धार भोजशाला में मुस्लिम पक्ष ने HC में रखे राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी पोर्टल पर लिखा यह सरस्वती का मंदिर
News in short
- हाईकोर्ट इंदौर में भोजशाला मामले की अंतिम सुनवाई जारी है।
- मुस्लिम पक्ष ने राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद दर्ज होने का दावा किया।
- एएसआई ने दस्तावेज पेश कर इसे सरस्वती मंदिर बताया।
- दोनों पक्षों ने पुराने रिकॉर्ड और सर्वे पर सवाल उठाए।
- मामले में रोज नए दस्तावेज सामने आ रहे हैं।
News in detail
इंदौर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में धार भोजशाला को लेकर सुनवाई जारी है। इंटरविनर जिब्रान अंसारी की ओर से अधिवक्ता की ओर से तर्क रखे गए। इसमें फिर से याचिका को लेकर सवाल उठाया गया और विविध राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेज रखे गए।
इंटरविनर ने यह रखी बात
इंटरविनर की ओर से अधिवक्ता अशहर अली वारसी, पूर्व एएसआई, मनन शर्मा, मोहम्मद हशीम ने बात रखी। इसमें अधिवक्ता वारसी ने कहा कि साल 1925-26 के राजस्व रिकॉर्ड में ही यह सर्वे नंबर मस्जिद के नाम से दर्ज है। साल 1904 में जो आर्कियोलॉजी का कानून बना और फिर वक्फ का आया, इसमें गजट नोटिफिकेशन में भी मस्जिद बताया गया है।
ऐसे में यह टाइटल के लिए सिविल केस है, इसके लिए सिविल कोर्ट जाना होगा। यह भी बात फिर दोहराई गई कि यह मंदिर पूजा के कोई सबूत नहीं मिले हैं। केवल सरस्वती स्कूल कहा गया। वहीं वाग्देवी की प्रतिमा इस परिसर से अलग जगह मिली है और इसके दस्तावेज गलत पेश हुए हैं। भोजशाला का नाम साल 1912 में आया था, इसके पहले यह नाम नहीं था।
सर्वे पर ही उठाए सवाल
इंटरविनर की ओर से अधिवक्ता ने एएसआई के सर्वे पर भी सवाल उठाए। इसमें कहा गया कि साल 1952 में ही यहां पर भोज उत्सव की मंजूरी देने से एएसआई डायरेक्टर ने इंकार कर दिया था और कहा था कि यह मस्जिद है, ऐसे में इसकी मंजूरी नहीं दी जा सकती है। ऐसे में एएसआई बताए कि वह आदेश सही था या फिर यह सर्वे सही है।
सरकारी पोर्टल पर लिखा- यह सरस्वती का मंदिर
उधर, एएसआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने बात रखी। इसमें उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट के साथ ही पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेज और विविध आदेश पेश किए। साथ ही मप्र शासन की जिला धार की भोजशाला को लेकर दी गई अधिकृत जानकारी भी पेश की।
इसमें लिखा हुआ है कि यह परमार वंश के राजा भोज द्वारा बनाई गई थी। इस भोजशाला या सरस्वती मंदिर के अवशेष आज भी कमाल मौलाना मस्जिद में देखे जा सकते हैं। राजा भोज का सरस्वती महाविद्यालय या मंदिर यहीं स्थित था। यह मूल रूप से सरस्वती देवी का मंदिर था। यहां मिली देवी सरस्वती की प्रतिमा ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है। सुनवाई जारी रहेगी और मंगलवार को फिर एएसआई द्वारा बात रखी जाएगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
भोजशाला पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखी सामाजिक सौहार्द की दलील, कहा ऐसे नियम बनाएं कि विवाद ना हो
हाईकोर्ट में रखे तर्क- भोजशाला संस्कृत सीखने का केंद्र, इसका उज्जैन के महाकाल मंदिर से संबंध
भोजशाला पर हाईकोर्ट बेंच बोली- यह मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं, हिंदू पक्ष के तर्क पूरे