कलेक्टर के पैरों में गिरने वाली मां-बेटी से CM बोले- हम तुम्हारे साथ, न्याय मिलेगा
समझें क्या है पूरा मामला
- कलेक्ट्रेट में पैरों में गिरकर गुहार लगाने वाली मां-बेटी पहुंचीं मुख्यमंत्री के पास।
- पुलिस ने सीएम से मिलने से रोकने की कोशिश की।
- रानी दुर्गावती बलिदान दिवस कार्यक्रम के दौरान हुआ मुलाकात का प्रयास।
- मुख्यमंत्री ने महिला के सिर पर हाथ रखकर दिलासा दिया।
- 1 लाख सहायता और भोपाल बुलाने की बात, न्याय का भरोसा।
कलेक्ट्रेट से शुरू हुई इंसाफ की कहानी
जबलपुर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में कुछ दिन पहले एक मां ने अपनी बेटी को लेकर ऐसा दर्द बयां किया था। इसने पूरे सिस्टम को हिला दिया था। महिला ने कलेक्टर के पैरों में गिरकर आंचल फैलाते हुए इंसाफ की भीख मांगी थी। लंबे समय से न्याय की उम्मीद में भटक रही यह मां-बेटी पुलिस और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटती रही। लेकिन राहत नहीं मिली।
कलेक्टर के बाद भी नहीं थमी गुहार
कलेक्ट्रेट से सिर्फ आश्वासन मिलने के बाद महिला ने हार नहीं मानी और सीधे प्रदेश के सीएम मोहन यादव तक अपनी बात पहुंचाने निकल पड़ी। रानी दुर्गावती बलिदान दिवस के मौके पर जब मुख्यमंत्री समाधि स्थल पहुंचे, तो पीड़ित महिला सुबह से वहां मौजूद थी। आरोप है कि सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने हिम्मत नहीं छोड़ी।
सीएम ने सुनी पूरी बात
महिला का आरोप है कि जब वह मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश कर रही थी, उस दौरान जबलपुर पुलिस उसे रोकने में लगी रही। इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें यह देखा जा सकता है कि पुलिस लगातार महिला को दूर करने की कोशिश कर रही है। यहां तक कि पुलिस अधीक्षक भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए। हालांकि, मुख्यमंत्री ने हालात को समझते हुए महिला को पास बुलाया और उसकी पूरी बात ध्यान से सुनी।
हम तुम्हारे साथ हैं, न्याय मिलेगा: सीएम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिला के सिर पर हाथ रखकर उसे भरोसा दिया कि उसे न्याय जरूर मिलेगा। इस दौरान उन्होंने 1 लाख की आर्थिक सहायता देने की बात भी कही। हालांकि महिला ने साफ कहा कि उसे सिर्फ इंसाफ चाहिए। मुख्यमंत्री ने उसे भोपाल आने और मामले की आगे जांच करा उसे न्याय दिलाने का आश्वासन भी दिया।
सिस्टम पर उठते सवाल
कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंची यह कहानी अब प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ न्याय की तलाश में भटकती मां और बेटी हैं, तो दूसरी तरफ लगातार चल रही जांच और कार्रवाई के दावे। अब देखना यह है कि यह दर्द आखिरकार न्याय में बदलता है या फिर एक और लंबी कानूनी लड़ाई बनकर रह जाता है।
क्या था पूरा मामला ?
पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए आवेदनों के अनुसार, 4 मार्च 2026 को होली के दौरान नाबालिग छात्रा के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की गई थी। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और बाद में उसे सड़क पर खींचकर निर्वस्त्र कर पीटने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वहीं 13 जून को एक बार फिर पड़ोसियों के साथ विवाद और मारपीट की घटना सामने आई।
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की जांच नहीं की गई और उन्हें आरोपियों से समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का दावा है कि लगातार प्रताड़ना और न्याय न मिलने से छात्रा मानसिक रूप से भी काफी परेशान रही है।
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