डेली कॉलेज को लेकर लगी चार याचिकाओं पर टली सुनवाई, उधर 21 मई को चुनाव
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला...
- डेली कॉलेज बोर्ड चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में पांच याचिकाएं लगी हैं।
- 12 मई को होने वाली सुनवाई टल गई।
- अब अगली संभावित तारीख 14 मई तय हुई है।
- 21 मई को चुनाव और रिजल्ट घोषित होना है।
- नए संविधान और चुनाव प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है।
इंदौर डेली कॉलेज बोर्ड के चुनाव को लेकर चल रहे विवाद के बीच सभी की नजरें मंगलवार को हाईकोर्ट पर थीं, लेकिन इस मामले में सुनवाई नहीं हुई और अगली तारीख 14 मई लगा दी गई है। इसके पहले 28 अप्रैल को सुनवाई हुई थी और इसमें पक्षकारों से जवाब मांगते हुए दो सप्ताह बाद की तारीख लगाई थी।
इन सभी की लगी हैं याचिकाएं
इसमें एक नई याचिका जय सिंह झाबुआ द्वारा लगाई गई है। वहीं डेली कॉलेज सोसायटी, विक्रम खंडेलवाल, संदीप पारिख की ओर से भी याचिकाएं लगी हैं। खंडेलवाल की ओर से दो याचिकाएं हैं। इस तरह कुल पांच याचिकाएं लिंक हैं। इन सभी में मुख्य रूप से फर्म एंड सोसायटी और डेली कॉलेज बोर्ड पक्षकार हैं।
उधर 21 मई को वोटिंग और रिजल्ट
इन याचिकाओं में मुख्य रूप से नए संविधान को लागू करने और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां ली गई हैं। इसमें डेली कॉलेज के पूर्व छात्र द्वारा चुनाव पर रोक की मांग की गई है।
बीती सुनवाई के दौरान चुनाव पर स्टे की मांग की गई थी, लेकिन इसमें डेली कॉलेज को जवाब देने के लिए समय दिया गया था और स्टे नहीं हुआ था। अब 14 मई की सुनवाई पर नजरें रहेंगी, क्योंकि चुनाव 21 मई को होना है और इसी दिन रिजल्ट भी जारी होगा।
एक पद के लिए मोनू Vs राजेश अग्रवाल
नए संविधान के मुताबिक टू बी वन (फाउंडर मेंबर) कैटेगरी से दो सदस्य और टू बी टू (न्यू डोनर) कैटेगरी से एक सदस्य का चुनाव होना तय है। फाउंडर मेंबर कैटेगरी में चार नामांकन थे, जिसमें दो खारिज हो गए। इसके चलते विक्रम पंवार और प्रियवत खिलचीपुर निर्विरोध चुने गए। वहीं न्यू डोनर कैटेगरी में चुनाव होना है, जिसमें केवल एक पद है।
इस पद के लिए बोर्ड के वर्तमान मेंबर हरपाल (मोनू) सिंह भाटिया हैं। वहीं विरोध का बिगुल बजा रहे नीरज देसाई, संदीप पारिख, राजेश अग्रवाल, जयेश पटेल और मनवीर सिंह बायस उम्मीदवार हैं। लेकिन विरोधी गुट ने एकजुट होकर राजेश अग्रवाल को अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। यानी चुनाव मोनू भाटिया और राजेश अग्रवाल के बीच ही है।
अब ओडीए में चुनाव नहीं
पुराने संविधान के मुताबिक पहले ओडीए (ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन) की टू सी कैटेगरी से भी दो सदस्यों का चुनाव होता था। लेकिन अब नए संविधान में सीधे चुनाव की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है।
अब प्रावधान है कि प्राथमिकता से ओडीए के प्रेसीडेंट और सचिव को बोर्ड में लिया जाएगा और एक सदस्य, जो पूर्व प्रतिष्ठित छात्र होगा, उसे लिया जाएगा। इस तरह ओडीए से तीन सदस्य बोर्ड में जाएंगे, लेकिन सीधे चुनाव की जगह अब चयन होगा। इसी बदलाव का सबसे ज्यादा विरोध भी किया जा रहा है।
ईओजीएम पर विवाद जारी
उधर 10 मई को हुई ईओजीएम को लेकर भी विवाद जारी है। एक गुट का कहना है कि यह ईओजीएम गलत है, क्योंकि इसके लिए 100 सदस्यों के लिखित हस्ताक्षर लगते हैं और एक तय राशि जमा कराना होती है। लेकिन वहीं प्रेसीडेंट पंकज बागड़िया ने कहा कि संविधान के तहत प्रेसीडेंट और सचिव को भी जरूरी मुद्दों पर ईओजीएम बुलाने का अधिकार है और यह इसी नियम के तहत बुलाई गई थी। इसे लेकर कोई विवाद नहीं है।
विक्रम और मोनू ने किया था दावा
इसके पहले डेली कॉलेज बोर्ड के प्रेसीडेंट विक्रम पंवार और बोर्ड मेंबर मोनू भाटिया ने ओडीए सचिव मयूर सिंह व अन्य 20-25 सदस्यों के साथ बैठक कर दावा किया था कि अब ओडीए का मुद्दा खत्म हो गया है।
सभी सहमत है कि ईओजीएम को आगे बढ़ा दिया जाएगा, लेकिन इसके बाद भी ईओजीएम तय समय पर हुई और फैसला लिया गया कि वह डेली कॉलेज बोर्ड के नए संविधान संसोधन से असहमत है, इसे मंजूर नहीं किया जाएगा। इससे ओडीए के सदस्यों का हित प्रभावित हो रहा है।
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