स्वामित्व योजना: हरदा में 10 ग्रामीणों को मिला जमीन का मालिकाना हक, सीएम मोहन यादव ने सौंपी रजिस्ट्री

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 10, 2026, 15:01 IST
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बांटे रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 अक्टूबर को हरदा जिले में स्वामित्व योजना के तहत 10 हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र सौंपे। गोंदागांव के निर्भयदास और भैयालाल को भी प्रमाण-पत्र मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक और कानूनी सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने कलेक्टर को भू-स्वामित्व रजिस्ट्री का काम तेज करने के निर्देश दिए।

गोंदागांव हरदा के हितग्राही

हरदा जिले के गोंदागांव में मुख्यमंत्री ने गांव के निवासी निर्भयदास और भैयालाल सहित कुल 10 हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र सौंपे। जमीन के कानूनी दस्तावेज मिलने पर लाभार्थियों ने खुशी जताई और सरकार की पहल की सराहना की। इन प्रमाण-पत्रों से ग्रामीणों के पास अपनी जमीन पर हक साबित करने के लिए कानूनी दस्तावेज होंगे। यानी अब उनकी जमीन पर उनका हक कागजों में भी दर्ज हो गया है।



स्वामित्व योजना का मकसद क्या

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना का मकसद बताया। उन्होंने कहा कि सरकार हर पात्र ग्रामीण को भूमि का अधिकार दिलाना चाहती है। स्वामित्व योजना यानी Swamitva Yojana से ग्रामीणों को कानूनी सुरक्षा मिल रही है।



मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्रामीण आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र मिलने से संपत्ति का मूल्य बढ़ने की संभावना है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेना भी आसान होगा। वैध दस्तावेज होने से ग्रामीण अपनी संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे।



बैंक लोन और निर्माण में सहूलियत

प्रमाण-पत्र पाने वाले हितग्राहियों ने भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक मालिकाना हक मिलने से बैंक लोन लेना आसान हो सकता है। आम तौर पर बैंक लोन देते समय संपत्ति के वैध दस्तावेज देखते हैं। इसलिए यह बात ग्रामीणों के लिए अहम है।



हितग्राही अपनी भूमि पर निर्माण और अन्य जरूरी काम निश्चिंत होकर कर सकेंगे। उन्होंने योजना को ग्रामीणों के लिए उपयोगी बताया। साथ ही राज्य सरकार के प्रति आभार जताया।



कलेक्टर और पटवारियों को क्या निर्देश मिले

कलेक्टर जिले के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। पटवारी गांव के जमीन रिकॉर्ड संभालने वाले कर्मचारी होते हैं। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को भू-स्वामित्व रजिस्ट्री के काम में तेजी लाने को कहा। यानी land registry की रफ्तार बढ़ाने पर जोर रहा। उन्होंने पटवारियों को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी देने के लिए कहा। साथ ही शासकीय कार्यों में अनावश्यक बाधा न आने देने पर जोर दिया।



क्या नए सिरे से तय होगा मालिकाना हक

मुख्यमंत्री ने इस सवाल पर स्थिति साफ की। उनके मुताबिक रजिस्ट्री अधिकार अभिलेख में पहले से दर्ज जानकारी के आधार पर होगी। यानी किसी का स्वामित्व नए सिरे से तय नहीं किया जा रहा। नई जानकारी भी तैयार नहीं की जा रही। यानी रिकॉर्ड में जो पहले से दर्ज है, वही कागज पर आएगा।



सरकार का उद्देश्य पात्र ग्रामीणों को भूमि के अधिकारों का दस्तावेज देना है। यह काम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा। इस खबर में योजना के कुल हितग्राहियों का आंकड़ा नहीं दिया गया है। फिलहाल 10 हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र मिलने की जानकारी सामने आई है। मालिकाना हक पाने वाले ये ग्रामीण अब दस्तावेज के साथ आगे बढ़ सकेंगे।



यह खबर क्यों जरूरी है

गांव की जमीन पर बसे परिवारों के लिए कानूनी कागज सबसे बड़ी सुरक्षा होता है। रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र मिलने से बैंक लोन और निर्माण जैसे काम आसान हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेना भी सरल हो सकता है। इसलिए हरदा का यह कार्यक्रम दूसरे गांवों के लिए भी मायने रखता है। हालांकि इस खबर में कुल हितग्राहियों का आंकड़ा नहीं है। अभी सिर्फ 10 हितग्राहियों की जानकारी सामने आई है।



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