कॉकरोच जनता पार्टी सवाल पर सिंधिया-खंडेलवाल ने साधी चुप्पी, लेकिन सियासी चर्चा तेज
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी अचानक एक नया राजनीतिक कीवर्ड बन चुकी है। स्थिति यह है कि भाजपा के बड़े नेताओं से लेकर विपक्ष तक, हर कोई इस नाम पर प्रतिक्रिया देने को मजबूर दिखाई दे रहा है। शिवपुरी में भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में भी यही देखने को मिला।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सवाल पूछा गया। दोनों नेताओं ने संतुलित और बचाव वाले अंदाज में जवाब दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नया राजनीतिक प्रयोग कितना सफल होगा, भविष्य तय करेगा। फिलहाल इसने राजनीतिक बहस के केंद्र में अपनी जगह बना ली है।
अचानक छाया कॉकरोच सवाल
भारतीय जनता पार्टी ने शिवपुरी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के तहत बड़ा संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को संगठन, विचारधारा और बूथ स्तर तक मजबूती पर प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम खत्म होते ही मीडिया का फोकस बदल गया। पत्रकारों ने सीधे कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सवाल पूछे। यहीं से माहौल थोड़ा असहज नजर आया।
मोदी विजन पर शिफ्ट किया फोकस
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मुद्दे पर सीधी प्रतिक्रिया से बचा। उन्होंने बातचीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की तरफ मोड़ा। सिंधिया ने कहा कि जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ मजबूती से खड़ी है। सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के मंथन का जिक्र किया। भाजपा का पूरा संगठन इसी लक्ष्य को लेकर काम कर रहा है। सिंधिया ने “कॉकरोच जनता पार्टी” शब्द पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
खंडेलवाल ने सोशल मीडिया राजनीति को बताया क्षणिक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सीधे टकराव से बचते हुए सोशल मीडिया और जमीनी राजनीति का फर्क बताया। कई बार कोई मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाता है और कुछ दिनों तक चर्चा में रहता है। उसका असर लंबे समय तक कायम नहीं रहता। खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल वर्षों से जनता के बीच काम कर रहे हैं। राजनीति में वही संगठन टिकते हैं जिनकी पकड़ जमीन पर मजबूत होती है। किसी वायरल ट्रेंड की तुलना लंबे समय से स्थापित राजनीतिक दलों से नहीं की जा सकती।
क्या बीजेपी ओवर रिएक्ट से बच रही है?
राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ी चर्चा यही है कि भाजपा इस मुद्दे पर आक्रामक जवाब देने के बजाय नियंत्रित प्रतिक्रिया क्यों दे रही है। इसके पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहती। आक्रामक प्रतिक्रिया से नया नैरेटिव और बड़ा हो सकता है। सोशल मीडिया ट्रेंड को जमीन पर वैधता मिलने का खतरा है। विपक्ष को नया राजनीतिक हथियार मिलने की आशंका भी है। इसलिए शीर्ष नेतृत्व फिलहाल “लो-इंटेंसिटी रिस्पॉन्स” रणनीति पर चल रहा है।
बंद कमरे की बैठक ने भी बढ़ाई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया और हेमंत खंडेलवाल के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा भी हुई। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक माहौल को लेकर बातचीत की। दोनों नेताओं का साथ में नाश्ता करना और लंबी चर्चा करना भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया।
CJP क्यों बन गई है चर्चा का केंद्र?
राजनीति में कई बार कोई शब्द, नारा या प्रतीक अचानक चर्चा में आ जाता है। फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी भी उसी दौर से गुजर रही है। इसका वास्तविक राजनीतिक असर अभी साफ नहीं है। इतना तय है कि इसने भाजपा समेत सभी दलों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है। अब यह सिर्फ सोशल मीडिया मीम नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनती दिख रही है।
शिवपुरी भाजपा प्रशिक्षण शिविर में बड़ा राजनीतिक संदेश
सिंधिया और खंडेलवाल से कॉकरोच जनता पार्टी पर सवाल पूछा गया। दोनों नेताओं ने सीधे टकराव से बचते हुए संतुलित प्रतिक्रिया दी। सिंधिया ने मोदी विजन और विकसित भारत 2047 पर फोकस किया। खंडेलवाल ने सोशल मीडिया राजनीति को क्षणिक बताया। बंद कमरे की बैठक ने राजनीतिक चर्चा और बढ़ा दी।
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