डिजिटल अरेस्ट ठगी का खुलासा: 17 राज्यों में दबिश, 12 गिरफ्तार, 54 लाख बरामद
समझें क्या है पूरा मामला...
- देवास में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 लाख की ठगी।
- 127 दिन, 17 राज्य, 33 जिले, फिर पकड़ा गया गिरोह।
- पुलिस, सीबीआई बनकर ठगों ने डराया, रकम ऐंठी।
- 12 गिरफ्तार, 54 लाख से ज्यादा रकम बरामद हुई।
- देवास पुलिस ने 58 हजार किलोमीटर का सफर तय किया।
देवास में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63.52 लाख रुपए की ठगी हुई। ठगों ने खुद को पुलिस, सीबीआई और ईडी अधिकारी बताया। फोन और वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर करवाई गई। देवास पुलिस ने 127 दिन जांच कर 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया। 54.84 लाख रुपए की रकम भी बरामद कर ली गई।
कैसे हुई ठगी
गिरोह के सदस्यों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ितों को फोन और वीडियो कॉल किए। गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खातों में रकम मंगवाई गई। इस तरह कुल 63.52 लाख रुपए की ठगी हुई।
कैसे खुला मामला
दवा कंपनी से सेवानिवृत्त अधिकारी सुरेश इंग्ले ने शिकायत दर्ज कराई। वे देवास के केलादेवी क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने 4 अप्रैल को हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की। इसके बाद तुरंत जीरो एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज हुई।
पुलिस ने बैंक खातों की जानकारी जुटाई। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल नंबर की मदद ली। धीरे-धीरे गिरोह से जुड़े लोगों की कड़ियां जुड़ती गईं।
17 राज्यों में दबिश
तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस टीमें अलग-अलग राज्यों में पहुंचीं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश समेत कई राज्यों में कार्रवाई हुई। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में भी दबिश दी गई। कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में यह अभियान चला।
70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमें इस काम में जुटी थीं। अभियान 127 दिनों तक चला। इस दौरान टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर का सफर तय किया।
कौन-कौन गिरफ्तार हुए
पुलिस ने राजस्थान से भूराराम राव, मालाराम मेघवाल और नाजिम खान को पकड़ा। आंध्रप्रदेश से थोटुकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा और मुकराम मेघा गिरफ्तार हुए। उत्तरप्रदेश के कानपुर से वैभव शुक्ला और आयुष गुप्ता को पकड़ा गया।
गुजरात के वडोदरा से केयूर कुमार गिरफ्तार हुए। बिहार से मोहम्मद अब्दुल्ला, कर्नाटक से अनिल कुमार पकड़े गए। आंध्रप्रदेश के नेल्लोर से गिरिश कुमार येलेन्टि और पश्चिम बंगाल से कमल कांति भी गिरफ्तार हुए। इस तरह कुल 12 आरोपित पुलिस के हाथ लगे।
अभी क्या बाकी
गिरोह का एक और सदस्य मोंटू उर्फ दीपेश अभी जेल में बंद है। वह जयपुर का रहने वाला है और गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में है। पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर देवास लाएगी। पूछताछ में गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
पुलिस टीम का इनाम
एसपी पुनीत गेहलोद ने पूरी कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम को 10 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की। यह मामला दिखाता है कि सही तकनीकी जांच से बड़े साइबर गिरोह भी पकड़े जा सकते हैं।
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