मऊगंज के नकली बागेश्वर की खुली पोल, रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर का बेटा लगा रहा अंधविश्वास का दरबार
Amresh Kushwaha | Apr 19, 2026, 10:39 IST
mauganj fake bageshwar superstition exposed lakshminarayan baba
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में एक शख्स दिव्य दरबार लगाकर कैंसर ठीक करने का दावा कर रहा था। यहां 500 रुपए में नाम दर्ज कर मंच से दिव्य ज्ञान का नाटक होता था।
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के बेलौही गांव में इन दिनों आस्था के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है। बागेश्वर धाम की नकल कर यहां दिव्य दरबार सजाया जा रहा है। यहां कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को झाड़-फूंक से ठीक करने का दावा किया जा रहा है।
इस चमत्कारी दरबार को संचालित करने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर राजेश्वरप्रसाद मिश्रा का बेटा लक्ष्मीनारायण बाबा है। जब इस दरबार की जमीनी हकीकत परखी गई, तो दावों की जो परतें उधड़ीं, वे चौंकाने वाली थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रीवा से लगभग 100 किलोमीटर दूर बेलौही गांव के खेतों में यह दरबार सजता है। पहुंचते ही चारों तरफ पोस्टर और माइक पर गूंजती बाबा की आवाज आपका स्वागत करती है। दरबार का नजारा किसी फिल्म जैसा लगता है- सैकड़ों लोग दरी पर हाथ जोड़े बैठे रहते हैं।
इनमें मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए लोग भी शामिल हैं। बाबा मंच पर एक छोटी लकड़ी की हनुमान प्रतिमा को विज्ञान धर्म सरकार बताकर स्थापित करता है और तथाकथित शक्तियों से संवाद करने का नाटक करता है।
बाबा का दावा है कि दरबार नि:शुल्क है, लेकिन पड़ताल में रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति व्यक्ति 500 रुपए वसूलने की बात सामने आई। दरबार में पहुंचे श्रद्धालु प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ने पुष्टि की कि उनसे पैसे लिए गए और नाम दर्ज किया गया।
दरअसल, यही वह सीक्रेट है जिससे बाबा को लोगों के नाम पहले ही पता चल जाते हैं। जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया या अपना नाम गुप्त रखा, उन्हें पूरे समय दरबार में बैठने के बावजूद मंच तक नहीं बुलाया जाता है।
बाबा के दावों को परखने के लिए तीन चुनौतियां रखीं, जिनमें वह पूरी तरह विफल रहा:
जांच में सामने आया कि बाबा हर मर्ज का इलाज काला जादू या प्रेत बाधा बताता है।
दरबार में बाबा के चमत्कार का ढिंढोरा पीटने वाले मुद्रिका प्रसाद मिश्र असल में बाबा के परिवार के ही सदस्य निकले। वहीं, विकास चतुर्वेदी नाम का शख्स भीड़ के बीच रहकर लोगों की समस्याएं जुटाता है और बाबा तक पहुंचाता है। भीड़ प्रबंधन का जिम्मा शिव प्रसाद शुक्ला संभालता है। यह पूरी एक टीम है जो योजनाबद्ध तरीके से इस अंधविश्वास को फलने-फूलने में मदद कर रही है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यत्नेश त्रिपाठी का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी का इलाज भभूत से करने का दावा जानलेवा हो सकता है। यह विशुद्ध रूप से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। वहीं, कथावाचक कृष्णकांत शास्त्री ने कहा कि जिन्हें श्लोकों का ज्ञान नहीं, वे सनातन धर्म की आड़ में केवल भ्रम फैला रहे हैं।
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इस चमत्कारी दरबार को संचालित करने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर राजेश्वरप्रसाद मिश्रा का बेटा लक्ष्मीनारायण बाबा है। जब इस दरबार की जमीनी हकीकत परखी गई, तो दावों की जो परतें उधड़ीं, वे चौंकाने वाली थीं।
खुले आसमान के नीचे अंधविश्वास का शोर
इनमें मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए लोग भी शामिल हैं। बाबा मंच पर एक छोटी लकड़ी की हनुमान प्रतिमा को विज्ञान धर्म सरकार बताकर स्थापित करता है और तथाकथित शक्तियों से संवाद करने का नाटक करता है।
पर्ची का खेल और 500 रुपए का राज
दरअसल, यही वह सीक्रेट है जिससे बाबा को लोगों के नाम पहले ही पता चल जाते हैं। जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया या अपना नाम गुप्त रखा, उन्हें पूरे समय दरबार में बैठने के बावजूद मंच तक नहीं बुलाया जाता है।
तीन रियलिटी चेक और बाबा पस्त
- समस्या कुछ, समाधान कुछ: एक बुजुर्ग को मंच पर भेजा गया। बाबा ने उन्हें सिरदर्द और ऊपरी साया बताया, जबकि बुजुर्ग ने साफ कहा कि वह अपनी आर्थिक तंगी (Financial Issue) लेकर आए हैं। पकड़े जाने पर बाबा ने बुजुर्ग पर ही झूठ बोलने का आरोप लगा दिया।
- अजनबी पर चुप्पी: एक बाहरी व्यक्ति ब्रजभान साहू, जिसे बाबा या टीम में से कोई नहीं जानता था, उसे मंच पर भेजा गया। बाबा ने सामूहिक अर्जी का बहाना बनाकर उसे टाल दिया और कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाए।
- आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव: खुद को शास्त्रों का ज्ञाता बताने वाले बाबा से जब गोपी गीत या नवधा भक्ति के श्लोक पूछे गए, तो वह बहाने बनाने लगा। उसे भागवत के स्कंधों और श्लोकों की संख्या तक का सही ज्ञान नहीं था।
प्रेत बाधा का रेडमेड पैटर्न
- बुजुर्ग: इन्हें पेट और शरीर दर्द बताकर डराया जाता है।
- महिलाएं: इन्हें कमर दर्द और जादू-टोने का डर दिखाया जाता है।
- बच्चे: पढ़ाई में मन न लगने का कारण किसी का किया-कराया बताया जाता है। यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जाता है ताकि लोगों के मन में डर पैदा कर उन्हें बांधा जा सके।
परिवार और सहयोगियों की मैनेजमेंट टीम
विशेषज्ञों और धर्माचार्यों की चेतावनी
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