दतिया में मंच पर माला ने खोली BJP की टीस! क्या भीतरघात अभी भी जिंदा है?
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया में भाजपा के कार्यक्रम के दौरान असहजता दिखी।
- जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह के हावभाव चर्चा में रहे।
- प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने हस्तक्षेप किया।
- टिकट विवाद के बाद एकजुटता चुनौती बनी है।
- भीतरघात के खतरे पर सवाल उठ रहे हैं।
अंदरूनी खींचतान की चर्चा में
दतिया उपचुनाव में भाजपा भले ही एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही हो। लेकिन मंच पर हुई एक छोटी-सी घटना ने अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।
भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह कुशवाहा जब प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का स्वागत करने के लिए माला लेकर खड़े हुए तो घटनाक्रम अचानक बदल गया।
आशुतोष तिवारी ने वही माला जिलाध्यक्ष को ही पहना दी। इसके बाद मंच पर कुछ पल के लिए असहज स्थिति बनी और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह को हस्तक्षेप करते हुए कहना पड़ा माला तो पहनाइए। अब इस पूरे घटनाक्रम को दतिया की सियासत में एक नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
माला का घटनाक्रम बना चर्चा का केंद्र
दतिया में भाजपा के चुनावी अभियान कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारी मंच पर पहुंचे। स्वागत के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह कुशवाहा माला लेकर आगे बढ़े। उन्होंने आशुतोष तिवारी का स्वागत करना चाहा। आशुतोष तिवारी ने वही माला जिलाध्यक्ष के गले में डाल दी। इसके बाद जिलाध्यक्ष अपनी सीट की ओर लौट गए।
महेंद्र सिंह का इशारा और बदला माहौल
मंच पर बैठे प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की नजर पूरे घटनाक्रम पर थी। उन्होंने तुरंत संकेत देते हुए कहा कि माला प्रत्याशी को भी पहनाइए।
इसके बाद औपचारिकता तो पूरी हो गई, लेकिन मंच पर कुछ क्षणों की झिझक और चेहरे के भाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इसी संदेश पर टिक गई है।
क्या नाराजगी सिर्फ दबी है, खत्म नहीं हुई?
दतिया में टिकट बदलने के फैसले के बाद भाजपा के भीतर जो असंतोष सामने आया था, उसके बाद पार्टी लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। सार्वजनिक मंचों पर नेता साथ दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इस तरह के घटनाक्रम यह सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं कि क्या नाराजगी पूरी तरह खत्म हुई है या सिर्फ फिलहाल दबा दी गई है। यही वजह है कि दतिया उपचुनाव में भीतरघात की आशंकाओं पर राजनीतिक चर्चाएं अभी भी थमी नहीं हैं।
नरोत्तम के बदले सुर भी चर्चा में
दूसरी ओर, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी अब लगातार संगठन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। भोपाल और दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जिताने की अपील की है। उनके पुराने समंदर वाले बयान और मौजूदा नरम तेवरों की तुलना भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनी हुई है।
अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती
दतिया उपचुनाव अब केवल विपक्ष से मुकाबले का चुनाव नहीं रह गया है। असली चुनौती अपने संगठन को पूरी तरह एकजुट रखना है। मंच पर मुस्कुराहट दिख सकती है, लेकिन चुनाव में जीत उसी की होगी जो कार्यकर्ताओं के मन की टीस भी दूर कर पाए।
दतिया में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा संगठन इस अंदरूनी असंतोष को मतदान तक पूरी तरह खत्म कर पाएगा, या यह खामोशी चुनावी नतीजों में अपना असर दिखाएगी?
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