भागवत के अहंकार वाले बयान पर दिग्विजय सिंह का समर्थन, बोले-धर्म जोड़ता है, राजनीति बांटती है

Sandeep Kumar | Sept 19, 2026, 17:05 IST
दिग्विजय सिंह ने मांगा भागवत से समर्थन
मोहन भागवत के अहंकार पर दिए बयान का दिग्विजय सिंह ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा धर्म जोड़ता है, राजनीति बांटती है और भागवत से समर्थन मांगा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • RSS चीफ मोहन भागवत ने अहंकार से बचने की सलाह दी।
  • यह बयान उज्जैन के कार्यक्रम में दिया गया।
  • दिग्विजय सिंह ने भागवत के बयान का समर्थन किया।
  • उन्होंने कहा धर्म जोड़ता है और राजनीति बांटती है।
  • दिग्विजय ने भागवत से खुलकर समर्थन देने की अपील की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर राजनीति शुरू हुई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनकी बात का समर्थन किया। भागवत ने उज्जैन में युवाओं को अहंकार से बचने की सलाह दी। दिग्विजय ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ता है। राजनीति समाज को बांटने का काम करती है। उन्होंने भागवत से अपने विचारों का समर्थन भी मांगा।



भागवत के समर्थन में दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर भागवत का वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा कि वे भागवत की बात से सहमत हैं। जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है, यह बात उन्हें सही लगी। किसी को भी अहं में नहीं डूबना चाहिए, यह उनकी राय थी।



7a9f5f58-a26


दिग्विजय ने लिखा, काश, सभी बड़े लोग इसे समझें। यह पंक्ति उनके पोस्ट का अहम हिस्सा रही। उन्होंने आगे कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति में नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है।



राजनीति इसके उलट लोगों को बांटती है, यह उनका कहना था। दिग्विजय ने धर्म की तुलना समुद्र से भी की। उन्होंने कहा कि हर धर्म इंसानियत का रास्ता दिखाता है। यही वजह है कि धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल गलत है, ऐसा उनका मानना है।



दिग्विजय ने भागवत से सीधी अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि भागवत खुद इस बात से सहमत हैं, तो सार्वजनिक रूप से समर्थन दें। ऐसा करने से भागवत की बात की विश्वसनीयता बढ़ेगी। नहीं तो कथनी और करनी में फर्क दिखेगा, यह दिग्विजय ने साफ कहा।



भागवत ने क्या कहा था

मोहन भागवत ने यह बयान युवा धर्म संसद में दिया था। यह कार्यक्रम उज्जैन में शुक्रवार को हुआ था। इसमें करीब 1,700 युवा शामिल हुए। भागवत ने युवाओं को अहंकार से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इंसान अहंकार में गलतफहमी पाल लेता है। उसे लगता है सब कुछ उसकी इच्छा से चलता है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता, भागवत ने समझाया। उन्होंने सूर्य का उदाहरण देकर बात स्पष्ट की।



जिसका उदय होता है, उसका अस्त तय है, भागवत ने कहा। यह प्रकृति का नियम है, ऐसा उनका कहना था। भागवत ने धर्म को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा धर्म सिर्फ पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है।



धर्म जीवन के हर चरण में मौजूद रहता है, भागवत ने बताया। इसे बुढ़ापे या रिटायरमेंट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। भागवत ने अपने भाषण में किसी नेता का नाम नहीं लिया। फिर भी उनके बयान के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे।



राजनीतिक मायने क्या हैं

भागवत के बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे मौजूदा राजनीति से जोड़कर देखा। दिग्विजय सिंह का समर्थन इस चर्चा को और हवा देने वाला माना जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर भागवत से जवाब भी मांगा है।



दिग्विजय का यह कहना कि धर्म और राजनीति अलग रहने चाहिए, अहम है। कांग्रेस लंबे समय से भाजपा पर धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाती रही है। ऐसे में दिग्विजय का यह बयान उसी दिशा में एक और कड़ी माना जा सकता है। हालांकि भागवत की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



आने वाले दिनों में इस बयान पर और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं। भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेता भी इस पर बोल सकते हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।



ये भी पढ़ें...

उज्जैन में युवा धर्म संसद: RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- धर्म जीवन का अनुशासन है



युवा धर्म संसद-2026: उज्जैन में 24 राज्यों के 1500 युवा करेंगे मंथन, मोहन भागवत करेंगे उद्घाटन



दिग्गी का भागवत को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण, RSS से मांगा समर्थन



राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्‍य प्रदेश कांग्रेस में मच रहा घमासान! दिग्गी का कार्यकाल अप्रैल में होगा खत्म



Tags:
  • आरएसएस
  • दिग्विजय सिंह
  • मोहन भागवत
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  • सोशल मीडिया