दतिया उपचुनाव: अपने ही बने चुनौती? दोनों दलों में क्रॉस वोटिंग का डर, संगठन अलर्ट

Ramanand Tiwari | Jul 29, 2026, 09:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. सूत्रों का दावा- भाजपा और कांग्रेस दोनों में भीतरघात की आशंका है। नेताओं की गतिविधियों पर गोपनीय निगरानी रखी जा रही है। 3 अगस्त के नतीजों के बाद कार्रवाई हो सकती है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया उपचुनाव में भीतरघात की चर्चा तेज।
  • सूत्रों के मुताबिक दोनों दलों में क्रॉस वोटिंग की आशंका।
  • भाजपा और कांग्रेस दोनों ने निगरानी तंत्र सक्रिय किया।
  • भाजपा में करीब 200 सदस्य और 50 वरिष्ठ नेता फीडबैक जुटाने में लगे।
  • चुनाव के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की चर्चा।
  • 3 अगस्त के नतीजों पर सभी की नजर।

दतिया विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई नहीं रह गया है। चुनावी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा भीतरघात और 'क्रॉस वोटिंग' की है।



सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के कुछ पूर्व दिग्गज और प्रभावशाली नेता अपने समर्थकों से विरोधी दल के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की बात कह रहे हैं।



इसी आशंका के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने संगठन के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 3 अगस्त को मतदाता किस करवट बैठता है।



कैमरे पर खामोशी, अंदरखाने अलग चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, कोई भी नेता खुले कैमरे पर इस विषय में बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि, पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कुछ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने दावा किया है।



कार्यकर्ताओं को अपने ही वरिष्ठ नेताओं से विरोधी दल के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने के संकेत मिले हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन चुनावी माहौल में इस चर्चा ने राजनीतिक हलचल जरूर बढ़ा दी है।



सिर्फ भाजपा नहीं, कांग्रेस में भी वही हाल

सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति किसी एक दल तक सीमित नहीं है। चर्चा है कि भाजपा के कुछ पुराने प्रभावशाली नेता अपने समर्थकों को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की सलाह दे रहे हैं।



वहीं कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी भाजपा प्रत्याशी के समर्थन की अपील करने के आरोप लग रहे हैं। यही वजह है कि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बताई जा रही है।



संगठन ने बढ़ाई निगरानी

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने भीतरघात की आशंका को देखते हुए अपने-अपने संगठन के माध्यम से निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया है। भाजपा में करीब 200 संगठन पदाधिकारियों और लगभग 50 वरिष्ठ नेताओं को फीडबैक जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।



बताया जा रहा है कि कौन नेता चुनाव में सक्रिय रहा, कौन निष्क्रिय रहा और किसकी भूमिका संदिग्ध रही, इसकी गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है।



RSS भी जुटा रहा अलग फीडबैक

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपने स्तर पर चुनावी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि दतिया में लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं और संगठनात्मक स्तर पर अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



सबसे बड़ा सवाल

जब नेता ही अपने अधिकृत प्रत्याशी के बजाय दूसरे दल के उम्मीदवार की पैरवी करने की चर्चा में हों, तो कार्यकर्ता किसकी बात माने? यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो क्या दतिया का चुनाव जनता से ज्यादा दलों के अंदरूनी समीकरण तय करेंगे? इसका जवाब अब मतगणना के बाद ही मिलेगा।



दतिया का उपचुनाव इस बार केवल वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता की भी परीक्षा बन गया है। यदि 3 अगस्त के बाद भीतरघात के आरोप सही साबित होते हैं, तो दोनों दलों में बड़े संगठनात्मक फैसले और अनुशासनात्मक कार्रवाई देखने को मिल सकती है।



फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जीत विरोधी दल से मिलेगी या अपने ही लोगों की नाराजगी से हार तय होगी।



ये खबरें भी पढ़ें...



दतिया उपचुनाव: आज शाम 5 बजे थमेगा प्रचार का शोर, भाजपा-कांग्रेस ने झोंकी ताकत



दतिया उपचुनाव में बढ़ा सियासी दांव: अब बयान नहीं, निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर टिकी नजर



दतिया उपचुनाव: एक सीट नहीं, 2028 की सेमीफाइनल जंग! दिग्गजों की साख लगी दांव पर



दतिया उपचुनाव में गरजे सीएम मोहन यादव, बोले-अपने कर्मों से कमजोर हुई कांग्रेस



दतिया उपचुनाव में लास्ट 96 आवर्स गेम: जीत मंच से नहीं, बूथ की जंग से तय होगी!



Tags:
  • कांग्रेस
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  • क्रॉस वोटिंग
  • विधानसभा उपचुनाव
  • भाजपा
  • दतिया उपचुनाव
  • भीतरघात