बस का टैक्स बकाया तो EOW ने मालिकों पर कर दी FIR, HC पहुंचा मामला

Neel Tiwari | Mar 11, 2026, 19:21 IST
bus owners tax
डिंडौरी के बस संचालकों ने EOW द्वारा टैक्स बकाया मामले में दर्ज FIR को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने EOW से शपथपत्र मांगा और मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को तय की है।

News in Short

  • डिंडौरी के बस संचालकों ने EOW की FIR को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
  • याचिका में कहा गया कि टैक्स वसूली मोटर यान कराधान अधिनियम के तहत होती है।
  • RTO ने पहले ही टैक्स डिमांड नोटिस जारी किए थे।
  • हाईकोर्ट ने EOW के डीजीपी और लीगल एडवाइजर से शपथपत्र मांगा।
  • मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय।

News in detail

जबलपुर हाईकोर्ट ने बसों के बकाया टैक्स के मामले में EOW द्वारा दर्ज की गई FIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। डिंडौरी के दो बस संचालकों ने इस FIR को अदालत में चुनौती दी है। प्राथमिक सुनवाई में अदालत ने EOW के डीजीपी और लीगल एडवाइजर से शपथपत्र के जरिए जवाब मांगा है।



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बस टैक्स बकाया को लेकर दर्ज FIR हाईकोर्ट पहुंची

डिंडौरी जिले के बस संचालक संजय और साधना केशवानी के खिलाफ EOW भोपाल ने FIR दर्ज की है। दोनों ने FIR को गलत बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका अधिवक्ता ब्रजेश दुबे के माध्यम से दायर की गई है।





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टैक्स वसूली का अलग कानून

याचिका में बस संचालकों ने अदालत को बताया कि बसों के टैक्स बकाया की वसूली के लिए पहले से कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। मोटर यान कराधान अधिनियम की धारा 8 और 16 के तहत टैक्स वसूली की जा सकती है। ऐसे मामलों में परिवहन विभाग नोटिस जारी कर बकाया राशि वसूलता है, न कि आपराधिक प्रकरण दर्ज करता है।



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RTO ने जारी किए थे टैक्स डिमांड नोटिस

याचिकाकर्ताओं के अनुसार डिंडौरी के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा पहले ही टैक्स डिमांड नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों को भी उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद EOW ने एक शिकायत के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया, जिसे याचिकाकर्ताओं ने मनमाना और कानून के खिलाफ बताया है।



क्या है पूरा मामला

जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला डिंडौरी जिले में पंजीकृत यात्री बसों से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही टैक्स अनियमितताओं से संबंधित है। जांच में सामने आया कि संजय केशवानी और साधना केशवानी के नाम पर कुल 16 यात्री बसें डिंडौरी, जबलपुर, शहडोल, मंडला और बालाघाट जिलों में पंजीकृत थीं, जो डिंडौरी-जबलपुर, डिंडौरी-बम्हनी, बिछिया-डिंडौरी और अमरकंटक-मलाजखंड जैसे रूटों पर संचालित होती थीं।



आरोप है कि वर्ष 2006 से 2025 तक इन बसों का मोटर वाहन टैक्स जमा नहीं किया गया और टैक्स से बचने के लिए बस मालिकों ने परिवहन विभाग को यह सूचना दे दी कि बसों को कबाड़ में बेच दिया गया है। हालांकि जांच में पाया गया कि बसों को नष्ट करने की कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी। वर्ष 2017 में जब जिला परिवहन कार्यालय डिंडौरी ने बकाया टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो संबंधित बसों की टैक्स फाइलें ही रिकॉर्ड से गायब मिलीं।



आरोप है कि उस समय पदस्थ सहायक ग्रेड-1 कर्मचारी पुष्प कुमार प्रधान ने मूल फाइलों को सुरक्षित नहीं रखा, जिससे वसूली की कार्रवाई रुक गई और शासन को करीब 9 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इन तथ्यों के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने बस मालिकों और परिवहन विभाग के कर्मचारी सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।



हाईकोर्ट ने EOW से पूछा बड़ा सवाल

मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच ने EOW की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र बिसेन ने EOW के डीजीपी और लीगल एडवाइजर को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि टैक्स वसूली के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNSS की धाराओं के तहत FIR कैसे दर्ज की जा सकती है।



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17 मार्च को होगी अगली सुनवाई

प्राथमिक सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की है। EOW की ओर से दाखिल शपथपत्र के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि टैक्स बकाया के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का कानूनी आधार क्या है। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और आपराधिक प्रक्रिया के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस बन गया है।



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