धार भोजशाला पर शुक्रवार को आएगा फैसला, सभी की नजरें; मंदिर, मस्जिद या फिर पाठशाला

Sanjay Gupta | May 14, 2026, 20:24 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. धार भोजशाला को लेकर आखिरकार मंगलवार 12 मई को सुनवाई पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल से इस मामले में नियमित 23 दिन तक सुनवाई हुई। अब इसमें शुक्रवार 15 मई को फैसला होगा।

धार भोजशाला पर मंगलवार 12 मई को सुनवाई पूरी हो गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल से लगातार 23 दिन सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने पूरी सुनवाई की।



अब इसमें शुक्रवार 14 मई को लंबा विस्तृत आदेश आने की संभावना है। इंदौर हाईकोर्ट ने अपनी वेबसाइट में पर जजमेंट डिलीवर होने की सूचना जारी कर दी है। वहीं इसे देखते हुए कानून व्यवस्था के लिए अधिकारी भी सतर्क हो चुके हैं।



मंदिर, मस्जिद या फिर पाठशाला

हिंदू पक्ष की ओर से इस मामले में मंदिर घोषित किए जाने की मांग की गई है। उधर मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताते हुए वक्फ संपत्ति के कारण अपना दावा कर रहे हैं। जैन पक्ष भी जैन मंदिर का दावा कर रहा है। वहीं वाग्देवी की प्रतिमा को जैन धर्म की अंबिका देवी प्रतिमा कहा गया। वहीं एक अन्य पक्ष ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।



मंदिर के दावे को मुस्लिम ने यह कहकर खारिज किया कि वहां कभी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई। वहीं मस्जिद का दावा हिंदू पक्ष ने खासकर एएसआई की रिपोर्ट पर खारिज किया जिसमें कहा गया है कि मस्जिद पुराने स्ट्रक्चर को तोड़कर ही बनी है। लेकिन यह तथ्य आ रहा है कि पहले संस्कृत पाठशाला थी और इसके कई दस्तावेज रिकार्ड है।



सभी के अपने दावे और प्रमाण और सुप्रीम कोर्ट के विविध केस का हवाला है। अब नजरें है कि यह मंदिर घोषित होगा, मस्जिद माना जाएगा या फिर पुरानी पाठशाल के रूप में इसे मान्य किया जाएगा।



इन सभी अधिवक्ताओं ने रखे हैं तर्क

इसमें शासन पक्ष की ओर से एजी प्रशांत सिंह ने तो वहीं हिंदू पक्ष की ओर से मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, अधिवक्ता विनय जोशी, पार्थ यादव आदि ने बात रखी। एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व एडिशनल सालिसिटर जनरल सुनील जैन थे। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, अजहर वारसी, नूर अहमद थे, तो एक अन्य याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन थी। एक अन्य याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले व कार्तिक चितले थे।



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हिंदू फ्रंट की ओर से लगी थी याचिका

साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजनाजी अग्निहोत्री एवं उनके साथियों द्वारा याचिका दायर हुई थी। उच्च न्यायालय इंदौर में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी।



इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिए और वहां 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे हुआ। फिर सुप्रीम कोर्ट में मामला गया और वहां से हाईकोर्ट को केस की सुनवाई तय समय में करने के लिए कहा गया। इसके बाद सभी याचिकाएं लिंक करके सभी को सुना गया। इसमें जैन समाज ने भी याचिका दायर की ओर कहा कि यह जैन मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद है।



हिंदू पक्ष की ओर से तर्क और मांग

हिंदू समाज की मांग है कि भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाए।



केंद्र सरकार को आदेशित किया जाए कि भोजशाला हेतु एक ट्रस्ट बनाया जाए जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके। ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि मां सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जाए। भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो।



भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जाए एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले। ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जाए।



मुस्लिम पक्ष का दावा

वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद है। साल 1935 से यह वक्फ संपत्ति है। यदि मंदिर होता तो मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होती लेकिन इसके कोई प्रमाण नहीं है। कैरेक्टर तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। यहां पर वरशिप एक्ट लागू नहीं होता है।



वैज्ञानिक सर्वे में कार्बन डेटिंग का उपयोग नहीं हुआ ऐसे में तय नहीं कि यह परमारकालीन निर्माण है। पूरा सर्वे गलत है। यह सिविल वाद है और कायदे से इसकी सुनवाई जिला कोर्ट में होना चाहिए इसलिए याचिका ही मेंटेनेबल नहीं है। जो प्रतिमा वाग्देवी की बताई जा रही है वह इस परिसर में मिली ही नहीं थी।



सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की मांग

उधर अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फैसला कुछ भी हो लेकिन ऐसे दिशा निर्देश दिए जाएं कि यहां पर सौहार्द माहौल बना रहे। बात हिंदू और मुस्लिम की नहीं है., बात संविधान की है और कानून व्यवस्था की है। ऐसे में इस तरह के दिशा निर्देश तय किए जाएं कि फिर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हो।



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