शिक्षकों का विरोध देख डीपीआई तलाश रहा टीईटी की अनिवार्यता का समाधान
News in Short
टीईटी के विरोध का कारण नए सिलेबस और पैटर्न में बदलाव है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया।
टीईटी अनिवार्यता के कारण 25-30 साल के शिक्षक चिंतित हैं।
शिक्षक संघ ने सरकार से मामला सुलझाने के लिए चर्चा की।
सरकार ने शिक्षकों के पक्ष को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।
News in Detail
शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पर बढ़ते विरोध के बाद सरकार भी हरकत में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की मांग को देखते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ने डीपीआई के अधिकारियों से मंत्रणा की है। मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने डीपीआई संचालक और विधि प्रभारी को समाधान तलाशने का जिम्मा सौंपा है।
नाराज शिक्षक अब आंदोलन पर उतरे
मध्यप्रदेश में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से नाराज शिक्षक अब आंदोलन पर उतर आए हैं। बुधवार को प्रदेश भर से जमा शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय के सामने भी प्रदर्शन किया था। वहीं 11 अप्रैल को सभी जिलों में धरने की घोषणा भी की थी।
बढ़ते विरोध के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की थी। इस चर्चा के बाद स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों की नाराजगी दूर करने का रास्ता तलाशने में जुट गया है। वहीं सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने के लिए पुनर्विचार याचिका पेश करने के संबंध में महाधिवक्ता से सलाह मांगी है।
टीईटी का पैटर्न और सिलेबस का तनाव
सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को अनिवार्य माना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षकों को टीईटी में शामिल होने के निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षकों को इसके लिए 30 अप्रैल तक टीईटी के लिए रजिस्ट्रेशन कराने भी कहा गया है। वहीं पात्रता परीक्षा में शामिल न होने या फैल होने की स्थिति में नियमित सेवा से बाहर करने की चेतावनी भी दी है। यानी जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी के आधार पर नहीं हुई है उन्हें अब यह परीक्षा देनी ही होगी।
विरोध की वजह है फैल होने का अंदेशा
स्कूलों में 25 से 30 साल की नौकरी पूरी करने वाले और अन्य शिक्षकों को मिलाकर करीब सवा लाख शिक्षक टीईटी के दायरे में हैं। इन शिक्षकों को नए सिलेबस और नए पैटर्न पर आधारित परीक्षा में फेल होने का डर सता रहा है।
इन शिक्षकों का कहना है वे ढाई- तीन दशक पहले जब इस सेवा में आए थे तब पढ़ाई और परीक्षा का स्तर पूरी तरह अलग था। अब नए पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा देना उनके लिए मुश्किल है। परिणाम में फेल होने पर हजारों शिक्षकों की योग्यता पर सवाल खड़े होंगे जो कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी विपरीत होगा।
विवाद सुलझाने आगे आए स्कूल शिक्षा मंत्री
मध्यप्रदेश शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ.क्षत्रवीर सिंह राठौर के साथ गए प्रतिनिधिमंडल से मंत्री राव उदयप्रताप की लंबी चर्चा हुई है। डॉ. राठौर ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने भी मामले को लेकर संवदेनशीलता दिखाई है। उन्होंने शिक्षकों का अहित न होने देने का आश्वासन दिया है।
वहीं उनके निवास पर हुई बैठक में डीपीआई संचालक केके द्विवेदी और विधि प्रभारी राजेन्द्र डेकाटे को अधिकृत किया गया है। ये अधिकारी पुनर्विचार याचिका के संबंध में सलाह मशविरा करेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने के संबंध में डीपीआई महाधिवक्ता से भी सलाह ले रही है।
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