दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान, 30 जुलाई को वोटिंग, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे
दतिया सीट से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती जीते थे। अप्रैल 2026 में अदालत के एक फैसले के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद यह सीट खाली हो गई थी।
चुनाव प्रक्रिया 6 जुलाई 2026 से शुरू होगी। इस दिन राजपत्र में अधिसूचना जारी की जाएगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे।
नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी। उम्मीदवार 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा।
मतगणना 3 अगस्त को होगी। चुनाव आयोग के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
इसी साल 2 अप्रैल को कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी ठहराया गया था। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।
हालांकि, कोर्ट ने 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी थी। नियमों के मुताबिक, किसी विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर उसकी विधानसभा सदस्यता अपने आप खत्म हो जाती है।
इसी मामले में सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में कोर्ट ने उन्हें भी जमानत दे दी थी।
अदालत ने राजेंद्र भारती को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में दोषी माना था। इनमें आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 शामिल थीं।
राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे इस मामले को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।
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नरोत्तम मिश्रा बीजेपी से प्रबल दावेदार
दतिया विधानसभा सीट पर बीजेपी की ओर से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रहेगा। यह मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस की साख से जुड़ सकता है।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पिछली बार कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Datia news) को कड़े मुकाबले में हराया था। ऐसे में यह मुकाबला हार का हिसाब और जीत बचाने की रणनीति के बीच बदल सकता है।
भाजपा के लिए क्यों अहम है दतिया सीट?
दतिया लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां मिली हार भाजपा के लिए बड़ा झटका थी।
यही वजह है कि पार्टी अब इस सीट को पॉलिटिकल कमबैक के मौके के रूप में देख रही है। सूत्रों की मानें तो MP BJPइस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है और संगठन स्तर से लेकर बूथ रणनीति तक पर फोकस शुरू हो चुका है।
कांग्रेस भी बचाव की रणनीति में एक्टिव
दूसरी तरफ MP Congressभी दतिया सीट को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही। राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद बने हालात के बावजूद पार्टी स्थानीय नेटवर्क और सहानुभूति फैक्टर पर भरोसा कर सकती है। कांग्रेस की कोशिश होगी कि पिछले चुनाव की बढ़त को बरकरार रखा जाए और भाजपा की वापसी रणनीति को रोका जाए।
दतिया विधानसभा उप-चुनाव में क्या हो सकते हैं बड़े फैक्टर?
- नरोत्तम मिश्रा बनाम पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता।
- भाजपा के लिए खोई हुई सीट वापस लेने की चुनौती।
- कांग्रेस के लिए सीट बचाने की प्रतिष्ठा।
- संगठन बनाम स्थानीय समीकरण की लड़ाई।
- उपचुनाव के जरिए प्रदेश की राजनीति को नया संदेश।
दतिया के अलावा इन सीटों पर भी चुनाव
बिहार की बांकीपुर सीट- यहां से विधायक नितिन नबीन ने इस्तीफा दिया था।
गुजरात की मांजलपुर सीट- यहां के विधायक योगेशभाई नारनदास पटेल का निधन हो गया था। तीनों सीटों पर अब नए विधायक चुने जाएंगे।
ईवीएम-वीवीपैट का इस्तेमाल
इस उपचुनाव में भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (Electronic Voting Machine) का इस्तेमाल होगा। साथ में वीवीपैट (Voter Verified Paper Audit Trail) मशीनें भी लगेंगी। आयोग ने कहा कि सभी बूथों पर पर्याप्त मशीनें भेजी जा चुकी हैं। इससे मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगा।
आचार संहिता लागू
जिन जिलों में ये सीटें आती हैं, वहां आदर्श आचार संहिता तुरंत लागू हो गई है। इसका मतलब है कि सरकार अब कोई नई योजना का ऐलान नहीं कर सकती। सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं होगा। आयोग की टीमें हर गतिविधि पर नजर रखेंगी।
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