सरकारी जमीन में खेल : EOW ने सोसायटी अध्यक्ष और तहसीलदार धुर्वे पर कसा शिकंजा

Neel Tiwari | Feb 07, 2026, 19:30 IST
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जबलपुर में सरकारी जमीन के दुरुपयोग और प्रशासनिक मिलीभगत का मामला सामने आया है। शैक्षणिक उपयोग के लिए दी गई नगर निगम की भूमि पर अस्पताल बनाने का आरोप जॉय एजुकेशन सोसायटी पर है।

News in short

  • शैक्षणिक कार्य के लिए 30 साल की लीज पर दी गई थी जमीन।
  • स्कूल की जगह बिना अनुमति अस्पताल का निर्माण।
  • तहसीलदार से सांठगांठ कर Ownership अपने नाम कराई।
  • जमीन की कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपए।
  • BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मेंबर और तहसीलदार धुर्वे पर FIR दर्ज।

News in detail

जबलपुर में सरकारी जमीन के दुरुपयोग और प्रशासनिक मिलीभगत का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शैक्षणिक उपयोग के लिए दी गई नगर निगम की भूमि पर अस्पताल खड़ा करने का आरोप जॉय एजुकेशन सोसायटी पर लगा है। EOW ने इस मामले में सोसायटी के अध्यक्ष अखिलेश मेंबन और तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ FIR दर्ज की है।



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क्या है पूरा मामला

जबलपुर निवासी राजकुमार द्वारा की गई शिकायत के बाद EOW ने जॉय एजुकेशन सोसायटी की गतिविधियों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि नगर निगम की कीमती जमीन को शैक्षणिक उपयोग के नाम पर रियायती दरों पर लीज पर लिया गया। लेकिन वास्तविकता में उस पर शिक्षा से इतर व्यावसायिक गतिविधियां की गईं। EOW की प्रारंभिक जांच ने इस पूरे मामले को सुनियोजित धोखाधड़ी करार दिया है।



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स्कूल कभी चला ही नहीं

ईओडब्ल्यू की जांच में पाया गया कि अधारताल में प्लॉट नंबर 440 की करीब 7500 वर्गफुट जमीन जॉय एजुकेशन सोसायटी को 30 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की शर्त थी कि भूमि का उपयोग केवल शिक्षा के लिए होगा। हैरानी की बात यह है कि इस जमीन पर कभी स्कूल नहीं खोला गया।



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लीज बढ़वाई, फिर अस्पताल खड़ा कर दिया

साल 2020 में लीज अवधि समाप्त होने के बाद अखिलेश मेंबन ने पुनः आवेदन देकर 2022 में 30 साल की लीज बढ़वा ली। इसके बाद शिक्षा गतिविधि शुरू करने के बजाय नगर निगम की अनुमति के बिना अस्पताल का निर्माण शुरू कर दिया गया। स्वीकृत नक्शे और लीज शर्तों के विपरीत इस निर्माण को EOW ने गंभीर नियम उल्लंघन माना है।



तहसीलदार से सांठगांठ, जमीन की Ownership हड़पी

जांच में यह सामने आया कि अस्पताल निर्माण के दौरान तत्कालीन तहसीलदार हरिसिंह धुर्वे से मिलीभगत कर नगर निगम की भूमि की Ownership बिना वैधानिक प्रक्रिया के अपने नाम करवा ली गई। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इस व्यावसायिक क्षेत्र की जमीन की कीमत 3.50 करोड़ रुपए है। इससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।



लगातार विवादों से घिरा रहा है अखिलेश मेंबन

जॉय एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष अखिलेश मेंबन पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। उन पर स्कूल में अवैध फीस वसूली, धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट, जबरन धर्मांतरण और जमीन से जुड़ी आर्थिक अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप हैं। विभिन्न मामलों में एफआईआर दर्ज हुई।



एक मामले में अवैध फीस वसूली के आरोप में गिरफ्तारी हुई। दूसरे मामले में आपत्तिजनक स्टेटस के आरोप में कोच्चि एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। बाद में उनकी बहू की शिकायत पर धर्मांतरण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में परिवार सहित गिरफ्तारी हुई। इसके बाद वे लगातार कानूनी कार्रवाइयों के घेरे में रहे।



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इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

EOW ने अखिलेश मेबन और तहसीलदार हरिसिंह धुर्वे के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। यह अपराध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7-सी के तहत दर्ज हुआ। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों और भू-माफिया नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।



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