जातिवाद और छुआछूत हिंदू समाज पर कलंक, घर से खत्म करें: दत्तात्रेय होसबाले
समझें क्या है पूरा मामला
- दत्तात्रेय होसबाले ने भोपाल में स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
- होसबाले ने जातिवाद को हिंदू समाज पर कलंक बताया।
- होसबाले ने छुआछूत समाप्त करने की जरूरत बताई।
- दत्तात्रेय ने समाज सेवा में सभी की भागीदारी जरूरी बताई।
- कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित हुआ।
RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भोपाल में बड़ा बयान दिया। उन्होंने जातिवाद और छुआछूत को हिंदू समाज पर कलंक बताया। होसबाले ने कहा कि समाज सेवा सिर्फ स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने संगठन की ताकत और देशभक्ति के महत्व पर भी बात की। लाल परेड ग्राउंड में यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के तहत हुआ।
भोपाल में बड़ा आयोजन
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में रविवार को स्वयंसेवक एकत्रीकरण हुआ। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के तहत रखा गया था। इसमें RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले शामिल हुए। उन्होंने समाज और राष्ट्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बात रखी।
जातिवाद पर तीखी बात
होसबाले ने कहा कि जाति के नाम पर होने वाला दुर्व्यवहार समाज को कमजोर करता है। उन्होंने इसे हिंदू समाज पर कलंक बताया। उनके मुताबिक इसे सिर्फ कानून या उपदेश से खत्म नहीं किया जा सकता। इसकी शुरुआत हर व्यक्ति को अपने घर से करनी होगी।
जातिभेद न करने का संकल्प लें
होसबाले ने लोगों से जातिभेद न करने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि छुआछूत का नाम-निशान नहीं रहना चाहिए। समाज के सामने आने वाले सवाल किसी एक वर्ग के नहीं हैं। जाति, पंथ और भाषा के आधार पर बंटना संगठन को कमजोर करता है।
होसबाले ने संगठन की अहमियत समझाने के लिए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चार उंगलियां अलग-अलग कमजोर होती हैं। लेकिन मुट्ठी बनने पर उनमें ताकत आ जाती है। समाज को भी इसी तरह मिलकर काम करना होगा।
देशभक्ति सिर्फ 26 जनवरी का भाव नहीं
होसबाले ने कहा कि देशभक्ति सिर्फ 26 जनवरी का भाव नहीं है। यह 24 घंटे जीने वाला भाव होना चाहिए। हर नागरिक को अपने गांव और मोहल्ले के लिए सोचना चाहिए। उन्होंने रोज़ एक घंटा समाज सेवा में देने की बात कही।
प्रस्ताव पारित करने से पर्यावरण नहीं बचेगा
होसबाले ने कहा कि सिर्फ प्रस्ताव पारित करने से पर्यावरण नहीं बचेगा। घर, स्कूल और बाजार में सबको जागरूक रहना होगा। पौधे लगाने के साथ ऊर्जा बचाना भी जरूरी है। नदियों को स्वच्छ रखना भी सबकी जिम्मेदारी है।
संकट के समय हर व्यक्ति को करनी चाहिए
होसबाले ने असम बाढ़ राहत कार्य का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस बार आम लोग और छात्र भी आगे आए। सिर्फ संघ के स्वयंसेवक ही सेवा करें, ऐसा नहीं होना चाहिए। संकट के समय हर व्यक्ति को मदद के लिए आना चाहिए।
भारत की लंबी यात्रा
होसबाले ने भारत की 5 हजार साल की सभ्यता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश हर संकट के बाद फिर उठ खड़ा हुआ। उनके मुताबिक समस्या आना बड़ी बात नहीं है। समाज में उसका सामना करने की ताकत होनी चाहिए।
कर्तव्य और भविष्य की राह
होसबाले ने कहा कि नागरिकों को डर से नहीं, कर्तव्य समझकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ का मकसद समाज को संगठित करना है। भारत दुनिया की सेवा के लिए आगे बढ़ेगा, दबदबे के लिए नहीं। भौतिक सुख और आध्यात्मिक शांति का संतुलन ही असली मॉडल है।
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