सनातन बोर्ड होता तो नहीं होती चोरी, राम मंदिर चंदा विवाद पर बोले देवकीनंदन ठाकुर
Aman Vaishnav | Jun 18, 2026, 10:10 IST
देवकीनंदन ठाकुर
राजधानी भेपाल में कथा करने आए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर चंदा विवाद पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन बोर्ड बनना चाहिए। अगर सनातन बोर्ड होता तो चोरी नहीं होती।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अयोध्या श्रीराम मंदिर में करोड़ों रुपए के चंदे की चोरी का मामला चर्चा में है।
- इस पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने बयान दिया है।
- कथावाचक ने कहा कि अगर सनातन बोर्ड बना होता तो यह चोरी नहीं होती।
- देवकीनंदन ठाकुर के मुताबिक चारों शंकराचार्यों में से कोई एक इस बोर्ड का संचालन करता।
- इसी बीच में देवकीनंदन ठाकुर ने बच्चों की संख्या पर भी अपनी राय रखी।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में देवकीनंदन ठाकुर ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। सबसे ज्यादा चर्चा अयोध्या राम मंदिर में चंदे की चोरी के मामले पर हुई।
जानकारी के अनुसार देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज सनातन बोर्ड होता तो राम मंदिर में चंदे की चोरी नहीं होती। उन्होंने इसकी वजह भी बताई।
देवकीनंदन ठाकुर का कहना है कि इस बोर्ड का संचालन चारों शंकराचार्यों में से कोई एक देख रहा होता। उनकी देखरेख में ऐसी चोरी संभव नहीं थी।
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धर्म और राजनीति पर विचार
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अब सनातन की बात खुलकर होनी चाहिए। उनके मुताबिक अगर किसी भी पार्टी में कोई सनातनी है और परंपरा का पालन करता है तो यह उनके लिए सबसे अच्छी बात है।
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चंदा चोरी से आहत हुई आस्था
देवकीनंदन ठाकुर का कहना है कि जिन कार्यकर्ताओं ने यह काम किया है, उन्हें धन वापस भेंट कर खुद वहां से हट जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि इसीलिए सनातन बोर्ड बनना जरूरी है।
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शादी की उम्र पर सलाह
देवकीनंदन ठाकुर ने आगे कहा कि शादी कब करनी है, यह हर किसी की अपनी मर्जी है। लेकिन उनकी राय में सही उम्र 20 से 25 साल ही है। उन्होंने विदेशी समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 16 साल का बच्चा खुद अपने खर्चे उठाने लगता है।
देवकीनंदन ठाकुर के मुताबिक इंसान उस दिन सेटल होता है, जब वह खुद कमाकर घर लौटता है। बड़ा मकान या बड़ी गाड़ी होना सेटल होने की निशानी नहीं है।
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महंगाई में ज्यादा बच्चों की सलाह
देवकीनंदन ठाकुर ने एक उदाहरण देकर अपनी बात समझाई। उन्होंने बताया कि एक परिवार में इकलौते बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद माता-पिता का जीवन बहुत मुश्किल हो गया।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान ने दो आंख, दो किडनी, दो हाथ और दो पैर इसीलिए दिए हैं। ताकि एक के खराब होने पर दूसरे से काम चल सके। उनके मुताबिक यही तर्क बच्चों की संख्या पर भी लागू होता है।
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