News Strike: राजेंद्र भारती पर फैसले से पहले बीजेपी में बढ़ा नरोत्तम मिश्रा का दबदबा?
Harish Divekar | Apr 15, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. राजेंद्र भारती की सजा और नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता से दतिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मिश्रा की वापसी की संभावना बढ़ रही है, बीजेपी में उनकी अहमियत बढ़ी है।
मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारों पर घर मत बसा लेना।
मैं समंदर हूं लौटकर वापस आउंगा।
News Strike:सलमान खान का डायलॉग टाइगर जिंदा है। मप्र की सियासत में जितना पॉपुलर रहा है। उतना ही पॉपुलर ये शेर भी है। गोया कि एक शेर यानी कि लॉयन प्रदेश की राजनीति में वापसी के लिए तैयार हो गया है। या ये भी कहा जा सकता है कि समंदर की वापसी की खातिर किसका बसा बसाया घर ही उजाड़ दिया गया है।
क्या आप हमारी इन गोलमोल बातों में उलझ कर रह गए हैं। चलिए हम आपको सीधे-सीधे बताते हैं। हम बात कर रहे हैं बीजेपी की एक हारे हुए नेता की। जिसे वापस लाने के लिए बीजेपी ने पूरी बिसात जमा ली है। ये नेता हैं नरोत्तम मिश्रा। अगर सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक हुआ तो...
नरोत्तम की बाइट का उतना हिस्सा- मैं समंदर हूं लौट कर जरूर आउंगा, लेकिन कांग्रेस ने भी बड़ा पैंतरा चल ही दिया है। तो अब आगे जो भी होगा बेहद दिलचस्प होगा।
नरोत्तम मिश्रा के नाम से आप समझ ही गए होंगे कि पूरा माजरा क्या है। हम बात कर रहे हैं दतिया विधानसभा सीट की। नरोत्तम मिश्रा की हार की और राजेंद्र भारती की। जो जीत कर भी हारते हुए नजर आ रहे हैं। वैसे अभी मैंने नरोत्तम मिश्रा का एक शेर आपको सुनवाया। अब एक और शेर सुन लीजिए।
नरोत्तम मिश्रा ने बिलकुल सही ही कहा था। उनके प्रतिद्वंद्वि राजेंद्र भारती ने दतिया में जीत हासिल जरूर की, लेकिन चर्चा नरोत्तम मिश्रा की हार की ही हुई और वो अब फिर हो रही है। चुनाव को बमुश्किल ढाई साल हुए हैं, लेकिन अब पासे पलटते नजर आ रहे हैं।
एक बार याद दिला दें कि राजेंद्र भारती ने साल 2023 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को सात हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इसके बाद सब ठीक चलता रहा, लेकिन कुछ दिन पहले फर्जी एफडी के एक पुराने मामले में राजेंद्र भारती को सजा सुनाई गई। जिसके बाद रातों रात विधानसभा की कार्यवाही की गई और उन्हें अमान्य घोषित कर दिया गया। जबकि राजेंद्र भारती खुद हाईकोर्ट की शरण में जा चुके हैं।
खुद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल नरोत्तम मिश्रा के घर पहुंचे। खबर है कि दोनों के बीच आधे घंटे तक क्लोज डोर मीटिंग चली। जिसे दतिया की चुनावी रणनीति से जोड़ कर ही देखा जा रहा है।
नरोत्तम मिश्रा करीब तीन बार दतिया से विधायक रह चुके हैं। 2018 का विधानसभा चुनाव भी वो हारते-हारते जीते थे, लेकिन 2023 में अपनी हार को जीत में नहीं बदल सके। उसके बाद से उन्हें लेकर कई तरह की खबरें आती रहीं।
प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम काफी जोर शोर से आगे आता रहा। कुछ यूं अटकलें भी सुनाई दीं कि पद न मिलने से नरोत्तम मिश्रा खफा चल रहे हैं, लेकिन ये सारी खबरें आई गई होती रहीं। असल उबाल तो अब आया है। जब नरोत्तम मिश्रा का कद फिर तेजी से बढ़ने लगा है। कांग्रेस भी इस सीट को बचाने की पूरी कोशिश में जुट गई है।
राजेंद्र भारती ने भी अपनी सीट बचाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 2024 में सेंट्रल मिनिस्टर के एक ओएसडी ने उनसे मुलाकात की थी और उन्हें सत्तर करोड़ रुपए का प्रलोभन दिया था।
भारती का दावा है कि उन्हें नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ लगाए केस वापस लेने और क्षतिपूर्ति के लिए ये प्रलोभन दिया गया था। साथ ही बीजेपी जॉइन करने और निगम मंडल का पद देने की बात भी कही गई थी।
बकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारती ने ये संगीन आरोप लगाए। इस दौरान वो थोड़ा भावुक भी हुए। कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग पर उन्होंने दिवंगत मां की छवि खराब करने और अपमानजनक बातें कहने के आरोप लगाए, उन्हें असहनीय भी बताया।
हालांकि, बीजेपी ने भारती के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया है। जिस दिन भारती को विधानसभा में अयोग्य घोषित किया गया था। हमने उसी दिन ये बता दिया था कि ये नरोत्तम की वापसी के संकेत है। आप न्यूज स्ट्राइक का वो खास एपिसोड देख सकते हैं।
नरोत्तम की सक्रियता और बढ़ता दबदबा हमारे एनालिसिस पर सटीकता की मोहर लगा रहा है। राजेंद्र भारती के अयोग्य होते ही नरोत्तम मिश्रा अपने क्षेत्र में एक्टिव हो चुके हैं। उन्होंने दतिया के कद्दावर और प्रतिष्ठित लोगों से मिलना जुलना शुरू कर दिया है।
बीजेपी के कोर ग्रुप में भी नरोत्तम मिश्रा की एंट्री हो चुकी है। वो जिस कोर ग्रुप का हिस्सा हैं। उसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, दोनों डिप्टी सीएम भी शामिल हैं। उनके बीच नरोत्तम को इस ग्रुप में जगह दी गई है।
ये कोर टीम यूसीसी, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेगा। नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते दबदबे को देखकर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनकी वापसी अब संगठन से लेकर सत्ता तक में तय हो चुकी है।
इसे देखकर यही सवाल पूछा जा सकता है कि बीजेपी के लिए नरोत्तम मिश्रा इतने जरूरी क्यों है। क्या इसलिए कि वो समय समय पर बीजेपी के संकट मोचक भी रहे हैं।
खासतौर से ज्यादा से ज्यादा कांग्रेसियों को तोड़ कर बीजेपी में लाने और विपक्षी दल को कमजोर करने में उनकी अहम भूमिका रही है। शिवराज सरकार में रहते हुए वो कई अहम विभागों में रह चुके हैं और सत्ता चलाना जानते हैं। क्या इसलिए अब उनका दबदबा दोबारा बढ़ रहा है।
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मैं समंदर हूं लौटकर वापस आउंगा।
News Strike:सलमान खान का डायलॉग टाइगर जिंदा है। मप्र की सियासत में जितना पॉपुलर रहा है। उतना ही पॉपुलर ये शेर भी है। गोया कि एक शेर यानी कि लॉयन प्रदेश की राजनीति में वापसी के लिए तैयार हो गया है। या ये भी कहा जा सकता है कि समंदर की वापसी की खातिर किसका बसा बसाया घर ही उजाड़ दिया गया है।
क्या आप हमारी इन गोलमोल बातों में उलझ कर रह गए हैं। चलिए हम आपको सीधे-सीधे बताते हैं। हम बात कर रहे हैं बीजेपी की एक हारे हुए नेता की। जिसे वापस लाने के लिए बीजेपी ने पूरी बिसात जमा ली है। ये नेता हैं नरोत्तम मिश्रा। अगर सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक हुआ तो...
नरोत्तम की बाइट का उतना हिस्सा- मैं समंदर हूं लौट कर जरूर आउंगा, लेकिन कांग्रेस ने भी बड़ा पैंतरा चल ही दिया है। तो अब आगे जो भी होगा बेहद दिलचस्प होगा।
नरोत्तम मिश्रा की हार और राजेंद्र भारती की चुप्पी
नरोत्तम मिश्रा- इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ए बेखबर
राजेंद्र भारती के हाथ से तेजी से सीट खिसक रही है और नरोत्तम मिश्रा का दबदबा बढ़ रहा है। हम एक बार फिर कहते हैं समंदर के पानी को किनारे तक लाने और घरों को उजाड़ने में पूरा पॉलिटिकल इकोसिस्टम लगा हुआ है। अपनी रही सही पूंजी को लगाने के लिए अब राजेंद्र भारती पूरा जोर लगा रहे हैं।
भारती की सजा और नरोत्तम की बढ़ती हलचल
ये कानूनी मामला अचानक सियासत का बड़ा केंद्र बन चुका है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को फैसला सुनाना तय किया है। यानी चंद घंटे बाद राजेंद्र भारती के सियासी भविष्य का हाल तय हो जाएगा। पर उससे पहले ही नरोत्तम मिश्रा को लेकर बीजेपी में सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं।
बीजेपी में नरोत्तम मिश्रा की सियासी हलचल
नरोत्तम मिश्रा करीब तीन बार दतिया से विधायक रह चुके हैं। 2018 का विधानसभा चुनाव भी वो हारते-हारते जीते थे, लेकिन 2023 में अपनी हार को जीत में नहीं बदल सके। उसके बाद से उन्हें लेकर कई तरह की खबरें आती रहीं।
प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम काफी जोर शोर से आगे आता रहा। कुछ यूं अटकलें भी सुनाई दीं कि पद न मिलने से नरोत्तम मिश्रा खफा चल रहे हैं, लेकिन ये सारी खबरें आई गई होती रहीं। असल उबाल तो अब आया है। जब नरोत्तम मिश्रा का कद फिर तेजी से बढ़ने लगा है। कांग्रेस भी इस सीट को बचाने की पूरी कोशिश में जुट गई है।
बीजेपी पर 70 करोड़ का प्रलोभन का आरोप!
भारती का दावा है कि उन्हें नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ लगाए केस वापस लेने और क्षतिपूर्ति के लिए ये प्रलोभन दिया गया था। साथ ही बीजेपी जॉइन करने और निगम मंडल का पद देने की बात भी कही गई थी।
बकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारती ने ये संगीन आरोप लगाए। इस दौरान वो थोड़ा भावुक भी हुए। कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग पर उन्होंने दिवंगत मां की छवि खराब करने और अपमानजनक बातें कहने के आरोप लगाए, उन्हें असहनीय भी बताया।
हालांकि, बीजेपी ने भारती के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया है। जिस दिन भारती को विधानसभा में अयोग्य घोषित किया गया था। हमने उसी दिन ये बता दिया था कि ये नरोत्तम की वापसी के संकेत है। आप न्यूज स्ट्राइक का वो खास एपिसोड देख सकते हैं।
नरोत्तम मिश्रा की सत्ता में वापसी का संकेत
बीजेपी के कोर ग्रुप में भी नरोत्तम मिश्रा की एंट्री हो चुकी है। वो जिस कोर ग्रुप का हिस्सा हैं। उसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, दोनों डिप्टी सीएम भी शामिल हैं। उनके बीच नरोत्तम को इस ग्रुप में जगह दी गई है।
ये कोर टीम यूसीसी, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेगा। नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते दबदबे को देखकर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनकी वापसी अब संगठन से लेकर सत्ता तक में तय हो चुकी है।
नरोत्तम मिश्रा: बीजेपी के संकट मोचक
खासतौर से ज्यादा से ज्यादा कांग्रेसियों को तोड़ कर बीजेपी में लाने और विपक्षी दल को कमजोर करने में उनकी अहम भूमिका रही है। शिवराज सरकार में रहते हुए वो कई अहम विभागों में रह चुके हैं और सत्ता चलाना जानते हैं। क्या इसलिए अब उनका दबदबा दोबारा बढ़ रहा है।
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