दतिया उपचुनाव में नामांकन का महासंग्राम, शक्ति प्रदर्शन के बीच असली परीक्षा संगठन की

Ramanand Tiwari | Jul 12, 2026, 20:50 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. दतिया उपचुनाव में नामांकन के साथ असली सियासी लड़ाई शुरू होगी। सोमवार को भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों की मौजूदगी में शक्ति प्रदर्शन होगा।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • सोमवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रत्याशी भरेंगे नामांकन।
  • भाजपा के कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और डॉ. नरोत्तम मिश्रा रहेंगे मौजूद।
  • कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी दतिया पहुंच चुके हैं।
  • बसपा के चुनाव नहीं लड़ने से आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव को मिल सकता है लाभ।
  • समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया है।

दतिया उपचुनाव सोमवार को नए दौर में प्रवेश करेगा। नामांकन के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह अपना नामांकन दाखिल करेंगे। दोनों दल इसे सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बना रहे हैं। इस बीच भाजपा के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस बदले हुए राजनीतिक समीकरणों का फायदा उठाने की कोशिश में है।



नामांकन को बनाया शक्ति प्रदर्शन का मंच

भाजपा ने आशुतोष तिवारी के नामांकन को बड़ा राजनीतिक आयोजन बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी से पार्टी एकजुटता का संदेश देना चाहती है।



उधर कांग्रेस भी पीछे नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी पहले ही दतिया पहुंच चुके हैं और घनश्याम सिंह के नामांकन के जरिए कांग्रेस अपनी चुनावी ताकत दिखाने की तैयारी में है।



संगठन को साधना भाजपा के लिए चुनौती

आशुतोष तिवारी को टिकट मिलने के बाद भाजपा के भीतर जिस तरह असंतोष सामने आया, उसने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। चंबल अंचल में पहली बार पार्टी कार्यकर्ताओं का खुला विरोध देखने को मिला।



राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया के संगठन में अब भी बड़ी संख्या में डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थक सक्रिय हैं। मंडल, जिला और बूथ स्तर तक उनका प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पूरा संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा।



नरोत्तम की सक्रियता से डैमेज कंट्रोल की कोशिश

टिकट कटने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी बात रखी। अब पार्टी उन्हें आशुतोष तिवारी के नामांकन और चुनाव प्रचार में प्रमुख भूमिका देकर यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा में कोई अंदरूनी मतभेद नहीं है। हालांकि अंतिम फैसला मैदान में कार्यकर्ताओं की सक्रियता ही तय करेगी।



तीन उम्मीदवारों से बदले चुनावी समीकरण

दतिया का मुकाबला इस बार केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं दिख रहा। आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं।



बसपा के चुनाव से बाहर रहने के कारण दलित और पिछड़े वर्ग के वोटों का नया समीकरण बन सकता है, जिसका फायदा आजाद समाज पार्टी को मिलने की संभावना जताई जा रही है।



सपा ने कांग्रेस के पक्ष में खोले पत्ते

उत्तर प्रदेश से सटे दतिया में समाजवादी पार्टी ने इंडिया गठबंधन की रणनीति के अनुरूप अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को खुला समर्थन देने का फैसला किया है। इससे कांग्रेस को गठबंधन समर्थक वोटों का अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है।



अब निगाहें नामांकन के बाद की लड़ाई पर

नामांकन के साथ चुनावी शोर अपने चरम पर पहुंच जाएगा। भाजपा संगठन की एकजुटता साबित करना चाहेगी, जबकि कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल और गठबंधन के सहारे बढ़त बनाने की कोशिश करेगी।



दूसरी ओर आजाद समाज पार्टी भी वोटों के नए समीकरण के दम पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की तैयारी में है। ऐसे में दतिया उपचुनाव की असली तस्वीर अब प्रचार अभियान के दौरान साफ होगी।



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