अक्टूबर तक और ताकतवर होगा अल नीनो, WMO ने किया अलर्ट

Sourabh Bhatnagar | Aug 05, 2026, 10:45 IST
el nino 2026 wmo warning weather impact
WMO ने बताया कि अगस्त से अक्टूबर 2026 तक अल नीनो और मजबूत होगा। दुनिया भर में तापमान बढ़ेगा और भारत सहित कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है। UN प्रमुख गुटेरेस ने इसे गंभीर चेतावनी बताया है।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने अल नीनो पर नई रिपोर्ट जारी की है।
    • अगस्त से अक्टूबर 2026 तक अल नीनो और मजबूत होगा।
    • दुनिया भर में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की आशंका है।
    • भारत सहित कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है।
    • UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे गंभीर चेतावनी बताया है।

    WMO ने दुनिया के मौसम को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। संस्था के मुताबिक अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले महीनों में इसका असर पूरी दुनिया पर दिखेगा। यह जानकारी WMO की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।



    WMO रिपोर्ट में क्या कहा गया

    WMO की मंथली ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बताया गया कि अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच अल नीनो और तेज होगा। दुनिया के बड़े मौसम केंद्रों के अनुमान भी यही बता रहे हैं।



    ये केंद्र अलग-अलग देशों के मौसम विभागों से जुड़े हैं। मुख्य निगरानी वाले समुद्री इलाकों में तापमान का अंतर 2.9 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो सकता है।



    यह आंकड़ा बताता है कि अल नीनो एक बड़ी घटना बन सकता है। पिछले कुछ दशकों में ऐसी बड़ी घटनाएं कम ही देखी गई हैं। रिपोर्ट में सरकारों और राहत एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खेती और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को भी चेताया गया है। इन क्षेत्रों पर मौसम बदलाव का सीधा असर पड़ता है।



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    इंडियन ओशन डाइपोल का असर

    रिपोर्ट में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का भी जिक्र है। यह एक खास तरह का समुद्री मौसम पैटर्न है। इसमें पश्चिमी हिंद महासागर सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। वहीं पूर्वी हिंद महासागर सामान्य से ठंडा रहता है। यह अंतर हवाओं और बारिश के पैटर्न को बदल देता है। अल नीनो और IOD मिलकर मौसम को और असंतुलित कर सकते हैं।



    इससे सूखा, बाढ़ और जंगल की आग का खतरा बढ़ सकता है। हिंद महासागर से सटे इलाकों में यह खतरा सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञ इसे एक चिंताजनक संयोग बता रहे हैं।



    गुटेरेस की सख्त चेतावनी

    UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अल नीनो अब दरवाजे पर नहीं, घर के अंदर आ चुका है। उनके मुताबिक यह गर्मी को लगातार बढ़ा रहा है। गुटेरेस ने कहा कि यह अभी सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि धरती पहले से ही भीषण गर्मी झेल रही है। जंगल की आग और समुद्र का गर्म होना भी बड़ी समस्या है।



    उन्होंने फॉसिल फ्यूल यानी पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन को इस संकट की वजह बताया। उनका कहना है कि कोयला, तेल और गैस का ज्यादा इस्तेमाल खतरा और बढ़ाएगा। गुटेरेस ने साफ कहा कि अब इंतजार करने का समय नहीं बचा है। उन्होंने देशों से तुरंत कदम उठाने की अपील की है।



    कहां बढ़ेगा तापमान

    रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप और अरब प्रायद्वीप में असर साफ दिखेगा। भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया भी इस सूची में शामिल हैं।



    मध्य अमेरिका, कैरिबियन और दक्षिणी अफ्रीका में भी गर्मी बढ़ सकती है। दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्से और न्यूजीलैंड भी प्रभावित हो सकते हैं। भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो का असर पहले से ही दिख रहा है। यह क्षेत्र अल नीनो की शुरुआत का मुख्य केंद्र माना जाता है।



    बारिश पर क्या असर होगा

    बारिश को लेकर भी रिपोर्ट में साफ संकेत दिए गए हैं। अफ्रीका, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश हो सकती है। दक्षिणी यूरोप और पश्चिमी उत्तरी अमेरिका में भी बारिश बढ़ सकती है। दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका में भी यही ट्रेंड दिख सकता है। वहीं भारतीय उपमहाद्वीप में बारिश कम रहने की आशंका है। दक्षिणी और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में भी सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। दक्षिणी मध्य अमेरिका, कैरिबियन और उत्तरी यूरोप में भी कम बारिश की आशंका है। उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी यही स्थिति रहने का अनुमान है। यह पैटर्न पुराने मजबूत अल नीनो सालों जैसा ही है।



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    भारत पर क्या पड़ेगा असर

    भारत के लिए यह रिपोर्ट खास तौर पर अहम मानी जा रही है। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। बारिश कम होने से फसलों पर सीधा असर पड़ सकता है। गर्मी बढ़ने से पानी की कमी की समस्या भी बढ़ सकती है। किसानों को समय रहते फसल की योजना बनानी होगी। मौसम विभाग को भी लगातार अपडेट देने की जरूरत रहेगी। शहरी इलाकों में गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों को पहले से तैयारी करनी होगी।



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    आगे क्या करना होगा

    विश्व मौसम विज्ञान संगठनने सभी देशों को समय रहते तैयारी करने की सलाह दी है। खेती से जुड़े किसानों को फसल योजना में सावधानी बरतनी होगी। स्वास्थ्य विभागों को गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लिए तैयार रहना होगा। राहत एजेंसियों को सूखे और बाढ़ दोनों के लिए योजना बनानी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर कदम उठाने से नुकसान कम हो सकता है। अल नीनो का यह दौर आने वाले महीनों में और साफ होता जाएगा। आने वाले हफ्तों में WMO और अपडेट जारी कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर तैयारी से बड़ा नुकसान टाला जा सकता है। आम लोगों को भी मौसम के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।



    FAQ

    1. सवाल: अल नीनो क्या होता है?
      जवाब: अल नीनो एक समुद्री मौसम पैटर्न है। इसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है। बारिश और तापमान के पैटर्न बदल जाते हैं। कई इलाकों में सूखा तो कई में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
    2. सवाल: अल नीनो 2026 का भारत पर क्या असर होगा?
      जवाब: WMO की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बारिश कम रहने की आशंका है। इससे खेती और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। तापमान भी सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है। इससे पानी की कमी और गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं। किसानों और स्वास्थ्य विभाग को पहले से तैयारी करनी होगी।
    3. सवाल: पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल क्या है?
      जवाब: यह एक समुद्री मौसम पैटर्न है जिसमें पश्चिमी हिंद महासागर ज्यादा गर्म हो जाता है। वहीं पूर्वी हिंद महासागर सामान्य से ठंडा रहता है। यह अंतर हवाओं और बारिश के पैटर्न को प्रभावित करता है। अल नीनो के साथ मिलकर यह मौसम को और असंतुलित बना सकता है। इससे सूखा, बाढ़ और जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है।

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