हाईकोर्ट के भोजशाला फैसले में राज्य सरकार मस्जिद के लिए जमीन देने के लिए बाध्य नहीं

Sanjay Gupta | May 15, 2026, 17:37 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ गया है। हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार मिल गया है और साल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया है।

समझें पूरा मामला...

  • धार भोजशाला को मंदिर स्वरूप में मान्यता मिली।
  • मस्जिद निर्माण राज्य सरकार की अनुमति पर निर्भर।
  • 2003 का मुस्लिम नमाज आदेश निरस्त किया गया।
  • हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार सुरक्षित।
  • मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील का संकेत दिया।

धार भोजशाला पर फैसला 15 मई की दोपहर ढाई बजे इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने सुना दिया। जस्टिस विजय शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने 242 पेज का विस्तृत आदेश दिया। इसमें परिसर को मां सरस्वती देवी के मंदिर के स्वरूप को मान्य किया है। इस आदेश में मस्जिद के लिए जमीन आवंटन की बात है लेकिन इसमें एक लाइन जुड़ी है जो इस पक्ष के लिए झटका है।



राज्य सरकार की इच्छा पर है जमीन देना

भोजशाला परिसर को हाईकोर्ट ने मां सरस्वती के मंदिर स्वरूप के रूप में मान्य किया है। वहीं बात आ रही थी कि मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्ष को जमीन दी जाएगी। लेकिन इस मामले को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधीन किया है। यानी चाहे तो राज्य सरकार इसके लिए जमीन दें या नहीं फिर नहीं दें।



आदेश में केवल यही लिखा गया है कि मुस्लिम पक्षकार को मस्जिद निर्माण के लिए जमीन आवंटन के लिए राज्य सरकार को आवेदन देना होगा। राज्य सरकार इस पर कानून के अनुसार विचार कर धार जिले में स्थाई भूमि आंटन पर विचार कर सकती है। यानी इस लाइन से साफ है कि राज्य सरकार को पहले तो इन्हें आवेदन देना होगा और फिर सरकार इस पर विचार करेगी और उन्हें उचित लगता है तो जमीन देगी नहीं तो नहीं देगी।



साथ ही 2003 का आदेश निरस्त

इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को एएसआई डायरेक्टर के जिस 7 अप्रैल 2003 आदेश से यहां पर नमाज के अधिकार मिले थे, उसे खत्म कर दिया गया है। इस पूरे आदेश को ही हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके तहत हिंदुओं के पूजा के अधिकार को प्रतिबंधित किया गया था और मुस्लिम को नमाज की मंजूरी मिली हुई थी।



Dhar bhojshala (2)


मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

उधर मुस्लिम पक्ष ने याचिकाएं खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह दी है। धार सङर काजी वकार सादिक ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान है। लेकिन हम फैसले की समीक्षा करेंगे और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की और रूख करेंगे।



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