TET को लेकर शिक्षकों के पक्ष में उतरे दिग्विजय सिंह, सीएम को लिखा पत्र- सरकार कोर्ट में रखे पक्ष

Sandeep Kumar | Apr 04, 2026, 18:09 IST
Digvijay Singh
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने टीईटी अनिवार्यता पर सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से शिक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

News in Short

  • दिग्विजय सिंह ने TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष रखने की अपील की।
  • सिंह ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता से शिक्षकों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
  • दिग्विजय सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश को टीईटी अनिवार्यता पर सुनवाई का मौका नहीं मिला।
  • सिंह ने अनुभवहीन शिक्षकों पर टीईटी लागू करने को अन्यायपूर्ण बताया।
  • दिग्विजय ने 40-50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए टीईटी पर रोक की मांग की।

News in Detail

मध्यप्रदेश में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि यह मुद्दा लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है। राज्य सरकार को इस पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह शिक्षकों पर छोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से रिव्यू पिटीशन या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की अपील की।



Digvijay Singh


कोर्ट की लड़ाई से बढ़ेगा आर्थिक बोझ

सिंह ने कहा कि यदि शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हैं, तो उन्हें महंगे वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं लेनी होंगी। इससे हजारों शिक्षकों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस स्थिति को समझकर शिक्षकों की ओर से कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।



मध्यप्रदेश का पक्ष नहीं सुना गया

दिग्विजय ने अपने पत्र में कहा कि टीईटी अनिवार्यता का आधार महाराष्ट्र राज्य से संबंधित निर्णय है। मध्य प्रदेश उस प्रकरण में पक्षकार नहीं था। इसलिए, राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।



अनुभवी शिक्षकों पर बढ़ेगा दबाव

सिंह यह भी कहा कि प्रदेश में कई वर्षों से व्यापमं (Vyapam) के माध्यम से मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू की जा रही है। ऐसे में, 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। दिग्विजय ने इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।



टीईटी पर रोक की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू करने का सुझाव दिया। इससे पहले से कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलेगी। वे अपनी सेवाएं बिना डर के जारी रख सकेंगे।



दिग्विजय सिंह ने 40-50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों का जिक्र किया। उनका कहना था कि इस उम्र में परीक्षा देना व्यावहारिक नहीं है। इससे मानसिक दबाव बढ़ेगा और आर्थिक संकट भी हो सकता है।



एमपी में गहराया TET विवाद, शिक्षक संघों ने किया प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान



ESB एमपी शिक्षक वर्ग 2 के 10758 पदों का रिजल्ट अब किसी भी समय, आखिरी साइन बाकी



MP Board Exam Pattern में बड़ा बदलाव, 10वीं में 7 और 12वीं में अब देने होंगे 6 पेपर



MP में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका, MP TET वर्ग 3 परीक्षा 2025 का नोटिफिकेशन जरूरी







Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश
  • दिग्विजय सिंह
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव
  • पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
  • TET