पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई! डिप्टी सीएम देवड़ा के यहां किसकी चली? OSD की नियुक्ति की फाइलों पर सवाल

Ramanand Tiwari | Oct 09, 2026, 23:43 IST
डिप्टी CM देवड़ा के OSD पर विवाद
BHOPAL. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा की विदाई ने पुरानी नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों और विवादों के बीच अधिकारियों के चयन में आखिर किसकी भूमिका रही? राजेंद्र गुर्जर, राजेश हेनरी और दिलीप राज द्विवेदी के कार्यकाल एवं वर्तमान में पीए का दायित्व निभा रहे देवेंद्र मालवीय सहित नियुक्तियों की पड़ताल।

ओएसडी की कुर्सी फिर सवालों के घेरे में

मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ( Jagdish Devda ) के ओएसडी दीपम रायचूरा ( Deepam Raichura ) की विदाई ने मंत्री कार्यालय की पुरानी नियुक्तियों की परतें खोल दी हैं। मई 2024 में शिकायत, अगस्त में नियुक्ति और अक्टूबर 2026 में प्रभार से हटाए जाने का घटनाक्रम कई सवाल छोड़ गया। राजेंद्र गुर्जर के पुराने विवाद और अन्य अधिकारियों के कार्यकाल के बीच अब सबसे बड़ा सवाल है कि देवड़ा के यहां ओएसडी चयन में आखिर किसकी चली?



उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के दफ्तर में ओएसडी की कुर्सी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दीपम रायचूरा को हटाए जाने के बाद चर्चा केवल एक अधिकारी की विदाई तक सीमित नहीं रही। अब सवाल उन फैसलों पर है, जिनके जरिए अलग-अलग समय पर अधिकारियों को मंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।



देवड़ा के निजी स्टाफ से जुड़े रहे राजेंद्र सिंह गुर्जर, राजेश हेनरी, डॉ. दिलीप राज द्विवेदी और दीपम रायचूरा के कार्यकाल अब चर्चा में हैं। हालांकि, इन सभी अधिकारियों के खिलाफ समान प्रकृति के आरोप नहीं हैं और सभी को विवाद के कारण हटाए जाने की पुष्टि भी नहीं है।



रायचूरा को हटाया, लेकिन नियुक्ति किस आधार पर हुई?

9 अक्टूबर 2026 को दीपम रायचूरा को देवड़ा के ओएसडी प्रभार से हटाया गया। भोपाल के शराब ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप सामने आने के बाद यह कार्रवाई हुई।



रायचूरा ने आरोपों को गलत बताया है। देवड़ा के अनुसार, जिस वित्तीय वर्ष 2024-25 का मामला सामने आया, उस समय रायचूरा भोपाल आबकारी विभाग में पदस्थ थे, उनके ओएसडी नहीं थे।



निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें वर्तमान प्रभार से हटाया गया, लेकिन रायचूरा की विदाई ने उनकी नियुक्ति का पुराना सवाल फिर खड़ा कर दिया है। आखिर संवेदनशील मंत्री कार्यालय में जिम्मेदारी देने से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड की कितनी जांच हुई थी?



मई में शिकायत, अगस्त में नियुक्ति!

मई 2024 में एक महिला आबकारी उपनिरीक्षक के नाम से रायचूरा के खिलाफ शिकायत की खबर प्रकाशित हुई थी। शिकायत में गंभीर आरोप थे, लेकिन शिकायतकर्ता की पहचान को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोपों का अंतिम निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।



इसके लगभग तीन महीने बाद अगस्त 2024 में रायचूरा को देवड़ा का ओएसडी बनाए जाने की खबर सामने आई। उस समय नियुक्ति प्रक्रिया में सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे थे।



यहीं से सवाल उठता है कि नियुक्ति की फाइल आगे बढ़ने से पहले पुरानी शिकायत की स्थिति जांची गई थी या नहीं। यदि जांच हुई, तो उसका निष्कर्ष क्या था?



सागर की आपत्ति के बाद भोपाल में जिम्मेदारी?

रायचूरा की सागर में पूर्व पदस्थापना से जुड़ा घटनाक्रम भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि सागर में उनके कामकाज को लेकर तत्कालीन मंत्री गोपाल भार्गव की ओर से आपत्ति जताई गई थी। बाद में रायचूरा भोपाल पहुंचे और अगस्त 2024 में देवड़ा के ओएसडी बने।



कथित आपत्ति और बाद की नियुक्ति के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं है। फिर भी सवाल है कि यदि पूर्व पदस्थापना के दौरान कोई विभागीय आपत्ति दर्ज हुई थी, तो नई जिम्मेदारी देते समय उस पर क्या निर्णय लिया गया?



राजेंद्र गुर्जर के पुराने विवाद भी चर्चा में

देवड़ा के पूर्व विशेष सहायक राजेंद्र सिंह गुर्जर का नाम पुराने समाचार अभिलेखों में मिलता है। 2010 के आसपास उन्हें मूल विभाग वापस भेजे जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। उस दौरान खाचरौद जेल से सिमी कार्यकर्ताओं की रिहाई के प्रकरण में उनकी कथित भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।



वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 के कथित अनियमितता प्रकरण में भी उनका नाम सामने आया था। गुर्जर ने जांच एजेंसी की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। इन आरोपों में उनकी दोषसिद्धि का कोई निष्कर्ष यहां स्थापित नहीं है।



पुराने विवादों के बीच यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि मंत्री कार्यालय में काम कर चुके अधिकारियों की नियुक्ति और कार्यमुक्ति का प्रशासनिक रिकॉर्ड क्या बताता है?



हेनरी की विदाई, द्विवेदी का लंबा कार्यकाल

देवड़ा के पूर्व निजी स्टाफ से जुड़े राजेश हेनरी की विदाई को लेकर भी चर्चाएं रही हैं। हालांकि, उन्हें किस प्रशासनिक कारण से हटाया गया, इसका स्पष्ट विवरण सामने नहीं है। डॉ. दिलीप राज द्विवेदी लंबे समय तक देवड़ा के स्टाफ से जुड़े रहे। अगस्त 2024 में उन्हें विशेष सहायक नियुक्त किए जाने की खबर भी प्रकाशित हुई थी।



द्विवेदी का लंबा कार्यकाल अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन निजी स्टाफ में अधिकारियों के चयन, कार्यकाल और जिम्मेदारियों की व्यवस्था समझने के लिए उनका नाम भी महत्वपूर्ण है।



निजी स्टाफ का प्रभाव, जवाबदेही किसकी?

मंत्री कार्यालय में कार्यरत अधिकारी विभागीय समन्वय, प्रशासनिक सूचनाओं और महत्वपूर्ण पत्राचार से जुड़े रहते हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति में पारदर्शिता और सेवा रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।



राजनीतिक हलकों में निजी स्टाफ के प्रभाव और आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। असली मुद्दा यह है कि संवेदनशील पदों पर नियुक्त अधिकारियों के हितों के टकराव, संपत्ति विवरण और पूर्व शिकायतों की जांच के लिए क्या व्यवस्था अपनाई जाती है?



सवाल विदाई का नहीं, नियुक्ति के फैसले का है

रायचूरा प्रकरण में तीन तारीखें महत्वपूर्ण हैं—मई 2024 की शिकायत, अगस्त 2024 की नियुक्ति और 9 अक्टूबर 2026 की विदाई। अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि नियुक्ति की अनुशंसा किसने की, विभागीय अनुमति कैसे मिली और पूर्व शिकायतों की स्थिति क्या थी।



राजेंद्र गुर्जर, राजेश हेनरी और अन्य पूर्व अधिकारियों के नियुक्ति तथा कार्यमुक्ति आदेशों से भी मंत्री कार्यालय के स्टाफ बदलावों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। रायचूरा को हटाने का फैसला सामने आ चुका है।



अब जवाब उस पुराने फैसले का चाहिए, जिसके तहत उन्हें ओएसडी बनाया गया था। सवाल यही है कि पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई; देवड़ा के यहां आखिर किसकी चली?



FAQ:



  1. जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूरा को क्यों हटाया गया?
    दीपम रायचूरा को 9 अक्टूबर 2026 को भोपाल के शराब ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों के चलते हटाया गया।
  2. दीपम रायचूरा की नियुक्ति में क्या विवाद था?
    दीपम रायचूरा की नियुक्ति अगस्त 2024 में हुई थी, जबकि उनके खिलाफ मई 2024 में एक महिला आबकारी उपनिरीक्षक द्वारा गंभीर आरोपों की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी, जिससे नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठता है।
  3. ओएसडी नियुक्तियों में जिम्मेदारी की जांच कैसे होती है?
    ओएसडी नियुक्तियों में जिम्मेदारी की जांच के लिए जरूरी है कि अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और पूर्व शिकायतों की स्थिति की समीक्षा की जाए, जो कि इस मामले में स्पष्ट नहीं है।
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