अधूरे प्रमोशन पर CM का आभार प्रदर्शन, सरकार को अधूरी तस्वीर दिखाने की तैयारी?
ऐसे समझें पूरा मामला
- प्रमोशन की दो सूचियां अभी बाकी हैं।
- डिप्टी रेंजर से रेंजर पदोन्नति अटकी।
- 24 अगस्त को CM के सामने कार्यक्रम।
- एपीसीसीएफ समन्वय अजय यादव ने ड्रेस में पहुंचने का पत्र भेजा।
- अधूरी प्रक्रिया में जल्दबाजी पर सवाल उठे।
प्रमोशन बाकी, आभार प्रदर्शन की तैयारी
एमपी वन विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने पदोन्नत कर्मचारियों का आभार प्रदर्शन कराने की तैयारी तेज हो गई है।
विभाग की ओर से जारी पत्र में 24 अगस्त को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या, नाम और निर्धारित गणवेश तक तय कर दिया गया है। सवाल यही है कि जब प्रमोशन की प्रक्रिया अभी बाकी है तो सरकार के सामने उपलब्धि का प्रदर्शन इतनी जल्दी क्यों?
विभाग का अपना पत्र ही बना सवाल
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-2) अजय कुमार यादव के द्वारा जारी किए गए आदेश में सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों को कार्यक्रम के लिए पदोन्नत कर्मचारियों की सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग के मुताबिक भोपाल से 200, नर्मदापुरम, सागर, इंदौर और उज्जैन से 50-50 तथा अन्य 11 वनवृत्तों से 10-10 पदोन्नत कर्मचारी कार्यक्रम में शामिल होंगे। यानी कार्यक्रम के लिए चयन और संख्या तक पहले ही तय कर दी गई है।
24 अगस्त को मुख्यमंत्री के सामने कार्यक्रम
आदेश में कहा गया है कि 24 अगस्त को सुबह 9 बजे भारतीय वन प्रबंध संस्थान (IFM), नेहरू नगर, भोपाल में कार्यक्रम होगा। संबंधित कर्मचारियों को निर्धारित गणवेश में पहुंचना होगा।
अन्य वनवृत्तों से आने वाले कर्मचारियों को 23 अगस्त की रात तक भोपाल पहुंचने के निर्देश हैं। हर वनवृत्त से दो कर्मचारियों को मुख्यमंत्री के हाथों आभार प्रदर्शन पत्र दिलाने की व्यवस्था भी की गई है।
लेकिन प्रमोशन की दो लिस्ट अभी बाकी
यहीं से पूरे आयोजन पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। वन बल प्रमुख (HoFF) शुभ रंजन सेन से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी दो और पदोन्नति सूचियां निकलनी हैं और प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है।
यानी विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
खासकर डिप्टी रेंजर से रेंजर बनने वाले करीब 1000 से 1200 कर्मचारियों की पदोन्नति का प्रस्ताव लंबित बताए जाने से सवाल और गंभीर हो जाता है।
फिर मुख्यमंत्री के सामने इतनी जल्दबाजी क्यों?
अगर शासन स्तर पर पदोन्नति की प्रक्रिया अभी जारी है, तो मुख्यमंत्री के सामने आभार प्रदर्शन की तैयारी को लेकर जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? क्या विभाग मुख्यमंत्री को अधूरी तस्वीर दिखाने जा रहा है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और इसकी मॉनिटरिंग पर जोर दिया था। इसके बावजूद एक अहम कैडर की पदोन्नति प्रक्रिया अभी लंबित है।
एपीसीसीएफ समन्वय अजय यादव की भूमिका पर सवाल
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अजय कुमार यादव के द्वारा जारी किया गया आदेश सामने आया है। इसमें कर्मचारियों की संख्या से लेकर गणवेश और उपस्थिति तक के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले में अजय यादव से प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनकी ओर से प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम की जल्दबाजी को लेकर उठ रहे सवालों का आधिकारिक जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
सरकार की छवि पर भी पड़ सकता है असर
आभार प्रदर्शन सामान्य कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन जब उसी विभाग में पदोन्नति की एक बड़ी प्रक्रिया अभी लंबित हो, तब अधूरे परिणाम को लेकर मुख्यमंत्री के सामने आयोजन सवाल पैदा करता है।
ऐसे में सवाल सिर्फ वन विभाग की कार्यप्रणाली का नहीं, बल्कि सरकार के सामने विभागीय उपलब्धियां पेश करने की प्रक्रिया का भी है। यदि सभी पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ अभी नहीं मिला है, तो आभार प्रदर्शन को पूरी उपलब्धि के रूप में पेश करना सरकार की छवि के लिए उल्टा पड़ सकता है।
पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों की संख्या और लंबित प्रस्ताव से जुड़ा अंतिम आधिकारिक आंकड़ा शासन स्तर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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