भोजशाला में पूजा शुरु, दोपहर में होगी नमाज, 8 हजार जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात

Aman Vaishnav | Jan 23, 2026, 08:24 IST
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धार की भोजशाला में आज, बसंत पंचमी के दिन पूजा और नमाज दोनों का एक साथ आयोजन होने जा रहा है। ऐसा करीब 10 साल बाद हो रहा है। हिंदू पक्ष ने सूर्योदय से पूजा शुरू कर दी है, जो सूर्यास्त तक चलेगी। वहीं, मुस्लिम समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करेगा।

News In Short

  • भोजशाला में आज 23 जनवरी को बसंत पंचमी के मौके पर पूजा और नमाज का आयोजन हो रहा है।
  • हिंदू पक्ष ने सूर्योदय से पूजा शुरू की, जो सूर्यास्त तक चलेगी।
  • मुस्लिम समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करेगा।
  • सुरक्षा व्यवस्थाके पुख्ता इंतजाम, 8 हजार से अधिक जवान तैनात हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने पूजा और नमाज के लिए विशेष आदेश जारी किए हैं।
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भोजशाला में पूजा और नमाज

मध्य प्रदेश के धार के विवादित धार्मिक स्थल भोजशाला में सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष ने पूजा शुरू कर दी है। वहीं, दोपहर में 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज होगी।



यहां बसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा करने और जुमे के दिन मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की इजाजत मिलती है। बाकी दिन यहां आम लोगों का प्रवेश मना होता है। लेकिन जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो यहां तनाव बढ़ जाता है।



पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। इस बार यहां सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के 8 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन और एआई की मदद भी ली जा रही है।



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सुप्रीम कोर्ट का आदेश

गुरुवार को हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से दोपहर 1 बजे तक पूजा करने की अनुमति दी। 3 बजे से सूर्यास्त तक हिंदू पक्ष को फिर से पूजा करने की इजाजत दी गई है।





कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए हैं कि दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग जगह तय की जाए। शांति और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। यह सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने की।



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10 साल बाद भोजशाला में पूजा और नमाज एक साथ

10 साल बाद, आज भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज दोनों एक साथ हो रहे हैं। यह दुर्लभ अवसर है, क्योंकि जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, यहां हमेशा तनाव और विवाद का माहौल बन जाता है। 1995 में शुरु हुए विवाद के बाद से ही प्रशासन ने एक फैसला लिया था। इस धार्मिक स्थल पर हिंदू पक्ष को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाएगी।



पिछले दशक में कई बार यहां विवाद गहरा चुका था। 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के आदेश पर आम लोगों का प्रवेश रोक दिया गया था। 2003 में पूजा की अनुमति मिलने के बाद भी कई बार विवाद हुआ। 2013 और 2016 में जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी, तो हिंसा और तनाव इतने बढ़ गए थे कि पुलिस को कर्फ्यू और हवाई फायरिंग जैसी कार्रवाई करनी पड़ी थी।



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ये है भोजशाला विवाद

भोजशाला 11वीं-12वीं सदी का एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे राजा भोज ने ज्ञान और कला के अध्ययन के लिए बनवाया था। अब इसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर और ज्ञान का केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है।



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