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पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक निकलेंगे पदयात्रा पर, जानें डिटेल
Sandeep Kumar | Jul 03, 2026, 17:30 IST
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक निकलेंगे पदयात्रा
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी का आरोप लगाया हैं। वे अयोध्या कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे। साथ ही दिग्विजय ने दो अक्टूबर से महाकाल मंदिर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।
BHOPAL. राम मंदिर चंदा विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा की घोषणा की है। यात्रा दो अक्टूबर 2026 को उज्जैन से शुरू होगी। इसका समापन रामलला की नगरी अयोध्या में होगा। दिग्विजय ने इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताया है। उन्होंने भोपाल निवास के बाहर विरोध वाला पोस्टर लगाया है। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात भी दोहराई है।
पूर्व सीएम दिग्विजय ने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगा लिया है। इस पर लिखा है मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। उन्होंने कहा कि लोग धार्मिक चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग करें।
दिग्विजय सिंह ने कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपए दान दिए थे। अब वे चंदे में गड़बड़ी के मामले में अदालत जाएंगे। उन्होंने कहा कि दान की रसीद और चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। 5 या 6 जुलाई को वे अपने वरिष्ठ अधिवक्ता से बात करेंगे। इसके बाद अयोध्या जाकर कोर्ट में वाद दायर करेंगे।
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दिग्विजय सिंह ने कहा कि जांच में अगर वित्तीय गड़बड़ी सामने आई तो कार्रवाई होनी चाहिए। उनकी मांग है कि जिम्मेदार ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो। जरूरत पड़ने पर यह मांग उच्च स्तर तक उठाई जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि भगवान राम के नाम पर देशभर से लोगों ने आस्था के साथ दान दिया था। अगर उस पैसे का दुरुपयोग हुआ है तो निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने एक शर्त भी रखी।
अगर कोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वे अपना चंदा वापस लेंगे। इसके बाद वह राशि किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को देंगे।
दिग्विजय सिंह पर अक्सर धर्म विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। इस पर उन्होंने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वे खुद को सनातन परंपरा का अनुयायी मानते हैं। उन्होंने बताया कि वे नियमित धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं। एकादशी का व्रत रखते हैं। साथ ही वे नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं।
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी - Vishva Hindu Parishad) की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के इस्तेमाल का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने महाकाल मंदिर परिसर की जमीन से जुड़े पुराने आरोप भी दोहराए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पदाधिकारियों की नियुक्ति और प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस मामले में कई संतों और शंकराचार्यों ने भी पहले आपत्ति जताई थी। यह आपत्तियां समय-समय पर सार्वजनिक तौर पर सामने आई थीं।
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पूर्व सीएम दिग्विजय ने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगा लिया है। इस पर लिखा है मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। उन्होंने कहा कि लोग धार्मिक चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग करें।
अयोध्या कोर्ट जाएंगे दिग्विजय
जिम्मेदारी तय करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि भगवान राम के नाम पर देशभर से लोगों ने आस्था के साथ दान दिया था। अगर उस पैसे का दुरुपयोग हुआ है तो निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने एक शर्त भी रखी।
अगर कोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वे अपना चंदा वापस लेंगे। इसके बाद वह राशि किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को देंगे।
खुद को बताया सनातनी
आरएसएस और वीएचपी पर सवाल
उनका कहना था कि धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के इस्तेमाल का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने महाकाल मंदिर परिसर की जमीन से जुड़े पुराने आरोप भी दोहराए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
ट्रस्ट गठन पर भी उठाए सवाल
FAQ
- दिग्विजय सिंह कब कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे?
दिग्विजय 5 या 6 जुलाई को वकील से चर्चा करेंगे। इसके बाद अयोध्या कोर्ट में वाद दायर करेंगे। - दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के लिए कितना चंदा दिया था?
दिग्विजय ने 1.11 लाख रुपए का चंदा दिया था। उनके पास रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है।
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