डायल-112 स्पीड टेस्ट: मदद बुलाने पर कहां सबसे जल्दी पहुंचती है एमपी पुलिस?

Sourabh Bhatnagar | Jul 08, 2026, 09:08 IST
डायल-112 स्पीड टेस्ट
मध्य प्रदेश में डायल-112 का रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए पुलिस रेडियो मुख्यालय ने नई कवायद शुरू की है। मंडला में सबसे तेज सिर्फ 6.32 मिनट में मदद मिल रही है, जबकि हरदा जिले में 20.22 मिनट लग रहे हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में डायल-112 का रिस्पॉन्स टाइम कम करने की कवायद शुरू हुई है।
  • पुलिस रेडियो मुख्यालय हर दिन जिलेवार देरी की सूची तैयार कर रहा है।
  • मंडला जिले में सबसे तेज सिर्फ 6.32 मिनट में मदद पहुंच रही है।
  • हरदा जिले में सबसे ज्यादा 20.22 मिनट का औसत समय लग रहा है।
  • कैड सिस्टम से अब ऑटो मेल के जरिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।

आपात स्थिति में आम जनता की मदद का सबसे बड़ा सहारा पुलिस की एफआरवी (First Response Vehicle) डायल-112 है। लेकिन प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इसका रिस्पॉन्स टाइम बहुत अलग-अलग है। कहीं छह मिनट में मदद मिल जाती है, तो कहीं बीस मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है। इसी फर्क को कम करने के लिए पुलिस रेडियो मुख्यालय ने नई तकनीकी कवायद शुरू की है।



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किन जिलों में सबसे तेज सेवा

आंकड़ों के मुताबिक मंडला जिला डायल-112 की स्पीड में सबसे आगे है। यहां साल भर में 823 घटनाएं दर्ज हुईं। औसत रिस्पॉन्स टाइम सिर्फ 6.32 मिनट रहा। इसके बाद धार जिले का नंबर आता है। यहां 1680 घटनाओं में औसतन 7.31 मिनट लगे। निवाड़ी जिले में 582 घटनाओं पर 7.48 मिनट का समय लगा। बड़वानी में 562 घटनाओं में औसत समय 9.19 मिनट रहा। अलीराजपुर में 179 घटनाओं पर 9.59 मिनट का औसत दर्ज हुआ। इन पांचों जिलों की सेवा तय मानक से भी बेहतर मानी जा रही है।



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कहां सबसे ज्यादा देरी

दूसरी तरफ कुछ जिलों की तस्वीर चिंताजनक है। हरदा जिला इस मामले में सबसे पीछे है। यहां 495 घटनाओं में मदद पहुंचने में औसतन 20.22 मिनट लगे। अशोकनगर जिले में 1112 घटनाओं पर 20.01 मिनट का समय लगा। बैतूल में भी 1379 घटनाओं में औसत 20.01 मिनट दर्ज हुआ। रीवा जिले में 2676 घटनाओं पर औसतन 19.11 मिनट लगे। रतलाम में 1531 घटनाओं में 19.08 मिनट का समय रहा। यह पांचों जिले तय मानक से काफी पीछे हैं।



क्यों शुरू हुई कवायद

एमपी पुलिस विभाग ने डायल-112 के लिए स्टैंडर्ड कंडीशन में 15 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम तय किया है। इस मानक पर सभी जिलों में कसावट लाने की कोशिश हो रही है। इसी के तहत रेडियो मुख्यालय अब प्रदेशभर में सबसे देरी से पहुंचने वाली गाड़ियों की जिलेवार सूची रोज तैयार कर रहा है। इस सूची के आधार पर मुख्यालय में बनी एक टीम संबंधित थाने को फोन करती है। टीम देरी की वजह पूछती है और जवाब का रिकॉर्ड रखती है। अगर किसी थाने से यह गलती बार-बार होती है, तो उस पर कार्रवाई भी की जा रही है। विभाग का मानना है कि लगातार निगरानी से जवाबदेही बढ़ेगी।



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कैसे काम करता है कैड सिस्टम

पुलिस के रेडियो संचार तंत्र में कैड (Computer Aided Dispatch) नाम का डिजिटल डिस्पैच सिस्टम काम करता है। कंट्रोल रूम में आने वाली हर घटना इसमें डिजिटल तरीके से दर्ज होती है। सिस्टम घटना का विश्लेषण करता है।



इसके बाद सबसे नजदीकी और उपयुक्त डायल-112 टीम को तुरंत मौके के लिए भेजा जाता है। अब इस सिस्टम में एक नया फीचर जोड़ा गया है। इसे ऑटो मेल डिस्पैच नाम दिया गया है।



इस फीचर से सबसे देरी और सबसे जल्दी पहुंचने वाली गाड़ियों की रिपोर्ट रोज खुद अफसरों के मेल पर पहुंच जाती है। इससे अफसरों को हर जिले की स्थिति तुरंत पता चल जाती है।



आगे क्या है लक्ष्य

फिलहाल प्रदेश में डायल-112 का औसत रिस्पॉन्स टाइम 15 मिनट है। यानी मदद मांगने पर गाड़ी को 15 मिनट में मौके पर पहुंचना चाहिए। शहरी इलाकों के लिए यह समय 14.30 मिनट तय है। ग्रामीण इलाकों में यह सीमा 16 मिनट रखी गई है। रेडियो मुख्यालय अब इस समय को और घटाना चाहता है। पहले चरण में इसे 13 मिनट पर लाने की योजना है। इसके बाद अगले चरण में लक्ष्य 10 मिनट रखा गया है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आपात स्थिति में लोगों को पहले से कहीं तेज मदद मिल सकेगी।



FAQ

  1. सवाल 1: मध्य प्रदेश में डायल-112 का सबसे तेज रिस्पॉन्स टाइम कहां है?
    जवाब: मंडला जिले में डायल-112 का रिस्पॉन्स टाइम सबसे तेज है। यहां औसतन 6.32 मिनट में मदद पहुंच जाती है। यह प्रदेश के सभी जिलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
  2. सवाल 2: मध्य प्रदेश का कौन सा जिला डायल-112 सेवा में सबसे पीछे है?
    जवाब: हरदा जिला डायल-112 सेवा में सबसे पीछे है। यहां औसत रिस्पॉन्स टाइम 20.22 मिनट है। यह तय मानक 15 मिनट से काफी ज्यादा है।
  3. सवाल 3: डायल-112 का रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए एमपी पुलिस क्या कर रही है?
    जवाब: पुलिस रेडियो मुख्यालय हर दिन देरी करने वाले थानों की सूची बनाता है। संबंधित टीम फोन कर कारण पूछती है। बार-बार गलती पर कार्रवाई भी होती है। कैड सिस्टम में ऑटो मेल फीचर भी जोड़ा गया है।

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