स्कूल लौटो मिशन पर शिक्षा विभाग: राजनीतिक संरक्षण वाले अटैच शिक्षकों पर शिकंजा
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त।
- 16 जिलों में कार्रवाई।
- आयुक्त अभिषेक सिंह खुद कर रहे मॉनिटरिंग।
- कलेक्टरों को जल्द रिलीव करने के निर्देश।
- शिक्षक अब अपने मूल विद्यालयों में लौटेंगे।
- विभाग का फोकस: बच्चों की पढ़ाई, दफ्तरों की ड्यूटी नहीं।
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्षों से दूसरे दफ्तरों में अटैच होकर काम कर रहे शिक्षकों पर बड़ा एक्शन शुरू कर दिया है। विभाग का साफ संदेश है कि शिक्षक की नियुक्ति बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई है, इसलिए अब उन्हें वापस स्कूल भेजा जाएगा। आयुक्त अभिषेक सिंह खुद इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और कलेक्टरों से लगातार संपर्क में हैं।
शिक्षकों की घर वापसी का अभियान तेज
स्कूल शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन शिक्षकों को वापस स्कूल भेजना है, जो वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अटैच होकर काम कर रहे हैं।
इनमें कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जिन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलने की चर्चा है और वे स्कूल लौटने से बच रहे हैं। इसी वजह से विभाग अब जिला प्रशासन के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से सभी अटैचमेंट खत्म करने की कार्रवाई कर रहा है।
आयुक्त अभिषेक सिंह अलर्ट मोड पर
सूत्रों के मुताबिक आयुक्त अभिषेक सिंह स्वयं जिलों के कलेक्टरों से बात कर रहे हैं। जिन जिलों में अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक अटैच हैं, वहां उन्हें जल्द से जल्द रिलीव कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
आयुक्त का स्पष्ट कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है, न कि दूसरे कार्यालयों में काम करना।
आयुक्त का बयान
शिक्षकों की भर्ती बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई है। इसलिए सभी अटैचमेंट समाप्त कर शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में भेजा जा रहा है। जहां भी अटैचमेंट शेष हैं, उन्हें भी जल्द खत्म कराया जाएगा।
कई जिलों में तेजी से हो रही कार्रवाई
विभागीय जानकारी के अनुसार कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों को पहले ही रिलीव किया जा चुका है। भोपाल में अधिकांश शिक्षक वापस भेजे जा चुके हैं, केवल कुछ मामले शेष हैं। ग्वालियर में भी अधिकांश अटैचमेंट खत्म हो चुके हैं।
विदिशा, देवास, इंदौर और मुरैना समेत कई जिलों में कार्रवाई जारी है। जिन जिलों में संख्या ज्यादा है, वहां 50% से अधिक शिक्षकों को पहले ही मूल स्कूलों में भेजा जा चुका है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने 16 जिलों के 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिक्षकों को तत्काल उनके मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराया जाए।
किन जिलों में मिले सबसे ज्यादा अटैच शिक्षक?
समीक्षा में जिन जिलों का नाम सामने आया, उनमें प्रमुख हैं-
- उज्जैन
- देवास
- नीमच
- शहडोल
- दतिया
- ग्वालियर
- भिंड
- श्योपुर
- गुना
- रीवा
- सीधी
- कटनी
- सिंगरौली
- सतना
- राजगढ़
- मंडला
स्कूल छोड़ आखिर कहां कर रहे थे ड्यूटी?
जांच में सामने आया कि कई शिक्षक वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यालय में कार्यरत थे, जैसे-
- विधायक कार्यालय (पीए/निजी सहायक)
- कलेक्टर कार्यालय
- जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
- जिला पंचायत
- जनपद पंचायत
- एसडीएम कार्यालय
- जिला निर्वाचन कार्यालय
- समग्र शिक्षा कार्यालय
- जनशिक्षा केंद्र
- बीईओ/बीआरसी कार्यालय
- मंत्रालय, भोपाल
- अन्य प्रशासनिक कार्यालय
विधानसभा में सवाल के बाद बढ़ी कार्रवाई
पिछले विधानसभा सत्र में तारांकित प्रश्न क्रमांक-1108 के जरिए स्कूलों से बाहर अटैच शिक्षकों का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से जानकारी मंगाई।
क्यों अहम है यह फैसला?
शिक्षा विभाग का मानना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों से बाहर रहने के कारण कई सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब इन शिक्षकों की वापसी से शिक्षकों की कमी दूर होगी और विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई का लाभ मिलेगा।
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