देवास ब्लास्ट के बाद वायरल फोटो पर सियासी घमासान,“हादसे के बाद दूरी… लेकिन हादसे से पहले किसके साथ खड़े थे नेता?”

Ramanand Tiwari | May 14, 2026, 23:34 IST
Photograph: (the sootr)
देवास में हुए विस्फोट ने सत्ता और सिस्टम पर नए सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद वायरल फोटो ने राजनीतिक घमासान बढ़ा दिया है। क्या नेताओं ने फैक्ट्रियों पर कार्रवाई में लापरवाही बरती?

देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने सिर्फ कई घरों के चिराग नहीं बुझाए, बल्कि सत्ता, सिस्टम और राजनीतिक रिश्तों पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। अब बहस सिर्फ विस्फोट तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी हो रही है कि क्या राजनीतिक पहुंच और स्थानीय प्रभाव के कारण ऐसी फैक्ट्रियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो पाती?



वायरल फोटो ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

देवास ब्लास्ट के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से शेयर की जा रही है। तस्वीर में बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय के साथ नजर आ रहे हैं।



हादसे के बाद यह फोटो अब राजनीतिक हमलों का बड़ा आधार बन गई है। विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक सवाल उठा रहे हैं कि जिन फैक्ट्रियों को लेकर पहले से शिकायतें थीं, क्या उन्हें किसी स्तर पर संरक्षण मिला हुआ था?



सांसद से क्या है कनेक्शन?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सांसद और फैक्ट्री संचालक के बीच आखिर संबंध कितने करीबी थे? हालांकि सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने इस पूरे मामले में अपनी सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का परिचित होना या फोटो खिंचवा लेना इस बात का प्रमाण नहीं कि उसके गलत कामों का समर्थन किया जा रहा है।



सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी का पक्ष

द सूत्र से चर्चा में सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा-

सांसद के इस बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस थमती नजर नहीं आ रही। लोग पूछ रहे हैं कि यदि स्थानीय स्तर पर अवैध संचालन की शिकायतें पहले से थीं, तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने कितनी गंभीरता दिखाई?



हर हादसे के बाद क्यों दोहराई जाती है वही कहानी?

मध्य प्रदेश में फैक्ट्री विस्फोट और अवैध संचालन के मामले नए नहीं हैं। पहले भी कई हादसों में मजदूरों की जान जा चुकी है। हर बार हादसे के बाद जांच बैठती है। मुआवजे का ऐलान होता है। नेता संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। लेकिन कुछ समय बाद पूरा मामला ठंडा पड़ जाता है।



सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी फैक्ट्रियां हादसे से पहले प्रशासन की नजर में क्यों नहीं आतीं?



नेता प्रतिपक्ष ने भी सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देवास विस्फोट सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। मजदूर मामूली दिहाड़ी के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहे और जिम्मेदार विभाग आंखें बंद किए बैठे रहे।



उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे थे, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और आखिर मौत का यह कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा था?



जनता पूछ रही है असली सवाल

  • क्या फैक्ट्री नियमों के तहत संचालित हो रही थी?
  • शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • क्या राजनीतिक पहुंच के कारण प्रशासन नरम रहा?
  • हर हादसे के बाद सिर्फ मुआवजा ही समाधान क्यों बन जाता है?

देवास ब्लास्ट अब सिर्फ एक औद्योगिक हादसा नहीं रह गया है। यह मामला सिस्टम की जवाबदेही, राजनीतिक नजदीकियों और प्रशासनिक कार्रवाई पर भी बड़ा सवाल बन चुका है।



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