ऐतिहासिक जनगणना की तैयारी: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए पारदर्शिता और संवेदनशीलता के मंत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस बार की जनगणना सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि इतिहास रचने का अवसर है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित जनगणना कॉन्फ्रेंस में सीएम ने कहा कि कोविड के कारण देरी हुई, लेकिन अब यह प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी, सटीक और निष्पक्ष होगी। खास बात यह है कि 1931 के बाद पहली बार सामाजिक स्तर की ऐसी व्यापक जनगणना हो रही है।
प्रदेश भर से पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
इस राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों से प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। बैठक में संभागायुक्त, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, जिला जनगणना अधिकारी, संयुक्त एवं उप संचालक (सांख्यिकी), तहसील स्तर के नामित जनगणना प्रभारी अधिकारी, नगरीय निकायों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राज्य स्तर पर सामान्य प्रशासन विभाग, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग तथा गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।
क्यों खास है यह जनगणना?
मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही यह देश की आठवीं जनगणना हो, लेकिन कई मायनों में यह अब तक की सबसे अलग और महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे प्रशासनिक ही नहीं सामाजिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी बताया। यह देश की आठवीं जनगणना है लेकिन स्वरूप और दायरे में सबसे अलग है। कोविड काल के कारण पहले संभव नहीं हो पाई थी। 1931 के बाद सामाजिक स्तर की ऐसी जनगणना पहली बार होगी।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जनगणना के आंकड़ों के कई अर्थ निकाले जाएंगे। इसलिए हर स्तर पर स्पष्टता और निष्पक्षता अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण हो चुका है, अब प्रतिबद्धता दिखाने का समय है। उनका संदेश साफ था कि कोई भी त्रुटि भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
विकास के साथ संवेदनशीलता जरूरी
सीएम ने विकास कार्यों को लेकर भी अहम बात कही। उन्होंने कहा कि यदि किसी का मकान, जमीन या दुकान प्रभावित होती है तो केवल मुआवजा ही नहीं बल्कि उसके भावनात्मक जुड़ाव को भी समझना जरूरी है। विकास की रफ्तार बनी रहे लेकिन मानवीय संवेदनाएं भी सुरक्षित रहें। यही प्रशासन की असली परीक्षा है।
त्योहारों पर प्रशासन अलर्ट मोड में
आगामी होली और महाशिवरात्रि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आदर्श होली ऐसी हो जिससे किसी को कष्ट न हो और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत हो। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दक्षता और सौहार्द के उदाहरण पेश करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
किसान कल्याण वर्ष: खेती पर फोकस
राज्य सरकार ने इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न आए।
कृषि से जुड़े प्रमुख निर्देश
नरवाई जलाने की समस्या को शून्य तक लाने का प्रयास।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के जरिए जागरूकता बढ़ाना।
दलहन और तिलहन उत्पादन में ठोस वृद्धि की रणनीति।
ऐतिहासिक जिम्मेदारी, सामूहिक संकल्प मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनगणना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की नीति निर्माण की नींव है। सटीक आंकड़े ही बेहतर योजनाओं का आधार बनेंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इसे एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने का अवसर समझें और पूरी निष्ठा से जिम्मेदारी निभाएं।
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