दहेज में 3 करोड़, 100 तोला सोना देने के बाद भी नहीं बची बेटी, अधिवक्ता कविता नागार्जुन की मौत
News in Short
- अधिवक्ता कविता नागार्जुन की शादी के तीन महीने के भीतर हुई मौत।
- पिता का आरोप- शादी में 100 तोला सोना, 3 करोड़ रुपए और लग्जरी कार दी गई थी।
- ससुराल पक्ष पर शादी के बाद अतिरिक्त 2 करोड़ रुपए मांगने का आरोप।
- पति मेजर ओम नागार्जुन पर मारपीट कर हत्या करने और मौत को कार्डियक अरेस्ट बताने का आरोप।
- पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पिता ने जबलपुर जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया।
News in detail
जबलपुर में अधिवक्ता कविता नागार्जुन की शादी के तीन महीने बाद मौत हुई। पिता ने पति मेजर ओम नागार्जुन, ससुर और अन्य ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया। आरोप है कि दहेज में करोड़ों रुपए लेने के बावजूद उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया गया।
अधिवक्ता की मौत से उठे गंभीर सवाल
भोपाल के ट्विशा मौत मामले के बाद जबलपुर में अधिवक्ता कविता नागार्जुन की मौत अब न्यायिक विवाद बन गई है। चेन्नई निवासी मृतका के पिता दक्षिणामूर्ति ने इसे प्राकृतिक नहीं बल्कि हत्या बताया। उन्होंने जबलपुर जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया है। आरोप है कि विवाह के बाद से ही कविता दहेज के लिए प्रताड़ित होती रही। पति मेजर ओम नागार्जुन, ससुर और अन्य ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
3 करोड़ नकद और लग्जरी कार देने का दावा
चेन्नई निवासी एडवोकेट कविता का विवाह सेना में मेजर डॉ. ओम नागार्जुन से 2 मार्च 2025 को हुआ था। शादी के कुछ ही दिनों बाद उसके पति का ट्रांसफर जबलपुर हो गया था। विवाह के समय ससुराल पक्ष की मांग के अनुरूप लगभग 100 तोला सोना, 3 करोड़ रुपए नकद, 20 लाख रुपए का हीरे का हार और XUV-700 कार दी गई थी। इसके अलावा करीब 12 लाख रुपए का गृहस्थी का सामान भी उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि इसके बाद भी मांगों का सिलसिला नहीं रुका और ससुराल पक्ष लगातार अतिरिक्त आर्थिक लाभ लेने का दबाव बनाता रहा।
50 लाख रुपए मांगने का आरोप
मृतका के पिता ने कहा कि कविता के ससुर, जो सेना में कर्नल रहे हैं, ने अस्पताल खोलने के लिए 50 लाख रुपए मांगे थे। परिवार ने यह राशि उपलब्ध कराई। इसके बावजूद कविता को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती रही। आरोपों के अनुसार शादी के बाद अतिरिक्त 2 करोड़ रुपए की मांग की गई।
किया जाता था अपमानित
परिवाद में कहा गया है कि कविता को उसके शारीरिक स्वरूप और बनावट को लेकर लगातार अपमानित किया जाता था। परिवार का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक दबाव और प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। पिता ने बताया कि बेटी ने कई बार अपनी पीड़ा परिवार के साथ साझा की थी।
सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने का दावा
परिवाद में सबसे गंभीर आरोप कविता के सिर पर मिले कथित चोटों को लेकर हैं। पिता का दावा है कि मृतका के सिर पर दो गंभीर चोटें थीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि 3 इंच × 5 सेंटीमीटर में जमा रक्त का थक्का प्राणघातक चोट माना जाता है। आरोप है कि इन चोटों की पर्याप्त जांच किए बिना मौत को सामान्य बताया गया।
3 घंटे लगने पर सवाल
परिवार ने घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं। आरोप है कि 22 जून 2025 को मेजर ओम नागार्जुन सुबह 10 बजे कविता को जेएके आरआरसी मैस से लेकर निकले। परिवाद के अनुसार अस्पताल कुछ मिनटों की दूरी पर था। अस्पताल पहुंचने में लगभग तीन घंटे का समय लगा। पिता का आरोप है कि इसी दौरान कविता के साथ मारपीट हुई और उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं ससुराल पक्ष की ओर से यह बताया गया था कि बाथरूम में फिसलने के बाद उसकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है।
कार्डियक अरेस्ट की थ्योरी पर परिवार ने उठाए सवाल
परिवार का कहना है कि मौत को कार्डियक अरेस्ट बताकर मामला सामान्य दिखाया गया। पिता ने बताया कि कविता के परिवार में किसी को हृदय रोग की पृष्ठभूमि नहीं है। 25 अप्रैल 2025 को चेन्नई के राजीव गांधी नेशनल मेडिकल हॉस्पिटल में उनका स्वास्थ्य परीक्षण हुआ था। जांच में हृदय संबंधी कोई समस्या नहीं पाई गई। परिवार कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत के दावे पर सवाल उठा रहा है।
कार्रवाई नहीं होने का आरोप
दक्षिणामूर्ति का कहना है कि उन्होंने बेटी की मौत को लेकर संबंधित थाने में शिकायत दी थी। लेकिन उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस स्तर पर अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर परिवार ने न्यायालय की शरण ली। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच और आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
मेरी बेटी की हत्या हुई है
मृतका के पिता ने परिवाद में कहा कि बेटी की मौत प्राकृतिक नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दहेज की लगातार मांग, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा संदिग्ध परिस्थितियां हत्या का संकेत देती हैं। अब न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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