धार भोजशाला में विवाद: हिंदू संगठन की मांग नमाज की जगह बदली जाए
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परिसर के पास हर शुक्रवार को नमाज अदा की जा रही है। वहीं लगातार हिंदू-मुस्लिम पक्ष के बीच में तनाव बढ़ रहा है।
पहले मुस्लिम पक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर आरोप लगाए कि हिंदू पक्ष द्वारा कमाल मौला दरगाह के बाहर आपत्तिजनक बातें कही जाती है। इसके बाद अब हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने कलेक्टर राजीव मीणा और एसपी सचिन शर्मा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में कन्हैयालाल यादव जिला अध्यक्ष, मनीष मकवाने नगर अध्यक्ष और आशीष गोयल प्रदेश उपाध्यक्ष शामिल थे।
नमाज की जगह पर उठाया सवाल
शुक्रवार दिनांक 14 अगस्त को मार्ग अवरुद्ध कर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय को नमाज उपरांत तथाकथित दरगाह में उसी रास्ते से जाने की अनुमति दी गई। इससे हिंदू समुदाय का आधिकारिक मार्ग अवरुद्ध हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे नंबर 596 पर नमाज की व्यवस्था का कहा था। साथ ही यह भी कहा कि यह आदेश पक्षों को आपसी सहमति से किसी अन्य स्थल का चयन करने से नहीं रोकेगा। हिंदू समुदाय की आपत्ति और विरोध के बावजूद खसरा नंबर 612 पर अस्थायी नमाज करवाई जा रही है।
नमाज की जगह बदली जाए
मांग में कहा गया कि इसी खसरे पर वर्षों से स्थानीय रहवासियो द्वारा लगातार खेती की जा रही है। आसपास मकान /प्रतिष्ठान बने हैं। यहां कानून व्यवस्था की स्थिति बन सकती है।
बहुसंख्यक हिंदू समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ कर जबरन वहां नमाज अदा कराई जा रही है। प्रशासन से निवेदन है कि कृपया माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेशों की पूर्ण व्याख्या फिर से एजी मप्र से ली जाए।
तत्काल यहां नमाज बंद की जाए
यह मांग की गई है कि खसरा नंबर 612 पर नमाज की व्यवस्था तत्काल बंद की जाए। संरक्षित स्मारक भोजशाला के 100 मीटर क्षेत्र में प्रशासन द्वारा नमाज की अस्थाई अनुमति प्रदान की गई है।
क्या फिर भविष्य में हिंदू समुदाय द्वारा 100 मीटर के संरक्षित क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों जैसे कथा,हवन, भंडारा,आरती, उत्सव, मेला आदि भी आयोजित किए जा सकेंगे उसमें जिला प्रशासन की कोई आपत्ति मान्य नहीं होगी। अविलंब राजस्व अधिकारियों को निर्देश देकर 100 मी. संरक्षित क्षेत्र की मार्किंग की जाए।
भविष्य में सरस्वती लोक बनना है
आगे यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा अनुरूप धार में भोजशाला और आसपास मां सरस्वती लोक का निर्माण किया जाना है। इसके लिए 100 मीटर क्षेत्र का अतिक्रमण तुरंत हटाया जाना चाहिए ।
बार-बार विवादित नाम बोला जा रहा
पत्र में यह भी कहा गया कि मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति द्वारा अपने वक्तव्य में भोजशाला को बार-बार कमाल मौला मस्जिद बताया जाता है, जबकि हाई कोर्ट ने सरस्वती मंदिर घोषित किया है और मंदिर घोषित करने के आदेश पर ना तो कोई स्थगन है ना ही निरस्त किया गया है।
ASI ने भी इसे मां सरस्वती मंदिर भोजशाला घोषित किया गया है। इन आदेशों में मस्जिद का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए कमाल मौला मस्जिद के नाम पर धार में कहीं भी नमाज स्वीकार्य नहीं है।
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