हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला में बदले नियम, ASI ने बदले सभी बोर्ड
ऐसे समझें पूरा मामला...
- ASI ने भोजशाला की पुरानी नियमावली हटाई।
- हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर माना।
- कल सूर्योदय से सूर्यास्त तक हवन-पूजन होगा।
- परिसर में 'ॐ नमः शिवाय' के जयघोष गूंजे।
- देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) में इन दिनों धार्मिक माहौल का नया अध्याय शुरू हो गया है। इंदौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पुरानी नियमावली (manual) के बोर्ड हटा दिए हैं। परिसर में ऊॅं नमः शिवाय के जयघोष गूंज रहे हैं और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।
भोजशाला में नया धार्मिक अध्याय
मध्य प्रदेश में स्थित ऐतिहासिक धार भोजशाला (Dhar Bhojshala) में आज सोमवार को पूरी तरह शांतिपूर्ण और धार्मिक वातावरण रहा। सुबह से ही दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचे।
परिसर में उनकी आवाजाही लगातार बनी रही। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना और दर्शन किए। 'ॐ नमः शिवाय' के जयघोष से पूरे परिसर में आस्था का माहौल बना रहा।
ASI ने हटाई पुरानी नियमावली
इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) के ऐतिहासिक आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI - Archaeological Survey of India) ने भोजशाला परिसर के बाहर लगे नियमों संबंधी पुराने बोर्ड हटवा दिए। इन बोर्डों पर पहले प्रवेश शुल्क और दोनों समुदायों से जुड़े नियम अंकित थे। पेंटरों द्वारा इन बोर्डों को बदला गया।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला को हिंदू मंदिर (Hindu Temple) के रूप में मान्यता मिल चुकी है। इसी के चलते पुरानी नियमावली हटाकर नई व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
कल होगा विशेष हवन-पूजन
भोज उत्सव समिति (Bhoj Utsav Samiti) के संयोजक गोपाल शर्मा ने जानकारी दी कि मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला परिसर में विशेष हवन-पूजन (Havan-Pujan) का भव्य आयोजन किया जाएगा।
इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि भोजशाला में लगातार धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। देशभर से श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यह आयोजन हिंदू आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनता जा रहा है।
महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु बोले-
महाराष्ट्र (Maharashtra) से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु सुरेश पारीक ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि भोजशाला के बारे में बहुत सुना था और पहली बार यहां आए।
परिसर के हर कोने में 'ॐ नमः शिवाय' लिखा दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे परिसर में अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण (spiritual atmosphere) का अनुभव होता है। श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का संगम देखने को मिल रहा है।
भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व
धार भोजशाला (Dhar Bhojshala) एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है। माना जाता है कि यह परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर (Saraswati Temple) है।
ASI इस परिसर की देखरेख करती है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह स्थल हिंदू आस्था के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं।
नई नियमों को लागू करने की तैयारी
हाई कोर्ट के फैसले के बाद ASI (Archaeological Survey of India) नई नियमावली तैयार करने में जुटी है। पुराने बोर्ड हटाए जाने के बाद परिसर में नए नियम लागू किए जाएंगे।
इन नियमों में हिंदू मंदिर परंपराओं का ध्यान रखा जाएगा। प्रशासन भी परिसर की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सक्रिय है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई व्यवस्था आवश्यक हो गई है।
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