डेली कॉलेज में खेल: बाद में जुड़ी गाइडलाइन, दो फार्म खारिज, विक्रम पवार और खिलचीपुर निर्विरोध जीते
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला...
- चुनाव गाइडलाइन को लेकर विवाद बढ़ा।
- दो उम्मीदवारों के फार्म खारिज किए गए।
- बैकडेट में नियम जोड़ने के आरोप लगे।
- विक्रम पंवार और प्रियवत खिलचीपुर निर्विरोध जीते।
- चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए।
इंदौर डेली कॉलेज के चुनाव में लगातार विवाद चल रहे हैं और अब एक बड़ा खेल राज परिवार की कैटेगरी में हो गया। इसमें चार उम्मीदवार थे। लेकिन इसके पहले चुनाव संबंधी गाइडलाइन बैकडेट में जोड़ी गई। फिर इस गाइडलाइन के आधार पर ठाकुर नरेंद्र सिंह बिड़वाल और अनिरुद्ध सिंह के फॉर्म खारिज हो गए। इस तरह बाकी बचे दो सदस्य विक्रम सिंह पंवार और प्रियवत खिलचीपुर निर्विरोध आ गए।
डेली कॉलेज का चुनाव शुरू से विवादित रहा है और इसमें जमकर खेल होने के आरोप लगे हैं। अब इसमें दो मई को बड़ा खेल हो गया। आरोप लग रहे हैं कि चुनाव अधिकारी हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता ने 27 अप्रैल को वोटर लिस्ट व अन्य आपत्तियों का निराकरण करते हुए 21 पेज का ऑर्डर पारित किया था। लेकिन तब इस आदेश में चुनाव संबंधी गाइडलाइन के चार पन्ने नहीं थे।
बाद में इसमें नामांकन प्रक्रिया से लेकर वोटिंग करने के नियम व अन्य चुनावी प्रक्रिया जारी की गई। यह चार पन्ने नामांकन प्रक्रिया (29 अप्रैल को) पूरी होने के बाद 27 अप्रैल की ही तारीख में जोड़कर जारी कर दिए गए। इनके टाइपिंग फॉन्ट भी अलग हैं। द सूत्र के पास यह दोनों आदेश मौजूद हैं। इसके बाद बैकडेट में जोड़ी गई गाइडलाइन के आधार पर नामांकन प्रक्रिया में खामी बताते हुए दो फॉर्म खारिज कर दिए गए।
इस तरह बिड़वाल, दोत्ररिया के फॉर्म खारिज
राजा-रजवाड़ों के परिवार यानी फाउंडर मेंबर (टू बी वन) में चार सदस्यों के नामांकन फॉर्म थे। इस कैटेगरी से दो सदस्यों को चुना जाना है। इसमें फॉर्म की स्क्रूटनी चुनाव अधिकारी द्वारा दो मई को की गई और देर शाम आदेश जारी किया।
इसमें नामांकन प्रक्रिया के तीन नियमों का पालन नहीं करने पर ठाकुर नरेंद्र सिंह बिड़वाल और ठाकुर अनिरुद्ध सिंह दोत्ररिया के फॉर्म खारिज कर दिए गए। इसमें बताया गया कि इनके द्वारा खुद फॉर्म नहीं लिए गए और ना ही इनके अधिकृत व्यक्ति द्वारा यह फॉर्म लिए गए और ना ही जमा किए गए।
यह फॉर्म जय झाबुआ ने लिए, जो अपने पिता नरेंद्र सिंह झाबुआ के लिए फॉर्म लेने के लिए ही अधिकृत थे। नामांकन प्रक्रिया का पालन नहीं करने के चलते इनके फॉर्म रिजेक्ट किए जाते हैं। अनिरुद्ध सिंह के लगे आईडी में दो आईडी में लिखे नाम में आई और यू स्पेलिंग का अंतर भी चुनाव अधिकारी ने पाया और खारिज कर दिए।
विक्रम पंवार, प्रियवत का रास्ता साफ
दो फॉर्म निरस्त होने की आशंका सुबह से ही ओडीए के कई सदस्यों ने जाहिर की थी। वही सही साबित हुई और दो फॉर्म खारिज कर दिए गए। इसके बाद डेली बोर्ड में प्रेसीडेंट विक्रम सिंह पंवार एक बार फिर बोर्ड में निर्विरोध आएंगे। इसी तरह प्रियवत खिलचीपुर (यह अभी भी बोर्ड मेंबर हैं) का भी फॉर्म मंजूर हुआ और वह भी निर्विरोध आएंगे।
न्यू डोनर कैटेगरी में 6 सदस्य, इसी में चुनाव
उधर न्यू डोनर कैटेगरी से एक मेंबर को चुनकर आना है। यह कैटेगरी टू बी टू कहलाती है। इसमें करीब 700 मतदाता हैं। इसमें हरपाल सिंह उर्फ मोनू भाटिया का फॉर्म मंजूर हो गया। वहीं उनके भाई गुरमीत ने फॉर्म वापस ले लिया।
उधर ओडीए के सदस्य संदीप पारिख, नीरज देसाई, मानवीर सिंह बैस, राजेश अग्रवाल, जयेश पटेल के फॉर्म मंजूर हो गए हैं। कुल 6 सदस्यों के बीच में चुनाव होगा। वोटिंग 21 मई को सुबह 9 से 5 बजे तक होगी और फिर रात को ही रिजल्ट आएगा।
इसके पहले क्या हुआ चुनाव से पहले
डेली कॉलेज बोर्ड का कार्यकाल दिसंबर 2025 तक था। इसके बाद कार्यकाल आगे बढ़ाया गया और फिर संविधान संशोधन किया गया। संविधान संशोधन मंजूर होने से पहले 21 अप्रैल को चुनाव शेड्यूल जारी कर दिया गया। बाद में फर्म एंड सोसायटी ने 24 अप्रैल को नया संविधान मंजूर किया।
वोटर लिस्ट व अन्य प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां बुलाई गईं। इसका निराकरण चुनाव अधिकारी ने 27 अप्रैल को किया और 21 पेज का ऑर्डर अपलोड किया। इसमें संविधान संशोधन के पहले चुनाव शेड्यूल जारी होने को विधिक बताया और कहा कि शेड्यूल जारी हुआ था, चुनाव प्रक्रिया तो 24 अप्रैल से शुरू हुई, जब वोटर लिस्ट पर आपत्तियां बुलाई गईं।
इसमें बड़ी आपत्ति थी कि चुनाव शेड्यूल 90 दिन का होना था, लेकिन यह केवल 30 दिन में कराए जा रहे हैं। इसके बाद डेली कॉलेज संविधान व चुनाव को लेकर याचिकाएं लगीं, लेकिन स्टे नहीं मिला और सुनवाई 15 मई को लग गई। वहीं चुनाव अधिकारी ने सभी आपत्तियों का निराकरण कर 21 पेज का आदेश 27 अप्रैल को डेली कॉलेज की साइट पर अपलोड कर दिया।
इधर 28 व 29 अप्रैल को नामांकन प्रक्रिया हुई। कुल 11 आवेदन भरे गए। नाम वापस नहीं लिए गए। इसके बाद दो मई को फॉर्म की स्क्रूटनी हुई। आरोप है कि इसी दौरान वेबसाइट पर चुनाव अधिकारी के 27 अप्रैल को अपलोड हुए 21 पन्ने के आदेश को बढ़ाकर 25 पेज का कर दिया गया, वह भी 27 अप्रैल की बैकडेट में ही। इसमें नामांकन, वोटिंग, काउंटिंग सभी प्रक्रिया की गाइडलाइन बताई गई।
आपत्ति है कि यह नामांकन फॉर्म के समय ही जारी होना थी, लेकिन 28 अप्रैल के पहले इसे जारी नहीं किया गया और नामांकन प्रक्रिया होने के बाद इसे बैकडेट में अपलोड किया गया। फिर इसी आधार पर फॉर्म स्क्रूटनी कर नाम खारिज कर पंवार और खिलचीपुर को वॉकओवर दे दिया गया।
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