मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाने पर कांग्रेस में बवाल, क्रॉस वोटिंग की आशंका

Jitendra Shrivastava | Jun 05, 2026, 16:28 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के चयन पर कांग्रेस में विरोध शुरू हो गया है। दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने क्रॉस वोटिंग का खतरा बताया।

समझें पूरा मामला...

  • कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया।
  • दिग्गी समर्थक ने क्रॉस वोटिंग का खतरा बताया।
  • छिंदवाड़ा विधायकों ने हाईकमान का फैसला स्वीकारा।
  • BJP ने कांग्रेस की अंतर्कलह और गुटबाजी को घेरा।
  • कांग्रेस के लिए संख्याबल जुटाना बड़ी चुनौती बनी।

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) के लिए कांग्रेस (Congress) ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित किया है। इस फैसले के बाद पार्टी में विरोध शुरू हो गया है।



वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) का खतरा जताया है। एक तरफ विरोध है, दूसरी तरफ छिंदवाड़ा के विधायकों ने पार्टी के फैसले का समर्थन किया है।



कांग्रेस में बगावत की आहट

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से राज्यसभा उम्मीदवार (Rajya Sabha Candidate) के रूप में मीनाक्षी नटराजन का नाम आते ही पार्टी में हलचल मच गई। वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सीधे टैग किया। ज्ञानचंदानी का आरोप है कि उम्मीदवार चयन (Candidate Selection) में बड़ी चूक हुई है।



ज्ञानचंदानी का कहना है कि उन्होंने पहले भी नेतृत्व को सतर्क किया था। प्रदेश में क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) की आशंका पहले से बनी हुई है। उनके अनुसार, दिग्विजय सिंह की पकड़ विधायकों पर अधिक मजबूत है। मीनाक्षी नटराजन के नाम पर सभी नेताओं की सहमति नहीं बनी।



दिग्विजय सिंह का नाम क्यों था अहम

ज्ञानचंदानी ने दावा किया कि दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) को दोबारा उम्मीदवार बनाना अधिक सुरक्षित होता। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का विधायकों पर गहरा प्रभाव है। पार्टी की सीट बचाने के लिए यह जरूरी था। हालांकि, खुद दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा (Rajya Sabha) जाने से मना कर दिया था।



इसके बाद कमलनाथ (Kamal Nath) का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा था कि कमलनाथ को भेजना अधिक सुरक्षित होगा। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने मीनाक्षी नटराजन पर मुहर लगाई। इससे नई अटकलों का दौर शुरू हो गया।



छिंदवाड़ा विधायकों का समर्थन

छिंदवाड़ा (Chhindwara) जिले के कांग्रेस विधायकों ने पार्टी नेतृत्व का समर्थन किया। परासिया विधायक सोहन वाल्मीकि ने कहा कि सभी विधायक मीनाक्षी नटराजन को वोट देंगे। उन्होंने भोपाल में होने वाली विधायक दल की बैठक का भी जिक्र किया। इस बैठक में पूरे जिले के विधायक भाग लेंगे।



चौरई विधायक सुजीत चौधरी ने कांग्रेस की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं है। कमलनाथ के न आने से कार्यकर्ता निराश जरूर थे। लेकिन अब सभी नटराजन के समर्थन में हैं।



युवा नेतृत्व की रणनीति

वरिष्ठ पत्रकार राकेश प्रजापति ने इस चयन को युवा नेतृत्व (Youth Leadership) की रणनीति बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस नए चेहरों को आगे लाना चाहती है। मीनाक्षी नटराजन इसी रणनीति का हिस्सा हैं। यह पार्टी के नवीनीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।



हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि मतदान तक राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) होगी या नहीं, यह मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा। फिलहाल दोनों पक्षों की नजरें विधायक दल की बैठक पर हैं।



BJP ने कसा कांग्रेस पर तंज

भाजपा (BJP) ने कांग्रेस की इस आंतरिक कलह (Internal Dispute) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह नई बात नहीं है। कांग्रेस में गुटबाजी और अंतर्कलह हमेशा से रही है। जब अपने नेता ही सवाल उठाएं तो यह संगठन की दुर्दशा दर्शाता है।



संख्या बल का गणित

कांग्रेस के लिए संख्याबल (Numerical Strength) जुटाना असली चुनौती है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता जा चुकी है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान नहीं कर पाएंगे। बीना विधायक निर्मला सप्रे का रुझान अभी स्पष्ट नहीं है।



इन परिस्थितियों में कांग्रेस के लिए जीत सुनिश्चित करना कठिन है। छिंदवाड़ा से छह विधायक हैं जिनमें कमलनाथ भी शामिल हैं। उनकी भूमिका मतदान में अहम रहेगी। सभी की नजरें भोपाल बैठक और मतदान पर हैं।



क्रॉस वोटिंग की चिंता

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने चुनौती विधायकों को एकजुट रखना है। पार्टी को एक सीट जीतने के लिए 58 विधायक चाहिए, जबकि उनके पास 62 हैं। मामूली क्रॉस वोटिंग भी समीकरण बदल सकती है। ज्ञानचंदानी ने सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।



विधायकों की भोपाल में बैठक

कांग्रेस ने सभी विधायकों को भोपाल बुलाया है। शुक्रवार शाम 5 बजे प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक होगी। इसमें उपस्थिति अनिवार्य है और पार्टी लाइन से हटकर वोट न करने के निर्देश दिए जाएंगे।



बाड़ाबंदी की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा के लिए “बाड़ाबंदी” की योजना पर विचार कर रही है। बैठक के बाद उन्हें कर्नाटक, हिमाचल या तेलंगाना भेजने का फैसला हो सकता है, ताकि किसी तरह की राजनीतिक तोड़फोड़ रोकी जा सके।



नटराजन का समर्थन जुटाना

कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन भी भोपाल पहुंचकर बैठक में शामिल होंगी। वे विधायकों से मिलकर समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगी।



राज्यसभा चुनाव कैसे होता है

राज्यसभा (Rajya Sabha) में सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। जनता नहीं, बल्कि विधायक इन्हें वोट देते हैं। हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता।



कुल 245 सीटों में से 233 पर अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) होता है। 12 सीटों पर राष्ट्रपति मनोनयन (Presidential Nomination) करते हैं। प्रत्येक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। जीत के लिए जरूरी वोटों की गणना पहले से तय होती है।



FAQ

  1. मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार क्यों चुना गया?
    कांग्रेस आलाकमान ने मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से राज्यसभा उम्मीदवार (Rajya Sabha Candidate) चुना क्योंकि पार्टी युवा और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा जाने से मना कर दिया था, जबकि कमलनाथ के नाम पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। ऐसे में पार्टी ने नटराजन को चुनकर नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने का संदेश दिया।
  2. क्रॉस वोटिंग का मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव पर क्या असर हो सकता है?
    राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) में क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) का खतरा हमेशा बना रहता है क्योंकि यह चुनाव गुप्त मतदान से नहीं होता। विधायकों को अपनी पार्टी की व्हिप का पालन करना होता है, लेकिन कई बार दबाव या असंतोष के कारण वे पाला बदल सकते हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की संख्या पहले से कमजोर है और तीन विधायकों का समर्थन अनिश्चित है। इस कारण क्रॉस वोटिंग होने पर मीनाक्षी नटराजन की जीत मुश्किल हो सकती है।
  3. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोट चाहिए?
    राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) में जीत के लिए आवश्यक वोटों की संख्या एक निर्धारित फॉर्मूले से तय होती है। कुल विधानसभा सीटों की संख्या और खाली राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर यह गणना होती है। प्रत्येक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है। जिस उम्मीदवार को अपेक्षित कोटे से अधिक वोट मिलते हैं, वह निर्वाचित घोषित होता है। इस प्रक्रिया में संख्या बल (Numerical Strength) और दलीय एकजुटता का बड़ा महत्व होता है।

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