दतिया बवाल के बाद नरोत्तम मिश्रा को संगठन का संदेश, अब अपने समर्थकों से ही जिताओ चुनाव

Ramanand Tiwari | Jul 11, 2026, 23:23 IST
दतिया बवाल के बाद नरोत्तम को संगठन का संदेश
टिकट कटने के बाद हुए विरोध के बीच भाजपा संगठन ने नरोत्तम मिश्रा को संदेश दिया है। पार्टी ने साफ किया है कि अब विरोध खत्म कर दतिया में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की जीत के लिए काम करना होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भाजपा ने दतिया से आशुतोष तिवारी को टिकट दिया।
  • टिकट कटने पर नरोत्तम समर्थकों ने विरोध किया।
  • नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में नेताओं से मुलाकात की।
  • संगठन ने उन्हें कार्यकर्ताओं को संभालने की जिम्मेदारी दी।
  • अब भाजपा की नजर दतिया में बड़ी जीत पर है।

भाजपा के भीतर मचे बवाल

दतिया उपचुनाव में टिकट कटने के बाद भाजपा में शुरू हुआ विवाद अब नए दौर में पहुंच गया है। भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात के बाद पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा संगठन के साथ खड़े नजर आए। अब उनके सामने नाराज समर्थकों को मनाने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की जीत सुनिश्चित करने की चुनौती है।



क्या हैं इस पूरी कहानी के बड़े तथ्य?

  • दतिया उपचुनाव में भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया।
  • टिकट घोषित होते ही दतिया में विरोध प्रदर्शन, पथराव और चक्का जाम जैसी घटनाएं हुईं।
  • भाजपा संगठन ने नरोत्तम मिश्रा को भोपाल तलब किया।
  • मुख्यमंत्री, संगठन महामंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से उनकी लंबी चर्चा हुई।
  • मुलाकात के बाद नरोत्तम ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करने की बात कही।
  • अब संगठन ने आशुतोष तिवारी को बड़ी जीत दिलाने की जिम्मेदारी भी नरोत्तम मिश्रा पर डाल दी है।

भोपाल बुलावे के बाद बदले नरोत्तम के तेवर

दतिया में टिकट कटने के बाद शुक्रवार को नरोत्तम मिश्रा सार्वजनिक रूप से लगभग गायब रहे। लेकिन शनिवार को संगठन के बुलावे पर भोपाल पहुंचने के बाद उनका पूरा रुख बदला हुआ नजर आया। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है और जिस उम्मीदवार को टिकट मिला है, उसे जिताना उनकी जिम्मेदारी है।



संगठन का स्पष्ट संदेश- अनुशासन से बड़ा कुछ नहीं

भाजपा नेतृत्व ने साफ संकेत दिया कि संगठन के फैसले पर सार्वजनिक असहमति या कार्यकर्ताओं का उग्र विरोध पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में अब संगठन चाहता है कि दतिया में नाराज कार्यकर्ताओं को मनाकर चुनावी माहौल पूरी तरह भाजपा के पक्ष में किया जाए।



अब सबसे बड़ी चुनौती अपने ही समर्थकों को संभालने की

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि जिन कार्यकर्ताओं ने टिकट कटने के बाद विरोध किया, उन्हें शांत कराने की जिम्मेदारी भी अब नरोत्तम मिश्रा पर आ गई है। भाजपा संगठन चाहता है कि वही कार्यकर्ता, जिन्होंने विरोध किया, अब पूरी ताकत से आशुतोष तिवारी के लिए चुनाव प्रचार करें।



हेमंत खंडेलवाल ने भी दिया सख्त संकेत

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि दतिया से इस्तीफों की चर्चाएं जरूर सामने आई हैं, लेकिन किसी भी नेता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी का पूरा संगठन घोषित प्रत्याशी के साथ खड़ा है और सभी नेताओं को मिलकर चुनाव लड़ना होगा।



नरोत्तम की छवि पर भी उठे सवाल

दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि इससे नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक छवि को झटका लगा है। विरोध करने वाले अधिकांश लोग उनके समर्थक बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा यही होगी कि वे उन्हीं कार्यकर्ताओं को भाजपा के पक्ष में एकजुट कर पाते हैं या नहीं।



चुनाव के बाद भी रह सकती है संगठन की नजर

भाजपा सूत्रों के अनुसार संगठन केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। दतिया में चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर चुनाव के बाद भी समीक्षा हो सकती है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा के लिए यह दतिया उपचुनाव केवल भाजपा प्रत्याशी की जीत का नहीं, बल्कि अपनी संगठनात्मक स्वीकार्यता साबित करने का भी बड़ा अवसर माना जा रहा है।



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