डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60 लाख रुपए से अधिक का गबन! दो पूर्व CMHO समेत 6 पर FIR, EOW ने की कार्रवाई

Amresh Kushwaha | Oct 21, 2026, 22:17 IST
डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में लाखों का घोटाला।
मध्यप्रदेश के डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60 लाख 60 हजार रुपए के कथित गबन का मामला सामने आया है। जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें दो पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल हैं। जांच में 2016 से 2025 के बीच भुगतान में गड़बड़ियां मिली हैं।
Embezzlement of over 60 lakh in the Dindori Health Department FIR registered against 6 individuals, including two former CMHOs EOW takes action.

आरोप है कि एरियर और भत्तों के नाम पर ज्यादा पैसे निकाले गए थे। वेंडरों को दोहरा भुगतान करने का मामला भी सामने आया है। EOW ने मामले की जांच शुरू कर दी है।



9 साल तक भुगतान में गड़बड़ी

EOW की शुरुआती जांच में पैसों के लेनदेन में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। ये गड़बड़ियां 2016 से 2025 के बीच हुई थीं। जांच में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के IFMIS पोर्टल पर गलत जानकारी डाली गई थी। कर्मचारियों के बकाया वेतन यानी एरियर का हिसाब भी गलत लगाया गया था।



कई कर्मचारियों को तय रकम से ज्यादा पैसे दिए गए। कुछ मामलों में बिना जरूरी दस्तावेज और आदेश के ही भुगतान कर दिया गया। EOW के मुताबिक इन गड़बड़ियों से सरकार को 60 लाख 60 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।



एरियर में 49.89 लाख का भुगतान

EOW एसपी अनिल विश्वकर्मा ने इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि आरोपी स्वास्थ्य विभाग की लेखा शाखा में काम करते थे। इनकी जिम्मेदारी भुगतान की जानकारी दर्ज करना और जांच करना थी। इसके बाद भुगतान को मंजूरी देने का काम भी इन्हीं के पास था।



आरोप है कि कर्मचारियों के बकाया वेतन यानी एरियर का गलत हिसाब लगाया गया। इसके बाद IFMIS पोर्टल पर तय रकम से ज्यादा पैसे दर्ज किए गए। कई कर्मचारियों को बिना पात्रता जांच और जरूरी आदेशों के भुगतान कर दिया गया। पुराने रिकॉर्ड की भी ठीक से जांच नहीं की गई।



जिन कर्मचारियों को पहले एरियर मिल चुका था, उनका हिसाब भी सही नहीं किया गया। नियम के मुताबिक पहले मिली रकम को नए भुगतान से घटाना था। इसके लिए पोर्टल पर नेगेटिव एंट्री करनी होती है। यानी पहले दिए गए पैसों की रकम घटाकर दर्ज करनी होती है।



EOW के मुताबिक इस प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की गई। इससे एरियर के नाम पर 49 लाख 89 हजार रुपए का कथित गलत भुगतान हुआ।



भत्तों में 5.89 लाख रुपए ज्यादा दिए

जांच में कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्तों में भी गड़बड़ी मिली है। आरोप है कि बिना सरकारी आदेश के भुगतान की मद बदल दी गई। इसके बाद कर्मचारियों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और मकान किराया भत्ता दिया गया। इन भत्तों के नाम पर पांच लाख 89 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ।



वेंडरों यानी सामान और सेवाएं देने वालों के भुगतान में भी गड़बड़ी सामने आई है। कुछ मामलों में एक ही बिल का दो बार भुगतान करने का आरोप है।



EOW के मुताबिक नियमों का पालन किए बिना बिल मंजूर किए गए। इसके लिए डिजिटल सिग्नेचर यानी ऑनलाइन हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सरकारी पैसे लाभार्थियों और संदिग्ध बैंक खातों में भेज दिए गए।



इन छह लोगों पर दर्ज हुई FIR

EOW ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें दो पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) भी शामिल हैं।



आरके मेहरा और रमेश सिंह मरावी डिंडौरी में CMHO रह चुके हैं। बलदेव सिंह भलावी उस समय DHC के पद पर थे। भरत सिंह टेकाम DHO के पद पर काम कर रहे थे।



इनके अलावा सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारी गुलाब साहू और सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते का नाम भी FIR में शामिल है।



EOW अब जांच कर रही है कि इन छह लोगों की गड़बड़ियों में क्या भूमिका रही।



पूर्व CMHO मरावी पर क्या है आरोप?

जांच में डिंडौरी के तत्कालीन CMHO रमेश सिंह मरावी की भूमिका भी सामने आई है। EOW के मुताबिक जुलाई 2024 में एक संदिग्ध भुगतान किया गया था। यह मामला सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी गुलाब प्रसाद साहू से जुड़ा है। उस समय साहू स्वास्थ्य विभाग की लेखा शाखा के प्रभारी थे।



आरोप है कि IFMIS पोर्टल पर एरियर के विशेष विकल्प का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए 4 लाख 78 हजार रुपए का भुगतान किया गया। जांच में सामने आया कि इस भुगतान के लिए जरूरी सरकारी आदेश नहीं थे। भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं मिले।



अब EOW पता लगा रही है कि इस भुगतान को किसने मंजूरी दी। साथ ही इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

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