कमर्शियल टैक्स के डिप्टी कमिश्नर पर लगे रेप आरोपों में बड़ा उलटफेर, हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा रद्द कर किया बरी
Neel Tiwari | Apr 28, 2026, 17:28 IST
Deputy Commissioner Acquitted in Rape Case
भोपाल के एक चर्चित बलात्कार मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदल दिया है। नोएडा कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर पंकज कुमार सिंह को एक महिला असिस्टेंट कमिश्नर से दुष्कर्म के आरोप में ट्रायल कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी।
News In Short
- डिप्टी कमिश्नर पर महिला असिस्टेंट कमिश्नर ने आरोप लगाए थे।
- भोपाल जिला अदालत ने सुनाई थी 10 साल की सजा और 12 हजार जुर्माना लगाया था।
- विशेष न्यायाधीश (ओएडब्ल्यू) पल्लवी द्विवेदी ने फैसला दिया था।
- हाईकोर्ट ने साक्ष्यों में विरोधाभास पाकर सजा रद्द की थी।
- हाईकोर्ट ने माना - संबंध सहमति पर आधारित थे।
News In Detail
महिला अधिकारी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद और रिश्तों का गलत इस्तेमाल करते हुए उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसने वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया और बार-बार उसके साथ रेप किया। इस मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों के कारण ये मामला खूब चर्चा में आया था।
क्या था पूरा घटनाक्रम, भोपाल कनेक्शन कैसे जुड़ा?
इसके बाद कई सालों तक शोषण का सिलसिला चलता रहा। अगस्त 2018 में जब महिला भोपाल एक स्कूल रीयूनियन कार्यक्रम में शामिल होने आई, तब आरोपी भी वहां पहुंच गया।
महिला का आरोप था कि आरोपी ने होटल के कमरे में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने एयरपोर्ट से भी उसे जबरन दूसरे होटल ले जाकर धमकी दी और मारपीट की। किसी तरह महिला आरोपी के चंगुल से बचकर पुलिस के पास पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला कानूनी तौर पर आगे बढ़ा।
ट्रायल कोर्ट ने दी थी 10 साल की सजा
इसके साथ ही अदालत ने उन पर कुल 12 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला था कि आरोपी ने उसके साथ गंभीर अपराध किया है, जिसके लिए कठोर दंड जरूरी है।
पंकज सिंह ने हाईकोर्ट में दायर की अपील
होटल कर्मचारियों ने अपने बयानों में कहा कि दोनों होटल में सामान्य तरीके से रह रहे थे और उनके व्यवहार में किसी तरह का तनाव या दबाव दिखाई नहीं दे रहा था। यह भी सामने आया कि होटल में रुकने के लिए रजिस्टर एंट्री जैसी फॉर्मेलिटी भी स्वयं महिला अधिकारी ने पूरी की थीं।
उसने आरोपी के साथ रहने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। इसके साथ ही वह लगातार आरोपों के साथ घूमती फिरती रही और एक ज्वेलर्स के यहां से मंगलसूत्र भी खरीदा था। इन परिस्थितियों ने कोर्ट को यह सोचने पर मजबूर किया कि घटनाक्रम में सहमति की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मेडिकल और जांच रिपोर्ट ने किए खुलासे
इसके अलावा जांच अधिकारी ने भी अदालत में यह माना कि दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे, जो सहमति पर आधारित प्रतीत होते हैं। इस तरह मेडिकल और जांच संबंधी तथ्यों ने भी अभियोजन के पक्ष को कमजोर किया।
पंकज सिंह का नंबर महिला के नाम से सेव किया था
हाईकोर्ट ने इस बात पर खास ध्यान दिया कि पीड़िता के बयानों में समय के साथ कई बदलाव आए और कुछ नई घटनाओं का जिक्र किया गया, जो पहले की शिकायत में नहीं थीं।
उसने यह भी माना कि जिस वीडियो के आधार पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया गया, उसे उसने कभी खुद नहीं देखा। इन सब हालात ने अदालत के सामने उसकी गवाही की सच्चाई पर सवाल खड़ा कर दिया।
तकनीकी साक्ष्य भी नहीं टिक पाए
अदालत ने माना कि जब साक्ष्य की प्रमाणिकता ही स्पष्ट नहीं है, तो उसे आधार बनाकर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इस कारण डिजिटल साक्ष्य भी अभियोजन के पक्ष में मजबूत भूमिका नहीं निभा सके।
केवल बयान के आधार पर नहीं हो सकता गंभीर मामलों में फैसला
इस मामले में पीड़िता की गवाही उस स्तर की नहीं पाई गई, जिसे बिना किसी संदेह के स्वीकार किया जा सके। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने भी सहमति के पहलू को मजबूत किया, जिससे अभियोजन की पूरी कहानी कमजोर पड़ गई।
अंतिम फैसला: सजा रद्द, आरोपी बरी
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि आरोपी ने कोई जुर्माना जमा किया है तो उसे वापस किया जाए। यह फैसला एक बार फिर यह दर्शाता है कि न्यायालय साक्ष्यों की कसौटी पर ही निर्णय करता है और यदि संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाता है।
ये खबरें भी पढ़ें....
कर्मचारी ने की चोरी, मालिक ने किया सैटलमेंट, जबलपुर हाईकोर्ट ने ठोका जुर्माना
जबलपुर हाईकोर्ट भ्रूण मामला: सुरक्षा में चूक पर 4 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी की बड़ी कार्रवाई
जबलपुर हाईकोर्ट के जज बने मद्रास हाईकोर्ट के CJ, एमपी हाईकोर्ट से अबतक 18 जज बने चीफ जस्टिस
भोपाल मेट्रो GM को झूठा हलफनामा पड़ा भारी, जबलपुर हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari