दिग्गी का भागवत को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण, RSS से मांगा समर्थन

Sandeep Kumar | Jul 05, 2026, 22:35 IST
भागवत को दिग्विजय का पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण
दिग्विजय सिंह 2 अक्टूबर 2026 से महाकाल मंदिर से राम मंदिर तक पदयात्रा निकालेंगे। उन्होंने मोहन भागवत और RSS-VHP से समर्थन मांगा है। यह निमंत्रण सोशल मीडिया पोस्ट से दिया गया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 2 अक्टूबर से पदयात्रा शुरू होगी।
  • महाकाल से राम मंदिर तक यात्रा।
  • मोहन भागवत को निमंत्रण दिया।
  • RSS-VHP से समर्थन मांगा गया।

चंदे की पारदर्शिता पर सवाल

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोहन भागवत को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह पदयात्रा 2 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होगी और अयोध्या के राम मंदिर तक जाएगी। दिग्विजय सिंह ने इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताया है। उन्होंने RSS और VHP से भी समर्थन की अपील की है।



दिग्विजय की पदयात्रा चर्चा में

दिग्विजय सिंह पदयात्रा (Digvijay Singh Padyatra) फिर चर्चा में है। उन्होंने मोहन भागवत को सार्वजनिक निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण सोशल मीडिया पोस्ट से दिया गया। दिग्विजय सिंह ने RSS से समर्थन मांगा है। उन्होंने VHP से भी साथ आने की अपील की। इसके बाद प्रदेश की राजनीति गर्म हो गई।



कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नई बहस छेड़ी है। उन्होंने यात्रा को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया है। उनके अनुसार यात्रा में दल का झंडा नहीं रहेगा। कोई राजनीतिक बैनर भी यात्रा में नहीं होगा। वे इसे धर्म और पारदर्शिता से जोड़ रहे हैं। इसी कारण विवाद और चर्चा दोनों बढ़े हैं।



मोहन भागवत को न्योता

मोहन भागवत निमंत्रण (Mohan Bhagwat Invitation) सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में उनसे साथ चलने का आग्रह किया। उन्होंने RSS प्रमुख को निजी तौर पर बुलाया है। पोस्ट में उन्होंने धर्म की रक्षा की बात कही। साथ ही RSS-VHP से समर्थन देने को कहा। यह बयान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।



दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में लिखा कि धर्म की रक्षा जरूरी है। उन्होंने चंदे की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनके शब्दों ने राजनीतिक प्रतिक्रिया की जमीन तैयार की। RSS और VHP पर सीधी अपील असामान्य मानी गई। कांग्रेस नेता का यह कदम रणनीतिक भी दिखता है। इससे यात्रा को व्यापक चर्चा मिल सकती है।



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महाकाल से अयोध्या की पदयात्रा

महाकाल से राम मंदिर (Mahakal To Ram Mandir) यात्रा खास प्रतीक रखती है। यह यात्रा उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव अयोध्या राम मंदिर होगा। शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। यह दिन गांधी जयंती के रूप में भी महत्वपूर्ण है। इसलिए यात्रा का संदेश और बड़ा दिखता है।



दिग्विजय सिंह ने यात्रा का रूट धार्मिक बताया है। उनका कहना है कि इसमें सभी रामभक्त शामिल हो सकते हैं। खासकर वे लोग शामिल हो सकते हैं। जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में चंदा दिया था। यात्रा में रोज 10 से 15 किलोमीटर चलेंगे। यह लंबी पैदल यात्रा कई राज्यों से गुजर सकती है।



गैर राजनीतिक दावा

गैर राजनीतिक यात्रा (Non Political Yatra) का दावा दिग्विजय सिंह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। यात्रा में राजनीतिक बैनर भी नहीं लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य धर्मस्थलों की पारदर्शिता बताया गया है। दिग्विजय सिंह इसे जन आस्था से जोड़ रहे हैं।



दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। इसलिए विपक्ष इसे राजनीतिक नजर से देख सकता है। RSS और VHP से समर्थन मांगना भी बड़ा संकेत है। इससे यात्रा केवल धार्मिक मुद्दा नहीं रह गई। अब यह सियासी विमर्श का केंद्र बन सकती है।



राम मंदिर के चंदे पर सवाल

राम मंदिर चंदा विवाद (Ram Mandir Donation Row) इस यात्रा की मुख्य वजह बताया गया। दिग्विजय सिंह ने चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का जिक्र किया।



दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने चंदा दिया था। उनके अनुसार उन्होंने 1.11 लाख रुपए दिए थे। अब वे कानूनी सलाह लेने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि वे अदालत जा सकते हैं।



FAQ

  1. दिग्विजय सिंह पदयात्रा कब शुरू होगी?
    दिग्विजय सिंह पदयात्रा 2 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। यह यात्रा उज्जैन के महाकाल मंदिर से निकलेगी। इसका अंतिम पड़ाव अयोध्या का राम मंदिर होगा। दिग्विजय सिंह ने इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताया है।
  2. मोहन भागवत को निमंत्रण क्यों दिया गया?
    दिग्विजय सिंह ने मोहन भागवत को यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने RSS और VHP से भी समर्थन मांगा है। उनका कहना है कि धर्म की रक्षा के लिए साथ आना चाहिए।
  3. राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
    राम मंदिर चंदा विवाद दिग्विजय सिंह के आरोपों से जुड़ा है। उन्होंने चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उन्होंने 1.11 लाख रुपए चंदा दिया था।

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