देवकीनंदन के बेटे की ट्रोलिंग पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, बोले- बेटा चुन सकता है पिता का पेशा
समझें क्या है पूरा मामला
- देवकीनंदन ठाकुर के बेटे देवांश ट्रोलिंग का शिकार हुए।
- धीरेंद्र शास्त्री ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी।
- शास्त्री ने कहा, बेटे पिता का पेशा चुन सकते हैं।
- शास्त्री ने हिंदू समाज से एकजुट रहने की अपील की।
- देवकीनंदन ठाकुर ने भी ट्रोलिंग पर नाराजगी जताई थी।
शास्त्री बोले, कथा पसंद नहीं तो मत जाइए
बागेश्वर धाम सरकार ने साफ कहा कि यदि किसी को कोई कथा पसंद नहीं, तो वह वहां न जाए। लेकिन संतों और कथावाचकों का सार्वजनिक उपहास नहीं होना चाहिए, यह उन्होंने जोर देकर कहा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय अपने धर्मगुरुओं का उपहास नहीं उड़ाता। इसलिए हिंदुओं को भी अपने संतों का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि अपने ही मंदिरों और मठों पर लगातार आक्षेप करना सनातन समाज को कमजोर करता है।
हिंदू एकजुटता पर जोर
कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज से आपसी मतभेद भुलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हिंदू ही हिंदुओं का विरोध कर रहे हैं। उनका संदेश साफ था कि सनातन के सम्मान के लिए एकजुटता जरूरी है। धीरेंद्र शास्त्री ने बातें तिरुपति बालाजी में तीन दिवसीय कथा के दौरान कही।
देवांश की भागवत कथा से शुरू हुआ विवाद
देवकीनंदन ठाकुर की तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटे का नाम देवांश है। वे फिलहाल दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। बहुत कम उम्र से ही देवांश ने वैदिक ग्रंथों और भागवत कथा का अध्ययन शुरू कर दिया था।
कुछ समय पहले गुजरात के सोमनाथ में एक धार्मिक कार्यक्रम हुआ। वहां देवांश ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भागवत पाठ किया। इस दौरान का एक वीडियो सामने आया, जिसमें देवकीनंदन ऊंचे मंच पर बैठे नजर आए। पास ही सफेद सोफे पर देवांश भजन करते दिखे।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे सनातन परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की विरासत बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे धार्मिक क्षेत्र में बढ़ते परिवारवाद से जोड़ा। इसी बहस के बीच देवांश को ट्रोल किया जाने लगा।
देवकीनंदन ठाकुर का भी आया जवाब
इस पूरे विवाद पर देवकीनंदन ठाकुर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस बात पर ट्रोल किया जा रहा है। क्या धर्म कोई धंधा है, यह भी उन्होंने पूछा। उन्होंने बताया कि हर माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार देते हैं, वे भी वही कर रहे हैं।
उनके मुताबिक बेटा अभी सिर्फ 14 साल का है और आज तक उसके पास मोबाइल तक नहीं है। बचपन से मंदिर और सत्संग ले जाने से बच्चा दूसरों का सम्मान करना सीखता है, यह उनका मानना है।
FAQ
- धीरेंद्र शास्त्री ने क्या बयान दिया?
शास्त्री ने कहा कि कथावाचक का बेटा कथावाचक बने तो आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संतों के उपहास का विरोध किया। साथ ही हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की। - देवकीनंदन ठाकुर ने ट्रोलिंग पर क्या कहा?
ठाकुर ने कहा कि बेटे को संस्कार देना गलत नहीं है। उनका बेटा अभी 14 साल का है और मोबाइल भी नहीं रखता। हर माता-पिता की तरह वे भी अच्छे संस्कार दे रहे हैं।
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