सीएम मोहन यादव ने अचानक बदला शेड्यूल, खरीदी केंद्र पहुंचकर खुद देखी हकीकत
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 30 अप्रैल की सुबह सबको चौंका दिया। हुआ ये कि उनका कार्यक्रम तो पहले से तय था, लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर उसे बदल दिया। सुबह जब उन्हें महेश्वर के जलूद हेलीपैड जाना था, तो वहां जाने के बजाय उनका काफिला अचानक बड़वाह रोड की तरफ मुड़ गया और वे सीधे कतरगांव के गेहूं उपार्जन केंद्र जा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने किसानों से भी बात की।
सीएम ने पोस्ट कर दी जानकारी
इसके बाद सोशल मीडिया परसीएम ने लिखा कि आज खरगोन प्रवास के दौरान कतरगांव में गेहूं उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। यहां स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की अन्य व्यवस्थाओं और किसानों को ओटीपी के माध्यम से किए जा रहे भुगतान की जानकारी प्राप्त की। किसानों से चर्चा कर फीडबैक भी लिया।
उपार्जन के लिए आ रहे किसानों के लिए पानी, छांव आदि सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रत्येक अन्नदाता को सम्मान, सुविधा एवं उपज का उचित मूल्य दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई तक बढ़ी
इससे पहले सीएम मोहन यादव ने 29 अप्रैल को सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देते हुए बताया था कि अब स्लॉट बुकिंग और गेहूं उपार्जन की अवधि 09 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी गई है। यानी जिन किसानों को अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया था, उन्हें अब अतिरिक्त समय मिलेगा।
सरकार ने व्यवस्था सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर भी बदलाव किए हैं। अब हर उपार्जन केंद्र पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर जिलों में इसे और बढ़ाया जा सकता है, ताकि किसानों को लंबी कतारों और देरी से राहत मिल सके।
सबसे बड़ा बदलाव स्लॉट बुकिंग की क्षमता में किया गया है। पहले एक केंद्र पर रोजाना 1000 क्विंटल गेहूं की बुकिंग होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। जिलों को जरूरत के अनुसार इसे 3000 क्विंटल तक बढ़ाने की छूट भी दी गई है। इससे खरीदी की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
दूसरी बार बढ़ाई तारीख
गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरी बार है जब सरकार को तारीख बढ़ानी पड़ी है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई की थी। इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे, जिसके चलते अब फिर से अवधि बढ़ानी पड़ी।
स्लॉट बुकिंग में किसान परेशान
इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी पूरी तरह अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आई। स्लॉट नहीं मिलना, तौल में देरी जैसी समस्याओं ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी थी। कई किसान अपनी फसल बेचने के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
The Sootr बना किसानों का सारथी
The Sootr की खबरों ने असर दिखाया। किसानों की इस समस्या को The Sootr ने पुरजोर तरीके से उठाया और लगातार दिखाया कि जमीनी स्तर पर हालात कितने खराब हैं। इसके बाद सरकार हरकत में आई और पहले तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई की गई।
इसके बावजूद दिक्कतें खत्म नहीं हुईं तो The Sootr ने फिर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। अब उसी का असर है कि सरकार को दूसरी बार फैसला बदलना पड़ा और तारीख 23 मई तक बढ़ानी पड़ी, साथ ही क्षमता भी बढ़ानी पड़ी।
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