रैंकिंग चमकाने का खेल: सीएम हेल्पलाइन में पुलिस ने खुद ही करा दीं शिकायतें
समझें क्या है पूरा मामला...
- मऊगंज थाने ने सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग सुधारने को फर्जीवाड़ा किया है।
- 21 मोबाइल नंबरों से 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराई गईं।
- थाना प्रभारी के निजी ड्राइवर को 100 से अधिक मामलों में गवाह बनाया था।
- खुलासे के बाद थाना प्रभारी रीना सिंह को पद से हटा दिया गया है।
- एसडीओपी (Sub Divisional Officer of Police) को पूरी जांच सौंपी गई है।
CM हेल्पलाइन रैंकिंग के लिए रचा फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन (181) की रैंकिंग में ऊपर आने की होड़ ने एक चौंकाने वाले घोटाले को जन्म दिया है। मऊगंज जिले के थाने ने खुद ही फर्जी शिकायतों का पूरा तंत्र खड़ा कर लिया था। पुलिस ने महकमे के आरक्षकों, Dial-112 के कर्मियों और थाना प्रभारी के निजी ड्राइवर के 21 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराईं थी। कागजों पर इन्हें संतुष्टिपूर्वक निपटाया भी दिखाया गया।
इस फर्जीवाड़े की बदौलत मार्च 2026 की सरकारी रैंकिंग रिपोर्ट में मऊगंज जिला टॉप-5 में आ गया था। वहीं, जैसे ही असलियत सामने आई, पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
एक ही दिन में 5 शिकायतें, एक ही नाम से
23 मई 2026 को ड्राइवर दयाशंकर तिवारी के मोबाइल से रीता पांडे के नाम पर एक ही दिन में पांच शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इनमें घर में चोरी की FIR न दर्ज करने की शिकायत, एक्सीडेंट केस की डायरी कोर्ट में पेश न होने की शिकायत शामिल थीं।
साथ ही, छेड़खानी के आरोपी को पुलिस द्वारा न पकड़ने की शिकायत, बच्चे के गुम होने पर कार्रवाई न होने की शिकायत और पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट की सत्यापित प्रति न मिलने की शिकायत शामिल थीं। वहीं, तीन जून को इन सभी को सहमति दिखाकर बंद कर दिया गया था।
पॉकेट गवाह का खेल
इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू थाना प्रभारी के निजी ड्राइवर दयाशंकर तिवारी की भूमिका है। वह सिर्फ फर्जी शिकायत दर्ज कराने तक सीमित नहीं था। दयाशंकर तिवारी मऊगंज थाने के 100 से अधिक आपराधिक मामलों में स्थायी गवाह यानी पॉकेट विटनेस भी बना हुआ था।
26 सितंबर 2025 को एक ही दिन में मऊगंज थाने में दर्ज नौ अलग-अलग मामलों में दयाशंकर तिवारी को गवाह के रूप में दर्शाया गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी नौ मामले मऊगंज और उससे कई किलोमीटर दूर अलग-अलग गांवों में अवैध शराब की जब्ती से जुड़े थे। सभी मामलों में 20 क्वार्टर अवैध शराब जब्त होने का एक ही जैसा ब्यौरा दर्ज था।
ड्राइवर ने क्या कहा?
खुलासा होने पर ड्राइवर दयाशंकर तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि मैंने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत नहीं की थी। थाने में कोई मोबाइल फोन मांग लेते हैं, उस समय कुछ हुआ होगा। केसों में गवाह बनाए जाने की भी मुझे जानकारी नहीं है। उनका यह बयान खुद कई सवाल खड़े करता है।
पद से हटाई गई थानी प्रभारी
इस पूरे फर्जीवाड़े और सिंडिकेट के भंडाफोड़ होने के बाद मऊगंज थाना प्रभारी रीना सिंह को पद से हटा दिया गया है। आरक्षक विवेक यादव को लाइन अटैच किया गया है। थाने के वाहन चलाने वाले निजी ड्राइवर दयाशंकर तिवारी को भी हटा दिया गया है। एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि पूरे मामले की जांच एसडीओपी को सौंपी गई है। साथ ही, सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
FAQ
- CM हेल्पलाइन 181 क्या है?
CM हेल्पलाइन 181 मध्य प्रदेश सरकार की एक जनसुनवाई सेवा है। इसमें नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। - CM हेल्पलाइन में रैंकिंग का क्या मतलब है?
सरकार हर महीने CM हेल्पलाइन की जिलों और थानों की रैंकिंग जारी करती है। यह रैंकिंग इस आधार पर होती है कि कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और कितनी का समाधान किया गया। अच्छी रैंकिंग से अफसरों की छवि बेहतर होती है। इसी रैंकिंग को चमकाने के लिए मऊगंज थाने ने फर्जीवाड़ा किया। - पॉकेट विटनेस या पॉकेट गवाह क्या होता है?
पॉकेट विटनेस वह व्यक्ति होता है जिसे पुलिस बार-बार अलग-अलग मामलों में गवाह के रूप में इस्तेमाल करती है। यह एक अनैतिक और गैरकानूनी प्रथा है। ऐसे गवाह आमतौर पर पुलिस के करीबी होते हैं और उनकी गवाही अदालत में विश्वसनीय नहीं मानी जाती।
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