत्रों ने बताया कि कई अधिवक्ताओं ने उनके रुख और बयानबाजी पर आपत्ति जताई है। खासकर राष्ट्रपति को भेजे गए शिकायत पत्र में बार के लेटरहेड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे कई सदस्य अनुचित मान रहे हैं।
टकराव बढ़ा, आगे और गरमाएगा मामला
एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और दूसरी ओर बार के भीतर ही विरोध बढ़ रहा है। यह पूरा मामला अब सिर्फ चुनावी विवाद नहीं रह गया है। जस्टिस धूलिया पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है।
ये खबरें भी पढ़ें...
ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 13 मई तक टली: जानें अब तक क्या-क्या हुआ
राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी को मिली जमानत, राजा के बड़े भाई विपिन ने की पुष्टि